{"_id":"6138c53f8ebc3e32763ae844","slug":"pu-s-next-dean-research-will-be-prof-sk-tomar-chandigarh-news-pkl426055994","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीयू के अगले डीन रिसर्च होंगे प्रो. एसके तोमर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीयू के अगले डीन रिसर्च होंगे प्रो. एसके तोमर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय की डीन रिसर्च प्रो. राजेश गिल का कार्यकाल इसी माह पूरा हो रहा है। उनकी जगह प्रो. एसके तोमर को लगाए जाने की तैयारी है, क्योंकि वह वरिष्ठता में सबसे आगे हैं। यह पद अपने में महत्वपूर्ण होता है।
डीन रिसर्च का पद कुछ वर्ष पहले ही बनाया गया था। इस पद को पिछले वर्ष डीन निदेशक बनाया गया था, लेकिन सीनेट ने इसे बदलकर डीन रिसर्च ही कर दिया। वरिष्ठता के मुताबिक प्रो. राजेश गिल को इस पर बैठाया गया। उन्होंने अपने कार्यकाल में शोध को नई दिशा देते हुए लंबित मामलों को पास करवाया। शोध से जुड़े शिक्षकों और विद्यार्थियों की समस्याओं को उन्होंने गंभीरता से लेकर हल किया। शोध का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया था। रूसा के तहत उसके लिए रकम भी मंजूर हुई थी, लेकिन वह पूरी नहीं मिल पाई। इसके कारण वह शोध प्रस्ताव शुरू नहीं हो सके। हालांकि इस कार्य में खुद वीसी प्रो. राज कुमार जुटे थे।
मालूम हो कि प्रो. एसके तोमर को बीच में डीन रिसर्च बनाया गया था, लेकिन पुटा व सीनेट ने इसका विरोध किया और आखिरकार सिंडिकेट ने इसे स्वीकार नहीं किया और उन्हें पद से हटा दिया। प्रो. तोमर की अपनी एक छवि है। वह खुद भी इस मामले से पीछे हट गए। उनका नाम कई विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर पद के लिए भी चल रहा है।
विज्ञापन
डीएसडब्ल्यू के लिए कई नामों पर चल रहा मंथन
प्रो. एसके तोमर डीएसडब्ल्यू हैं। यह पद भी महत्वपूर्ण होता है। प्रो. तोमर जैसे ही डीन रिसर्च का कार्यभार संभालेंगे तो डीएसडब्ल्यू का कार्य किसी अन्य शिक्षक को दिया जाएगा। बताया जाता है कि एक ही व्यक्ति दो कार्यों के लिए डीन नहीं हो सकता। सूत्रों का कहना है कि प्रो. देवेंद्र सिंह को डीएसडब्ल्यू बनाया जा सकता है। एडीएसडब्ल्यू प्रो. अशोक कुमार को भी प्रमोट किया जा सकता है, पर इसकी संभावनाएं कम हैं, क्योंकि एडीएसडब्ल्यू आरक्षित वर्ग के लिए पद है। ऐसे में दोनों छात्र कल्याण के अधिकारी आरक्षित वर्ग से नहीं रखे जाएंगे। हालांकि इसके लिए कोई नियम नहीं बनाए गए। डीएसडब्ल्यू के लिए कई अन्य चेहरे भी सामने आ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रो. हरीश कुमार, प्रो. कृष्ण मोहन, प्रो. अश्विनी कौल आदि भी प्रभावशाली शिक्षकों में शामिल हैं। जानकारों का कहना है कि प्रो. तोमर डीन रिसर्च बनेंगे तो उनके पास एचआरडीसी निदेशक का भी चार्ज है, वह भी अन्य शिक्षक को दिया जा सकता है।
विज्ञापन
डीन रिसर्च का पद कुछ वर्ष पहले ही बनाया गया था। इस पद को पिछले वर्ष डीन निदेशक बनाया गया था, लेकिन सीनेट ने इसे बदलकर डीन रिसर्च ही कर दिया। वरिष्ठता के मुताबिक प्रो. राजेश गिल को इस पर बैठाया गया। उन्होंने अपने कार्यकाल में शोध को नई दिशा देते हुए लंबित मामलों को पास करवाया। शोध से जुड़े शिक्षकों और विद्यार्थियों की समस्याओं को उन्होंने गंभीरता से लेकर हल किया। शोध का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया था। रूसा के तहत उसके लिए रकम भी मंजूर हुई थी, लेकिन वह पूरी नहीं मिल पाई। इसके कारण वह शोध प्रस्ताव शुरू नहीं हो सके। हालांकि इस कार्य में खुद वीसी प्रो. राज कुमार जुटे थे।
विज्ञापन
मालूम हो कि प्रो. एसके तोमर को बीच में डीन रिसर्च बनाया गया था, लेकिन पुटा व सीनेट ने इसका विरोध किया और आखिरकार सिंडिकेट ने इसे स्वीकार नहीं किया और उन्हें पद से हटा दिया। प्रो. तोमर की अपनी एक छवि है। वह खुद भी इस मामले से पीछे हट गए। उनका नाम कई विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर पद के लिए भी चल रहा है।
विज्ञापन
डीएसडब्ल्यू के लिए कई नामों पर चल रहा मंथन
प्रो. एसके तोमर डीएसडब्ल्यू हैं। यह पद भी महत्वपूर्ण होता है। प्रो. तोमर जैसे ही डीन रिसर्च का कार्यभार संभालेंगे तो डीएसडब्ल्यू का कार्य किसी अन्य शिक्षक को दिया जाएगा। बताया जाता है कि एक ही व्यक्ति दो कार्यों के लिए डीन नहीं हो सकता। सूत्रों का कहना है कि प्रो. देवेंद्र सिंह को डीएसडब्ल्यू बनाया जा सकता है। एडीएसडब्ल्यू प्रो. अशोक कुमार को भी प्रमोट किया जा सकता है, पर इसकी संभावनाएं कम हैं, क्योंकि एडीएसडब्ल्यू आरक्षित वर्ग के लिए पद है। ऐसे में दोनों छात्र कल्याण के अधिकारी आरक्षित वर्ग से नहीं रखे जाएंगे। हालांकि इसके लिए कोई नियम नहीं बनाए गए। डीएसडब्ल्यू के लिए कई अन्य चेहरे भी सामने आ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रो. हरीश कुमार, प्रो. कृष्ण मोहन, प्रो. अश्विनी कौल आदि भी प्रभावशाली शिक्षकों में शामिल हैं। जानकारों का कहना है कि प्रो. तोमर डीन रिसर्च बनेंगे तो उनके पास एचआरडीसी निदेशक का भी चार्ज है, वह भी अन्य शिक्षक को दिया जा सकता है।