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आय बढ़ाने के लिए रास्ते तलाशने में जुटा पीयू
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं है। इसके चलते पीयू अधिक दूर तक नहीं चल सकेगा। इससे पहले पीयू आय बढ़ाने के रास्ते तलाशने में जुट गया है। एक कमेटी इस पर समग्र रिपोर्ट देगी। यह कमेटी बताएगी कि पीयू कहां-कहां से पैसा इकट्ठा कर सकता है। इस पर तेजी से काम चल रहा है।
पीयू के शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन केंद्र सरकार देती है। हर साल लगभग 250 करोड़ रुपये केंद्र सरकार की ओर से इस कार्य के लिए आते हैं। इसके अलावा पीयू गेस्ट फैकल्टी, कांट्रेक्ट टीचर, कांट्रेक्ट कर्मचारी, डेली वेजेज आदि रखता है। साथ ही निर्माण कार्य करवाए जाते हैं। सिंडिकेट से लेकर सीनेट की बैठकों का बड़ा खर्च है। इन सभी पर करोड़ों रुपये पीयू को खर्च करने पड़ते हैं। आगे भी पीयू का खर्चा बढ़ने जा रहा है। इससे पहले पीयू रास्ता निकालने में जुटा है।
सूत्रों का कहना है कि पीयू अपनी प्रपर्टी का किराया बढ़ा सकता है। इसके अलावा फिल्म आदि की शूटिंग होगी तो उसका चार्ज भी अधिक लेगा। बाहरी लोगों से ऑडिटोरियम का किराया भी अधिक लिया जा सकता है। सैफ लैब का विस्तार करके अधिक मुनाफा लिया जा सकता है। इसके अलावा कई अन्य रास्ते भी हैं, जो कमेटी तय करेगी।
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पीयू के शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन केंद्र सरकार देती है। हर साल लगभग 250 करोड़ रुपये केंद्र सरकार की ओर से इस कार्य के लिए आते हैं। इसके अलावा पीयू गेस्ट फैकल्टी, कांट्रेक्ट टीचर, कांट्रेक्ट कर्मचारी, डेली वेजेज आदि रखता है। साथ ही निर्माण कार्य करवाए जाते हैं। सिंडिकेट से लेकर सीनेट की बैठकों का बड़ा खर्च है। इन सभी पर करोड़ों रुपये पीयू को खर्च करने पड़ते हैं। आगे भी पीयू का खर्चा बढ़ने जा रहा है। इससे पहले पीयू रास्ता निकालने में जुटा है।
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सूत्रों का कहना है कि पीयू अपनी प्रपर्टी का किराया बढ़ा सकता है। इसके अलावा फिल्म आदि की शूटिंग होगी तो उसका चार्ज भी अधिक लेगा। बाहरी लोगों से ऑडिटोरियम का किराया भी अधिक लिया जा सकता है। सैफ लैब का विस्तार करके अधिक मुनाफा लिया जा सकता है। इसके अलावा कई अन्य रास्ते भी हैं, जो कमेटी तय करेगी।
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