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पंजाब यूनिवर्सिटी को अब तक नहीं मिली केंद्र सरकार से आवंटित ग्रांट, हो सकता बजट का टोटा
Thu, 21 May 2020 01:12 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 21 May 2020 01:12 PM IST
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पंजाब विश्वविद्यालय को केंद्र सरकार से मिलने वाली ग्रांट अभी तक नहीं मिली है। दो माह से पीयू अपने खजाने से शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन दे रहा है। यदि ग्रांट मिलने में और देरी हुई तो पीयू के लिए संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि उम्मीद है कि इसी माह में पीयू को केंद्र सरकार से बजट मिल जाएगा।
केंद्र सरकार की ओर से पीयू के शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए वेतन ग्रांट आती है। लगभग 250 करोड़ रुपये हर साल केंद्र सरकार देती है। साथ ही हर साल छह फीसदी की इस ग्रांट में बढ़ोतरी भी करती है। यह रकम पीयू को तीन से चार किस्तों में मिलती है। हर साल अप्रैल में किस्त आती है, लेकिन इस बार पीयू को नहीं मिली।
सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार के पास बजट का अभाव है। ऐसे में देरी हो रही है। लॉकडाउन के कारण टैक्स आदि विभागों तक नहीं पहुंचा और वही रकम केंद्र के खजाने तक नहीं पहुंची। पैसे का अभाव केंद्र के पास हुआ तो कई ग्रांट लटक गई हैं। उम्मीद की जा रही है कि अब धीरे-धीरे व्यवस्था पटरी पर आ रही है।
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दुकानों से लेकर कई सेवाओं का संचालन किया गया है। ऐसे में सरकार के पास भी टैक्स के रूप में पैसे पहुंचेंगे और उसके बाद पीयू के पास आएंगे। जानकारों का यह भी कहना है कि यदि ग्रांट मिलने में देरी हुई तो शिक्षकों व कर्मचारियों की सैलरी का भी संकट खड़ा हो सकता है।
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केंद्र सरकार की ओर से पीयू के शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए वेतन ग्रांट आती है। लगभग 250 करोड़ रुपये हर साल केंद्र सरकार देती है। साथ ही हर साल छह फीसदी की इस ग्रांट में बढ़ोतरी भी करती है। यह रकम पीयू को तीन से चार किस्तों में मिलती है। हर साल अप्रैल में किस्त आती है, लेकिन इस बार पीयू को नहीं मिली।
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सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार के पास बजट का अभाव है। ऐसे में देरी हो रही है। लॉकडाउन के कारण टैक्स आदि विभागों तक नहीं पहुंचा और वही रकम केंद्र के खजाने तक नहीं पहुंची। पैसे का अभाव केंद्र के पास हुआ तो कई ग्रांट लटक गई हैं। उम्मीद की जा रही है कि अब धीरे-धीरे व्यवस्था पटरी पर आ रही है।
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दुकानों से लेकर कई सेवाओं का संचालन किया गया है। ऐसे में सरकार के पास भी टैक्स के रूप में पैसे पहुंचेंगे और उसके बाद पीयू के पास आएंगे। जानकारों का यह भी कहना है कि यदि ग्रांट मिलने में देरी हुई तो शिक्षकों व कर्मचारियों की सैलरी का भी संकट खड़ा हो सकता है।