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चंडीगढ़ः पंजाब यूनिवर्सिटी ने किया 38 लाख का टैक्स चोरी, इनकम टैक्स विभाग ने भेजा नोटिस

Wed, 06 Nov 2019 03:16 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 06 Nov 2019 03:16 PM IST
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punjab university did tax evasion of 38 lakhs, income tax department notice
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ पर 38 लाख रुपये का इनकम टैक्स चोरी का आरोप लगा है। इनकम पीयू करता रहा, लेकिन सर्विस टैक्स जमा नहीं किया। इसको लेकर विभाग ने नोटिस जारी किया है। साथ ही पेनाल्टी व ब्याज भी जमा करने को कहा है। दूसरी ओर पीयू ने इस नोटिस को खारिज कर दिया है।
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कहा है कि पीयू शिक्षण संस्थान है, इसलिए इस पर किसी प्रकार का कोई टैक्स नहीं बनता है। पंजाब यूनिवर्सिटी पर आरोप है कि वर्ष 2013 से लेकर 2017 तक 40 से अधिक कॉलेजों को मान्यता प्रदान की गई और मान्यता प्राप्त कॉलेजों को नए कोर्स की मान्यता दी गई। इन सभी कॉलेजों से पीयू ने सर्विस टैक्स के नाम पर 2.80 करोड़ रुपये लिए, यानी पीयू ने कमाई की।
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इस कमाई गई रकम पर नियमत: 38 लाख रुपये टैक्स जमा करना था, लेकिन वह नहीं किया गया। इसी को लेकर नोटिस जारी किया गया है। इससे पीयू में हड़कंप मचा हुआ है। बचाव का रास्ता भी अब ढूंढ लिया है और जवाब भी भेजा जा रहा है। पीयू अपने सभी अभिलेख खंगाल रहा है।
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वहीं दूसरी ओर इनकम टैक्स ने भी तमाम नियमों का हवाला देते हुए कई पेज का नोटिस भेजा है। इस संबंध में एफडीओ से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। रजिस्ट्रार प्रो. करमजीत सिंह ने कहा कि पीयू पर टैक्स तो नहीं बनता फिर भी इस मामले को देखा जा रहा है।

हर साल पीयू देता है कॉलेजों को मान्यता, लेता है शुल्क
पीयू हर साल कॉलेजों को मान्यता देता है। इसके लिए बाकायदा मौका मुआयना भी होता है। उसके बाद तय फीस पीयू लेता है। जानकारों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति कमाई करता है तो उसके लिए नियमत: टैक्स भी बनता है जो पीयू को जमा करना चाहिए था। इसके अलावा नए कोर्स संचालन के लिए भी मान्यता लगातार पीयू देता आ रहा है। सूत्रों का कहना है कि कॉलेजों को मान्यता देने के नाम पर बड़ा खेल होता है।


क्या कहते हैं नियम..
नियम कहते हैं कि जहां कॉमर्शियल एक्टिविटीज हो रही हैं। उसके जरिये कमाई की जा रही है तो उस पर टैक्स बनता है। पीयू आईएएस कोचिंग सेंटर चला रहा है। इसके लिए बाकायदा शुल्क लिया जाता है। इसका टैक्स पीयू को जमा करना चाहिए। एक्सपर्ट ने भी यह बात स्वीकार की है।
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