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विस चुनावः राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र की डॉक्टरों ने खोली पोल, जानिए कैसे?

Tue, 31 Jan 2017 10:37 AM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 31 Jan 2017 10:37 AM IST
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psychologists exposed reality of political parties menifesto for punjab assembly election 2017
नशे में जिंदगी बर्बाद करती यूवा पीढ़ी - फोटो : demo pics
पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 के लिए पार्टियों द्वारा जारी किए घोषणा पत्रों और उनमें किए वायदों की पोल मनोचिकित्सकों ने खोल दी। पंजाब चुनाव में एक राजनीतिक दल ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि वे एक महीने में नशे पर रोक लगा देंगे। दूसरे राजनीतिक दल ने चार महीने में पंजाब को ड्रग्स मुक्त करने का वादा किया है।
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सालो-साल पुरानी जटिल समस्या का समाधान क्या इतना आसान है? पंजाब और चंडीगढ़ के विशेषज्ञ कहते हैं कि दुनिया में ऐसी कोई जगह नहीं है, जहां रोक से लत से खत्म हुई हो। वो भी इतनी जल्दी। बल्कि अपराध और दूसरे नशे का जन्म हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि उन्होंने न तो कभी सुना है और न ही पढ़ा है कि इतने कम समय में नशाखोरी पर रोक लगी हो। यहां तक विदेशों में भी ऐसा नहीं हुआ है।
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यूएसए के पास काफी एडवांस टेक्नोलाजी है। खुफिया एजेंसी और मानिटरिंग सिस्टम काफी एक्टिव है। इसके बावजूद पिछले पांच सालों में हीरोइन का एडिक्शन 15 से 20 प्रतिशत बढ़ा है। यहां तक चाइना, जहां कम्युनिस्ट की सत्ता है, वहां भी समस्या बढ़ी है। नशामुक्त पंजाब को बनाने के लिए एक मैकेनिज्म की जरूरत है। इसमें सभी की भागीदारी जरूरी है।
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राजनेता, मनोचिकित्सक, एनजीओ, सोशल वर्कर, पालिसी और फैमिली। नशे को रोकने के लिए जब तक इस तरह से नहीं सोचा जाएगा, तब तक इसे रोक पाना आसान नहीं है। हालांकि पिछले कुछ महीनों में एडिक्शन के केस कम हुए हैं। हो सकता है कि बार्डर पर सख्ती बढ़ी हो। क्योंकि क्लीनिक में नए केसों की संख्या में कमी आई है।

कई मोर्चों पर करना होगा काम

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drugs
लुधियाना के मनोचिकित्सक डा. राजीव गुप्ता कहते हैं कि पंजाब में नशा जेनरेशन से जुड़ा है। पहले एल्कोहल, फिर अफीम और अब केमिकल युक्त का नशे का चलन है। इसका एक यह भी मतलब है कि पहले एल्कोहल पर लगाम लगी तो अफीम का विकल्प आ गया।

जब अफीम पर लगाम लगने की कोशिश हुई तो केमिकल युक्त नशे की डिमांड बढ़ गई। जब भी रोक लगी तो दूसरे विकल्प निकल आए। पंजाब में नशे को जड़ से खत्म करना इतना आसान नहीं है। यह समस्या करीब 30 साल पुरानी है। 30 साल से पुरानी समस्या को खत्म करने के लिए बायोलाजिकल, साइकोलाजिकल और सोशलाजिक्ल मोर्चे पर काम करना होगा।

यह एक बीमारी, डॉक्टर ही ठीक कर सकता है

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drugs
चंडीगढ़ के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. प्रमोद कुमार के मुताबिक जिस तरह से हार्ट की बीमारी को ठीक करने के लिए कार्डियोलाजिस्ट की जरूरत पड़ती है, उसी तरह से नशे की लत को दुरस्त करने के लिए मनोचिकित्सक की जरूरत होती है। डब्ल्यूएचओ ने नशे की लत को एक बीमारी का दर्जा दे रखा है।

क्वालिफाई मनोचिकित्सक ही इसे ठीक कर सकते हैं। पंजाब में ड्रग्स डी एडिक्शन सेंटर खुलते जा रहे हैं, लेकिन वहां से निकलने के बाद नशा नहीं छूटता। पंजाब को ड्रग्स मुक्त बनाना लंबा प्रोसेस है। इसमें पहले नशे को रोकना होगा। फिर नशे की जाल में फंसे लोगों को निकालना
होगा। उसके बाद उन्हें नौकरी या एजुकेशन का प्रावधान करना होगा।
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