मोहाली वीडियो कांड: घटना से मनोवैज्ञानिक और विशेषज्ञ भी चिंतित, बोले- युवाओं में जगानी होगी नैतिकता
पीजीआई मनोरोग विभाग की पूर्व प्रो. आदर्श कोहली का कहना है कि ऐसी प्रवृत्ति मानसिक विकार की ओर इशारा करती है। ये सभी में चरम रूप में हो यह जरूरी नहीं। कुछेक में ज्यादा हावी होती है। ऐसे में अगर उस चरम स्थिति पर नियंत्रण न रखा गया तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहेगी।
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चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में लड़कियों के वीडियो बनाने की घटना के बाद युवाओं की मनोदशा पर बातें होने लगीं हैं। अभिभावक भी चिंतित हैं कि बच्चे आखिर किस राह पर चल रहे हैं। विशेषज्ञ भी इस स्थिति पर चिंता जता रहे हैं। उनकी नजर में तेजी से बदलती प्राथमिकताएं युवाओं को एक अंधे कुएं में धकेल रही हैं। ऐसे में युवाओं को बचाने के लिए अभिभावकों के साथ शिक्षकों की भूमिका भी अहम हो गई है। विशेषज्ञों की सलाह है कि ऐसी स्थिति पर काबू के लिए नैतिक शिक्षा पर जोर देना होगा।
मनोवैज्ञानिक मिनी सिंह कहती हैं कि हम यह सोच भी नहीं सकते कि कुछ सेमी का मोबाइल हमें किस अंतरिक्ष में धकेल रहा है। दुनिया ऑनलाइन होती जा रही है। प्यार, इमोशन, दु:ख सब कुछ मोबाइल के इमोजी में सिमट रहा है। इस घटना को सामने रखकर युवाओं को आत्मविश्लेषण करना चाहिए। ऑनलाइन हो चुकी दुनिया में आज सही-गलत के लिए सोचने का समय ही नहीं बचा है। ऐसे में जरूरी है कि मोबाइल को खुद पर हावी न होने दें। स्क्रीन लवर बनने के बजाय प्रकृति के पास जाने का प्रयास करें। अपनों से खुलकर बात करें। अपने शौक के लिए समय निकालें।
इस मानसिक विकार की चरम स्थिति घातक
पीजीआई मनोरोग विभाग की पूर्व प्रो. आदर्श कोहली का कहना है कि ऐसी प्रवृत्ति मानसिक विकार की ओर इशारा करती है। ये सभी में चरम रूप में हो यह जरूरी नहीं। कुछेक में ज्यादा हावी होती है। ऐसे में अगर उस चरम स्थिति पर नियंत्रण न रखा गया तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहेगी।
सबसे पहले तो अभिभावकों को इसका विशेष ध्यान रखना होगा कि वे अपने बच्चों के सामने क्या पेश कर रहे हैं। टीवी पर क्या चल रहा है। अभिभावक बच्चों के सामने किन मुद्दों पर बातें कर रहे हैं। उन्हें कैसी जगहों पर साथ ले जा रहे हैं। उनके लिए खुद नैतिक मूल्यों की कितनी अहमियत है। जब तक इन बिंदुओं पर गंभीरता से विचार नहीं होता, इस तरह की घटनाओं पर काबू पाना संभव नहीं होगा।
युवाओं को सही और गलत के बारे में समझना होगा
पीयू के समाजशास्त्री प्रो. विनोद चौधरी के अनुसार कई बार मनोरंजन के लिए ऐसे वीडियो बना लेते हैं। गुड फेथ में उसे चंद दोस्तों को भेजते हैं जो ऐसी स्थिति का कारण बनता है। युवाओं को कई मामलों में इस बात की जानकारी ही नहीं होती कि वे क्या कर रहे हैं। कई बार वे फूहड़ वीडियो भी इंटरनेट पर पोस्ट करते हैं। ऐसा खुद और अपने अकाउंट की प्रसिद्धि के लिए भी किया जाता है। इस घटना में इन कारणों की पड़ताल होनी चाहिए क्योंकि अगर ऐसा है तो यह एक मानसिक विकार है। गैजेट्स को लेकर युवाओं को प्रशिक्षित करने की जरूरत है नहीं तो उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।
इन बातों पर ध्यान दें अभिभावक
- कामकाजी अभिभावक बच्चों से बात करने के लिए समय निकालें
- बच्चों को असफल होने पर हतोत्साहित न करें, आगे के लिए उनकी हिम्मत बढ़ाएं
- बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें, समय निकालकर उनके साथ खेलें, बात करें, पुरानी यादों को ताजा करें
- बात-बात पर कड़ा रुख अपनाने के बजाय बच्चे को अपने दिल की बात आपके सामने रखने के लिए प्रोत्साहित करें
- जब बच्चा अपनी बात रखे तो सहनशीलता और धीरज के साथ उसकी बात सुनें ताकि वो आपके समक्ष अपनी भावनाएं रख पाए
- बच्चों की कुछ बातें आपको कड़वी लग सकती हैं लेकिन उत्तेजित या उग्र व्यवहार न करें क्योंकि ऐसा करने पर बच्चा आपसे दूर हो जाएगा
- जब बच्चा आपसे बात कर रहा हो तब आपको उसकी बॉडी लैंग्वेज पर ही ध्यान देना चाहिए ताकि जो बातें वह आपसे बोल नहीं पा रहा आप उसे भी समझ सकें।
- बच्चों के साथ बातचीत के लहजे पर विशेष ध्यान दें