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जानिए वो सभी लक्षण, जो बताएंगे कि आपको प्रोस्टेट कैंसर है, पुरुषों में तेजी से फैल रही बीमारी
Fri, 30 Aug 2019 03:28 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क,/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क,/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 30 Aug 2019 03:28 PM IST
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Prostate cancer
- फोटो : File Photo
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पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। 40 वर्ष की आयु के बाद पुरुषों में इसकी आशंका तेजी से बढ़ती है। यदि किसी व्यक्ति के परिजन को यह बीमारी है तो उसे 40 वर्ष की आयु के बाद हर साल प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजेन (पीएसए) टेस्ट करवाना चाहिए। जिस व्यक्ति के परिवार में प्रोस्टेट कैंसर का मरीज नहीं है, लेकिन उसकी उम्र 50 साल से ऊपर है तो उसे हर साल पीएसए टेस्ट करवाना होगा।
यदि पीएसए टेस्ट की मात्रा बढ़ी हुई आती है तो उसे यूरोलाजिस्ट को दिखाना होगा। हर सात में से एक व्यक्ति प्रोस्टेट कैंसर होने की आशंका रहती है। यह बात पीजीआई के यूरोलाजी डिपार्टमेंट के प्रो. डॉ. संतोष कुमार ने कही। उन्होंने बताया कि प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों का यदि शुरुआती दौर में ही पता चल जाए तो इसकी रोकथाम में आसानी होती है।
प्रोस्टेट ग्लैंड अखरोट के साइज की एक ऐसी ग्रंथि है, जो युरेथरा (पेशाब की नली) के चारों ओर फैला होता है। इसका काम स्पर्म को न्युट्रिशन देना होता है। डॉ. संतोष के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ-साथ पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के मामले दिनों-दिन बढ़ रहे हैं।
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यदि पीएसए टेस्ट की मात्रा बढ़ी हुई आती है तो उसे यूरोलाजिस्ट को दिखाना होगा। हर सात में से एक व्यक्ति प्रोस्टेट कैंसर होने की आशंका रहती है। यह बात पीजीआई के यूरोलाजी डिपार्टमेंट के प्रो. डॉ. संतोष कुमार ने कही। उन्होंने बताया कि प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों का यदि शुरुआती दौर में ही पता चल जाए तो इसकी रोकथाम में आसानी होती है।
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प्रोस्टेट ग्लैंड अखरोट के साइज की एक ऐसी ग्रंथि है, जो युरेथरा (पेशाब की नली) के चारों ओर फैला होता है। इसका काम स्पर्म को न्युट्रिशन देना होता है। डॉ. संतोष के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ-साथ पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के मामले दिनों-दिन बढ़ रहे हैं।
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पिछले दो दशकों में पोस्टेट कैंसर भारत समेत एशियाई मूल के पुरुषों में तेजी से बढ़ा है। ऐसे में इससे बचाव और जानकारी के महत्व को लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। पोस्टेट ग्लैंड का साइज 18 ग्राम होता है, लेकिन जब यह बढ़ने लगता है तो इसका वजन 30 से 50 ग्राम और इससे भी अधिक हो जाता है। खासकर 40 साल की उम्र के बाद ग्लैंड का साइज बढ़ने लगता है।
जब ग्लैंड का साइज बड़ा होता है तो यूरीन पैसेज को रोक देता है। यूरीन करने के बाद भी यूरीन अंदर जमा रह जाता है। डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि ऊंची दर के बावजूद मरीजों को इस बीमारी की जानकारी नहीं होती, क्योंकि वे इसे बढ़ती उम्र का हिस्सा मानते हैं, जिसे मरीज पर केंद्रित जागरूकता अभियान द्वारा ठीक किया जा सकता है।
उनके मुताबिक पीएसए के टेस्ट के साथ मरीजों का अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। यदि शंका होती है तो प्रोस्टेट की बायोप्सी, एमआरआई व पेट स्कैन कराया जाता है। पहली व दूसरी स्टेज में बीमारी है तो उसे क्योर कर लिया जाता है। तीसरी व चौथी स्टेज में मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। ऐसे में जागरूकता भी मरीज के पास सबसे बड़ा हथियार है।
जब ग्लैंड का साइज बड़ा होता है तो यूरीन पैसेज को रोक देता है। यूरीन करने के बाद भी यूरीन अंदर जमा रह जाता है। डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि ऊंची दर के बावजूद मरीजों को इस बीमारी की जानकारी नहीं होती, क्योंकि वे इसे बढ़ती उम्र का हिस्सा मानते हैं, जिसे मरीज पर केंद्रित जागरूकता अभियान द्वारा ठीक किया जा सकता है।
उनके मुताबिक पीएसए के टेस्ट के साथ मरीजों का अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। यदि शंका होती है तो प्रोस्टेट की बायोप्सी, एमआरआई व पेट स्कैन कराया जाता है। पहली व दूसरी स्टेज में बीमारी है तो उसे क्योर कर लिया जाता है। तीसरी व चौथी स्टेज में मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। ऐसे में जागरूकता भी मरीज के पास सबसे बड़ा हथियार है।
प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण
- बार-बार पेशाब की इच्छा होना।
- पेशाब के बाद भी यह महसूस होना कि ब्लैडर भरा हुआ है।
- यह महसूस होना कि पेशाब के लिए इंतजार नहीं किया जा सकता।
- पेशाब का कम बहाव।
- पेशाब का टपकते हुए होना।
- पेशाब कई बार रुक रुक कर करना।
- पेशाब शुरू होने में परेशानी।
- पेशाब करने के लिए दबाव या जोर लगाना।
- साथ में डायबिटीज व हाइपरटेंशन हो सकता है
- पेशाब के बाद भी यह महसूस होना कि ब्लैडर भरा हुआ है।
- यह महसूस होना कि पेशाब के लिए इंतजार नहीं किया जा सकता।
- पेशाब का कम बहाव।
- पेशाब का टपकते हुए होना।
- पेशाब कई बार रुक रुक कर करना।
- पेशाब शुरू होने में परेशानी।
- पेशाब करने के लिए दबाव या जोर लगाना।
- साथ में डायबिटीज व हाइपरटेंशन हो सकता है