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एसजीपीसी की मांग: कंगना रणौत पर दर्ज किया जाए केस, राहुल गांधी के अभय मुद्रा वाले तर्क पर जताई आपत्ति
Sat, 06 Jul 2024 09:48 AM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 06 Jul 2024 09:48 AM IST
सार
एसजीपीसी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि कार्यकारिणी की बैठक में भाजपा सांसद कंगना की ओर से पंजाब और पंजाबियों के खिलाफ की गईं घृणित टिप्पणियों की निंदा की गई।
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जानकारी देते एसजीपीसी के अध्यक्ष हरजिंदर धामी।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की कार्यकारिणी की बैठक में हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रणौत के खिलाफ केस दर्ज करने का प्रस्ताव पास किया गया है।
एसजीपीसी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि कार्यकारिणी ने प्रस्ताव कर भाजपा सांसद कंगना के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार का कंगना के पंजाब विरोधी व नफरत भरे भाषण पर कार्रवाई न करना राज्य के प्रतिनिधित्व से मुंह मोड़ने जैसा है।
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वहीं, कार्यकारिणी ने एक और प्रस्ताव पास करते हुए सरकार से पिछले दिनों राजस्थान में न्यायिक परीक्षा में अमृतधारी सिख अभ्यर्थियों को धार्मिक ककार उतारने के लिए मजबूर करने के मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। धामी ने कहा कि केंद्र सरकार को आरोपियों के खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने का मामला दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए। अमृतपान करने वाले सिख अभ्यर्थियों को ककार उतारने लिए मजबूर करना सिखों के साथ भेदभाव है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत सिखों को कृपाण धारण करने का अधिकार है। राजस्थान में की गई मनमानी कार्रवाई संविधान का घोर उल्लंघन है। इस मामले में केंद्र सरकार को लिखने के अलावा कानूनी विशेषज्ञों की राय के अनुसार एसजीपीसी आगे की कार्रवाई शुरू करेगी।
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एसजीपीसी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि कार्यकारिणी ने प्रस्ताव कर भाजपा सांसद कंगना के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार का कंगना के पंजाब विरोधी व नफरत भरे भाषण पर कार्रवाई न करना राज्य के प्रतिनिधित्व से मुंह मोड़ने जैसा है।
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वहीं, कार्यकारिणी ने एक और प्रस्ताव पास करते हुए सरकार से पिछले दिनों राजस्थान में न्यायिक परीक्षा में अमृतधारी सिख अभ्यर्थियों को धार्मिक ककार उतारने के लिए मजबूर करने के मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। धामी ने कहा कि केंद्र सरकार को आरोपियों के खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने का मामला दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए। अमृतपान करने वाले सिख अभ्यर्थियों को ककार उतारने लिए मजबूर करना सिखों के साथ भेदभाव है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत सिखों को कृपाण धारण करने का अधिकार है। राजस्थान में की गई मनमानी कार्रवाई संविधान का घोर उल्लंघन है। इस मामले में केंद्र सरकार को लिखने के अलावा कानूनी विशेषज्ञों की राय के अनुसार एसजीपीसी आगे की कार्रवाई शुरू करेगी।