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बड़ा फैसलाः चंडीगढ़ में जल्द लागू होगा टेनेंसी एक्ट, मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय भेजी फाइल
Fri, 18 Oct 2019 04:53 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 18 Oct 2019 04:53 PM IST
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फाइल फोटो
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चंडीगढ़ में जल्द टेनेंसी एक्स लागू हो सकता है। चंडीगढ़ प्रशासन ने गृह मंत्रालय को फाइल भेज शहर में टेनेंसी एक्ट 2019 लागू करने की सिफारिश की है। तीन महीने पहले जारी ड्राफ्ट अधिसूचना पर 30 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं। इन सभी सुझावों पर गौर करने और प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की मंजूरी के बाद इसे लागू करने के लिए केंद्र को भेजा गया है।
कुछ एसोसिएशनों और शहरवासियों ने टेनेंसी एक्ट 2019 का समर्थन किया है, जबकि कुछ ने ड्राफ्ट एक्ट के कुछ प्रावधानों का विरोध किया। हालांकि, व्यापारियों ने प्रशासन से सुझाव देने के लिए कुछ और समय मांगा था, लेकिन प्रशासन ने इनकार कर दिया। नाम न छापने की शर्त पर चंडीगढ़ प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि यूटी की ओर से तैयार किए गए टेनेंसी एक्ट और केंद्र के एक्ट में ज्यादा फर्क नही है। सभी सुझावों को देखने के बाद इसे शहर में लागू करने के लिए भेज दिया गया है।
एक्ट के तहत मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद को सुलझाने के लिए रेंट कोर्ट का गठन होगा। दो या इससे अधिक रेंट कोर्ट गठित की जा सकती हैं। रेंट कोर्ट में मेंबर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की कंसलटेंसी के बाद रखे जाएंगे। स्टेट हायर जूडिशियल सर्विस के मेंबर को ही रेंट कोर्ट का प्रीसाइडिंग ऑफिसर नियुक्त किया जा सकता है। प्रशासक सिटी की जरूरत के हिसाब से रेंट ट्रिब्यूनल का गठन कर सकते हैं।
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कुछ एसोसिएशनों और शहरवासियों ने टेनेंसी एक्ट 2019 का समर्थन किया है, जबकि कुछ ने ड्राफ्ट एक्ट के कुछ प्रावधानों का विरोध किया। हालांकि, व्यापारियों ने प्रशासन से सुझाव देने के लिए कुछ और समय मांगा था, लेकिन प्रशासन ने इनकार कर दिया। नाम न छापने की शर्त पर चंडीगढ़ प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि यूटी की ओर से तैयार किए गए टेनेंसी एक्ट और केंद्र के एक्ट में ज्यादा फर्क नही है। सभी सुझावों को देखने के बाद इसे शहर में लागू करने के लिए भेज दिया गया है।
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एक्ट के तहत मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद को सुलझाने के लिए रेंट कोर्ट का गठन होगा। दो या इससे अधिक रेंट कोर्ट गठित की जा सकती हैं। रेंट कोर्ट में मेंबर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की कंसलटेंसी के बाद रखे जाएंगे। स्टेट हायर जूडिशियल सर्विस के मेंबर को ही रेंट कोर्ट का प्रीसाइडिंग ऑफिसर नियुक्त किया जा सकता है। प्रशासक सिटी की जरूरत के हिसाब से रेंट ट्रिब्यूनल का गठन कर सकते हैं।
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किरायेदारों के हितों की भी रक्षा होगी
इस एक्ट से मकान मालिकों के साथ ही किरायेदारों के हितों की भी रक्षा होगी। नए कानून से उम्मीद है कि मकान मालिक अपने खाली फ्लैट या मकान किराये पर देने से नहीं डरेंगे। मकान मालिक को किराये के परिसर में मरम्मत कार्य कराने या पुरानी चीजों को बदलने के लिए किरायेदार को 24 घंटे पूर्व नोटिस देना होगा तभी वे प्रवेश कर सकेंगे। प्रस्तावित कानून के मुताबिक किरायेदार से विवाद होने की स्थिति में मकान मालिक बिजली-पानी की आपूर्ति नहीं काट सकता है।
मकान खाली नहीं करा सकता मालिक
रेंट एग्रीमेंट में लिखी अवधि से पहले किरायेदार को तब तक नहीं निकाला जा सकता, जब तक उसने लगातार कई महीनों तक किराया न दिया हो या वह प्रॉपर्टी का दुरुपयोग कर रहा हो। अगर रेंट एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी वह मकान खाली नहीं कर रहा है तो मकान मालिक को दोगना मासिक किराया मांगने का अधिकार है। एक्ट के ड्राफ्ट के मुताबिक किराए का तीन गुना सिक्योरिटी डिपॉजिट लेना तब तक गैर-कानूनी होगा, जब तक इसका अग्रीमेंट न बनवाया गया हो। किरायेदार के घर खाली करने पर मकानमालिक को एक महीने के भीतर यह रकम लौटानी होगी।
मकान खाली नहीं करा सकता मालिक
रेंट एग्रीमेंट में लिखी अवधि से पहले किरायेदार को तब तक नहीं निकाला जा सकता, जब तक उसने लगातार कई महीनों तक किराया न दिया हो या वह प्रॉपर्टी का दुरुपयोग कर रहा हो। अगर रेंट एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी वह मकान खाली नहीं कर रहा है तो मकान मालिक को दोगना मासिक किराया मांगने का अधिकार है। एक्ट के ड्राफ्ट के मुताबिक किराए का तीन गुना सिक्योरिटी डिपॉजिट लेना तब तक गैर-कानूनी होगा, जब तक इसका अग्रीमेंट न बनवाया गया हो। किरायेदार के घर खाली करने पर मकानमालिक को एक महीने के भीतर यह रकम लौटानी होगी।
...तभी कमान मालिक बढ़ा सकता है किराया
ड्राफ्ट में कहा गया है कि बिल्डिंग के ढांचे की देखभाल के लिए किरायेदार और मकान मालिक दोनों ही जिम्मेदार होंगे। अगर मकान मालिक ढांचे में कुछ सुधार कराता है तो उसे रेनोवेशन का काम खत्म होने के एक महीने बाद किराया बढ़ाने की इजाजत होगी। हालांकि, इसके लिए किरायेदार की सलाह भी ली जाएगी।
दूसरी ओर, रेंट एग्रीमेंट लागू होने के बाद अगर बिल्डिंग का ढांचा खराब हो रहा है और मकान मालिक रेनोवेट कराने की स्थिति में नहीं है तो किरायेदार किराया कम करने को कह सकता है। किसी भी झगड़े की स्थिति में किरायेदार रेंट अथॉरिटी से संपर्क कर सकता है।
क्या है यूटी टेनेंसी एक्ट 2019?
चंडीगढ़ प्रशासन ने मालिकों और किरायेदारों के हितों में संतुलन और किराये को रेगुलेट करने तथा किरायेदार व मालिक के बीच विवाद को फास्ट ट्रैक आधार पर निपटाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट की तर्ज पर चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी टेनेंसी एक्ट 2019 का प्रारूप तैयार किया है।
दूसरी ओर, रेंट एग्रीमेंट लागू होने के बाद अगर बिल्डिंग का ढांचा खराब हो रहा है और मकान मालिक रेनोवेट कराने की स्थिति में नहीं है तो किरायेदार किराया कम करने को कह सकता है। किसी भी झगड़े की स्थिति में किरायेदार रेंट अथॉरिटी से संपर्क कर सकता है।
क्या है यूटी टेनेंसी एक्ट 2019?
चंडीगढ़ प्रशासन ने मालिकों और किरायेदारों के हितों में संतुलन और किराये को रेगुलेट करने तथा किरायेदार व मालिक के बीच विवाद को फास्ट ट्रैक आधार पर निपटाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट की तर्ज पर चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी टेनेंसी एक्ट 2019 का प्रारूप तैयार किया है।