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प्रॉपर्टी ट्रांसफर की तत्काल स्कीम का विस्तार, नई योजनाएं जुड़ीं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 13 Apr 2016 08:56 PM IST
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प्रॉपर्टी, फ्लैट, हाउस
- फोटो : डेमो फोटो
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सीएचबी ने मकानों और प्रापर्टी को ट्रांसफर करने की तत्काल स्कीम का विस्तार कर दिया है। इसमें चार नई योजनाएं जोड़ी गई हैं। दरअसल, लोगों को यह स्कीम बेहद पसंद आ रही है। इससे हाउसिंग बोर्ड की वित्तीय हालत भी सुधर रही है। अब तक इस योजना के तहत 424 संपत्तियों का ट्रांसफर करवाया गया है जिससे 1 करोड़ 41 लाख रुपये की आमदनी हाउसिंग बोर्ड को हुई है।
इसे देखते हुए बोर्ड ने तत्काल स्कीम का विस्तार किया है। अब तत्काल स्कीम में प्रापर्टी का कब्जा सौंपने, हाउसिंग बोर्ड की फ्री होल्ड प्रापर्टी की कनवेयंस डीड का हस्तांतरण, संपत्तियों के डुप्लिकेट दस्तावेज बनवाने को भी शामिल किया गया है। शहरवासी तत्काल स्कीम के तहत पहले से तय फीस अदा कर यह काम जल्द करवा सकते हैं।
तत्काल के तहत कर्मिश्यल प्रापर्टी ट्रांसफर करवाने की यह है फीस
सीएचबी ने स्माल बूथ ट्रांसफर करने की फीस एक लाख रुपये तय की है। जबकि बेशाप और शाप कम फ्लैट्स (शोरूम) की ट्रांसफर फीस रेट दो लाख रुपये तय की गई है। तत्काल सुविधा में आवेदन करने के बाद 5 दिन (वर्किंग डे) में प्रापर्टी ट्रांसफर कर दी जाएगी।
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सीएचबी के तत्काल में मकान ट्रांसफर करने के लिए यह है फीस
कैटेगरी---------------तत्काल फीस(रुपये में)
ईडब्ल्यूएस--------------20 हजार
एलआईजी--------------30 हजार
एमआईजी---------------40 हजार
एमचआईजी-------------50 हजार
तत्काल सुविधा पर ही विवाद हुआ शुरू हुआ था सीईओ और चेयरमैन के बीच
मकानों को तत्काल ट्रांसफर सुविधा शुरू करने के बाद ही सीएचबी के चेयरमैन और सीईओ के बीच विवाद शुरू हुआ था। क्योंकि सीईओ के पास फाइल गए बिना ही लोगों के मकान ट्रांसफर हो रहे थे। इस पर सीईओ ने चेयरमैन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए सलाहकार विजय देव को पिछले साल शिकायत भी की थी। यही नहीं, पिछले साल अक्तूबर माह में हुई बोर्ड की बैठक का सीईओ दीपक कुमार ने बहिष्कार किया था। बोर्ड के चेयरमैन मनिंदर सिंह ने यह सुनिश्चित किया था कि तत्काल में मकान ट्रांसफर कराने की फाइल को न तो सीईओ खारिज कर सकता है और न ही उसमें कोई देरी कर सकता है। ऐसा करने पर बोर्ड के रेवन्यू की हानि होती है। दोनों अधिकारियों के बीच विवाद अभी तक निबटा नहीं है। सीईओ के घर पर रेनोवेशन और बिजली का बिल सरकारी खजाने से भुगतान किए जाने का विवाद अभी थमा नहीं है।
तत्काल स्कीम के तहत 424 प्रापर्टी ट्रांसफर हो चुकी है। इसके तहत बोर्ड ने एक करोड़ 41 लाख रुपये की आय हुई है। पिछले साल सितंबर माह में तत्काल स्कीम को लांच किया गया था।
- मनिंदर सिंह बैंस, चेयरमैन, हाउसिंग बोर्ड
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इसे देखते हुए बोर्ड ने तत्काल स्कीम का विस्तार किया है। अब तत्काल स्कीम में प्रापर्टी का कब्जा सौंपने, हाउसिंग बोर्ड की फ्री होल्ड प्रापर्टी की कनवेयंस डीड का हस्तांतरण, संपत्तियों के डुप्लिकेट दस्तावेज बनवाने को भी शामिल किया गया है। शहरवासी तत्काल स्कीम के तहत पहले से तय फीस अदा कर यह काम जल्द करवा सकते हैं।
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तत्काल के तहत कर्मिश्यल प्रापर्टी ट्रांसफर करवाने की यह है फीस
सीएचबी ने स्माल बूथ ट्रांसफर करने की फीस एक लाख रुपये तय की है। जबकि बेशाप और शाप कम फ्लैट्स (शोरूम) की ट्रांसफर फीस रेट दो लाख रुपये तय की गई है। तत्काल सुविधा में आवेदन करने के बाद 5 दिन (वर्किंग डे) में प्रापर्टी ट्रांसफर कर दी जाएगी।
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सीएचबी के तत्काल में मकान ट्रांसफर करने के लिए यह है फीस
कैटेगरी---------------तत्काल फीस(रुपये में)
ईडब्ल्यूएस--------------20 हजार
एलआईजी--------------30 हजार
एमआईजी---------------40 हजार
एमचआईजी-------------50 हजार
तत्काल सुविधा पर ही विवाद हुआ शुरू हुआ था सीईओ और चेयरमैन के बीच
मकानों को तत्काल ट्रांसफर सुविधा शुरू करने के बाद ही सीएचबी के चेयरमैन और सीईओ के बीच विवाद शुरू हुआ था। क्योंकि सीईओ के पास फाइल गए बिना ही लोगों के मकान ट्रांसफर हो रहे थे। इस पर सीईओ ने चेयरमैन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए सलाहकार विजय देव को पिछले साल शिकायत भी की थी। यही नहीं, पिछले साल अक्तूबर माह में हुई बोर्ड की बैठक का सीईओ दीपक कुमार ने बहिष्कार किया था। बोर्ड के चेयरमैन मनिंदर सिंह ने यह सुनिश्चित किया था कि तत्काल में मकान ट्रांसफर कराने की फाइल को न तो सीईओ खारिज कर सकता है और न ही उसमें कोई देरी कर सकता है। ऐसा करने पर बोर्ड के रेवन्यू की हानि होती है। दोनों अधिकारियों के बीच विवाद अभी तक निबटा नहीं है। सीईओ के घर पर रेनोवेशन और बिजली का बिल सरकारी खजाने से भुगतान किए जाने का विवाद अभी थमा नहीं है।
तत्काल स्कीम के तहत 424 प्रापर्टी ट्रांसफर हो चुकी है। इसके तहत बोर्ड ने एक करोड़ 41 लाख रुपये की आय हुई है। पिछले साल सितंबर माह में तत्काल स्कीम को लांच किया गया था।
- मनिंदर सिंह बैंस, चेयरमैन, हाउसिंग बोर्ड