एक करोड़ महिला वोटरों को रिझाने की सियासत: पंजाब विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों में शुरू हुआ शह-मात का खेल
वर्तमान में पंजाब की आबादी लगभग 3 करोड़ है। 2017 के लोकसभा चुनाव के दौरान पंजाब में कुल 2.04 करोड़ वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था जिनमें महिला वोटरों की संख्या लगभग 1 करोड़ थी।
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जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के बीच महिलाओं को लेकर शह-मात का खेल शुरू हो गया है। पंजाब में लगभग एक करोड़ महिला वोटरों को रिझाने के लिए सियासतदार अलग-अलग पासे फेंक रहे हैं। आप ने चुनाव जीतने के लिए महिलाओं को 1000 रुपये महीना तो शिअद ने 2000 रुपये महीना देने का दांव चला है।
पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में एक बार फिर महिला मतदाता सियासी दलों की नैया पार करेंगी। इसकी बड़ी वजह यह है कि वर्तमान में पंजाब की आबादी लगभग 3 करोड़ है। 2017 के लोकसभा चुनाव के दौरान पंजाब में कुल 2.04 करोड़ वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था जिनमें महिला वोटरों की संख्या लगभग 1 करोड़ थी। लोकसभा चुनाव में महिला वोटरों की इस संख्या के बाद सभी सियासी दल सूबे की इस आधी आबादी को रिझाने में जुट गए हैं।
सियासतदान भी जान गए हैं कि पंजाब विधानसभा चुनाव की नैया महिलाओं के बिना पार नहीं हो सकती है। यही वजह है कि इन दिनों चुनावी माहौल में सभी सियासी दल महिलाओं को साधने के लिए एक दूसरे के साथ शह और मात का खेल खेलने में जुटे हुए हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 18 से अधिक उम्र की महिलाओं को 1000 रुपये महीना देने की घोषणा कर डाली। आप के इस सियासी दांव पर शिरोमणि अकाली दल (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने 2000 रुपया महीना देने का चुनावी वादा कर दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि कर्जदार पंजाब की महिलाओं को सियासी दल हजारों करोड़ देने के वादे को कैसे पूरा कर पाते हैं।
कांग्रेस देगी 50 प्रतिशत सीटें
अन्य राजनीतिक दलों के साथ ही कांग्रेस भी महिलाओं को रिझाने में पीछे नहीं है। कांग्रेस नेता वादा कर रहे हैं कि 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में 50 प्रतिशत महिलाओं को सीटें दी जाएंगी। यानि 117 विधानसभा सीटों में से 58-59 सीटों पर कांग्रेस पार्टी महिलाओं को उम्मीदवार बनाएगी।
महिलाओं का बढ़ेगा वोट प्रतिशत
सियासी दलों के इस दांव से महिलाओं का चुनाव में वोट प्रतिशत भी बढ़ेगा। आंकड़ों को यदि हम देखे तो सूबे में 20 से 25 प्रतिशत ऐसी महिलाएं हैं जो वोट डालने नहीं जातीं, लेकिन महिलाओं के लिए की गई घोषणाओं के बाद यह तय माना जा रहा है कि 2022 में महिला मतदाताओं के वोट प्रतिशत में और भी बढ़ोतरी होगी।