{"_id":"6751f833a2e2b2a1b2073964","slug":"process-of-privatization-of-electricity-department-accelerated-formation-of-chandigarh-power-distribution-limited-draft-of-transfer-scheme-ready-chandigarh-news-c-16-pkl1043-578621-2024-12-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: बिजली विभाग के निजीकरण की प्रक्रिया तेज, चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड का गठन, ट्रांसफर स्कीम का ड्राफ्ट तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: बिजली विभाग के निजीकरण की प्रक्रिया तेज, चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड का गठन, ट्रांसफर स्कीम का ड्राफ्ट तैयार
विज्ञापन
चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के बिजली विभाग को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया अब तेज हो गई है। प्रशासन ने चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड का गठन कर दिया है, जहां सभी कर्मचारियों को ट्रांसफर किया जाएगा। इसके लिए चंडीगढ़ विद्युत सुधार हस्तांतरण योजना तैयार की जा रही है। पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने वीरवार को प्रशासन के सभी अधिकारियों के साथ एक बैठक की। उन्होंने बिजली कर्मचारियों के लिए सेवा लाभों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में केस हारने के बाद यूटी पावरमैन यूनियन ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी, जिसे शीर्ष अदालत ने दो दिसंबर को खारिज कर दिया है। इसके बाद प्रशासन ने फिर से प्रक्रिया को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। एमिनेंट पावर कंपनी लिमिटेड ने विभाग को खरीदने के लिए सबसे बड़ी बोली लगाई है। प्रशासन ने कंपनी को लेटर ऑफ इंटेंड (एलओआई) भी जारी कर दिया है। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी के बाद चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (सीपीडीएल) का भी गठन किया है। सीपीडीएल में स्थानांतरित होने वाले कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के तहत ‘चंडीगढ़ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज मास्टर ट्रस्ट’ बनाया गया है। ट्रस्ट का नेतृत्व सचिव इंजीनियरिंग करेंगे और इसका प्रबंधन ट्रस्टी बोर्ड द्वारा किया जाएगा, जिसमें चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी शामिल होंगे और विद्युत सर्किल के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर सदस्य सचिव होंगे। बोर्ड ही ट्रस्ट के दिन-प्रतिदिन के कामकाज का प्रबंधन करेगा। बता दें कि शहर में 2.47 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 2.14 लाख लोग घरेलू बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि अन्य कॉमर्शियल, स्मॉल पावर, पब्लिक लाइटिंग और कृषि के कनेक्शन हैं।
ट्रांसफर स्कीम तैयार कर रहा प्रशासन, कर्मियों के हितों की रक्षा के होंगे प्रावधान
यूटी प्रशासन चंडीगढ़ पावर रिफॉर्म ट्रांसफर स्कीम तैयार कर रहा है। इसमें कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए कई प्रावधान शामिल किए गए हैं। ड्राफ्ट के अनुसार जो भी कर्मी ट्रांसफर किए जाएंगे, उन्हें को लाभ मिलेंगे वो पहले से कम नहीं होंगी। ऐसे सभी कर्मियों की सेवाओं की निरंतरता सभी मामलों में सुनिश्चित की जाएगी। कंपनी कर्मचारियों को उनकी पूर्व सहमति के बिना चंडीगढ़ से बाहर तैनात नहीं कर सकेगी। ट्रस्ट से टर्मिनल लाभों को मंजूरी देने और वितरित करने की प्रक्रिया ट्रस्टी बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर प्रशासन की ओर से निर्धारित की जाएगी। ट्रस्ट तब तक प्रबंधन और कार्य करेगा जब तक कि स्थानांतरित कर्मचारियों की टर्मिनल देनदारियों का पूरा भुगतान नहीं हो जाता। चंडीगढ़ प्रशासन कंपनी में कर्मियों के स्थानांतरण पर सुझाव प्राप्त करने और कंपनी में कर्मियों के स्थानांतरण के मामलों में उनकी शिकायतों के संबंध में प्रशासन को सिफारिश करने के लिए स्थानांतरण तिथि से एक समिति का गठन करेगा।
विज्ञापन
यूनियन की शिकायतों का किया जाना चाहिए समाधानः प्रशासक
प्रशासक कटारिया ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों के सभी मौजूदा सेवा लाभों की रक्षा की जानी चाहिए और यूटी पावरमैन यूनियन की शिकायतों का व्यापक रूप से समाधान किया जाना चाहिए। बता दें कि 175 करोड़ के चंडीगढ़ के बिजली विभाग को खरीदने के लिए एमिनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड ने 871 करोड़ की बोली लगाई थी, जिसे मई 2022 में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा 870 करोड़ में आखिरी मंजूरी दे दी गई। प्रशासन ने पांच साल पहले निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। विभाग को खरीदने की दौड़ में कुल सात कंपनियां थीं। इनमें एमिनेंट के अलावा अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, टाटा पावर, टोरेंट पावर, स्टरलाइट पावर, रिन्यू विंड एनर्जी और एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड शामिल थीं।
विज्ञापन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में केस हारने के बाद यूटी पावरमैन यूनियन ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी, जिसे शीर्ष अदालत ने दो दिसंबर को खारिज कर दिया है। इसके बाद प्रशासन ने फिर से प्रक्रिया को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। एमिनेंट पावर कंपनी लिमिटेड ने विभाग को खरीदने के लिए सबसे बड़ी बोली लगाई है। प्रशासन ने कंपनी को लेटर ऑफ इंटेंड (एलओआई) भी जारी कर दिया है। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी के बाद चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (सीपीडीएल) का भी गठन किया है। सीपीडीएल में स्थानांतरित होने वाले कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के तहत ‘चंडीगढ़ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज मास्टर ट्रस्ट’ बनाया गया है। ट्रस्ट का नेतृत्व सचिव इंजीनियरिंग करेंगे और इसका प्रबंधन ट्रस्टी बोर्ड द्वारा किया जाएगा, जिसमें चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी शामिल होंगे और विद्युत सर्किल के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर सदस्य सचिव होंगे। बोर्ड ही ट्रस्ट के दिन-प्रतिदिन के कामकाज का प्रबंधन करेगा। बता दें कि शहर में 2.47 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 2.14 लाख लोग घरेलू बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि अन्य कॉमर्शियल, स्मॉल पावर, पब्लिक लाइटिंग और कृषि के कनेक्शन हैं।
विज्ञापन
ट्रांसफर स्कीम तैयार कर रहा प्रशासन, कर्मियों के हितों की रक्षा के होंगे प्रावधान
यूटी प्रशासन चंडीगढ़ पावर रिफॉर्म ट्रांसफर स्कीम तैयार कर रहा है। इसमें कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए कई प्रावधान शामिल किए गए हैं। ड्राफ्ट के अनुसार जो भी कर्मी ट्रांसफर किए जाएंगे, उन्हें को लाभ मिलेंगे वो पहले से कम नहीं होंगी। ऐसे सभी कर्मियों की सेवाओं की निरंतरता सभी मामलों में सुनिश्चित की जाएगी। कंपनी कर्मचारियों को उनकी पूर्व सहमति के बिना चंडीगढ़ से बाहर तैनात नहीं कर सकेगी। ट्रस्ट से टर्मिनल लाभों को मंजूरी देने और वितरित करने की प्रक्रिया ट्रस्टी बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर प्रशासन की ओर से निर्धारित की जाएगी। ट्रस्ट तब तक प्रबंधन और कार्य करेगा जब तक कि स्थानांतरित कर्मचारियों की टर्मिनल देनदारियों का पूरा भुगतान नहीं हो जाता। चंडीगढ़ प्रशासन कंपनी में कर्मियों के स्थानांतरण पर सुझाव प्राप्त करने और कंपनी में कर्मियों के स्थानांतरण के मामलों में उनकी शिकायतों के संबंध में प्रशासन को सिफारिश करने के लिए स्थानांतरण तिथि से एक समिति का गठन करेगा।
विज्ञापन
यूनियन की शिकायतों का किया जाना चाहिए समाधानः प्रशासक
प्रशासक कटारिया ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों के सभी मौजूदा सेवा लाभों की रक्षा की जानी चाहिए और यूटी पावरमैन यूनियन की शिकायतों का व्यापक रूप से समाधान किया जाना चाहिए। बता दें कि 175 करोड़ के चंडीगढ़ के बिजली विभाग को खरीदने के लिए एमिनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड ने 871 करोड़ की बोली लगाई थी, जिसे मई 2022 में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा 870 करोड़ में आखिरी मंजूरी दे दी गई। प्रशासन ने पांच साल पहले निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। विभाग को खरीदने की दौड़ में कुल सात कंपनियां थीं। इनमें एमिनेंट के अलावा अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, टाटा पावर, टोरेंट पावर, स्टरलाइट पावर, रिन्यू विंड एनर्जी और एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड शामिल थीं।