निजी स्कूलों की चालाकी : फीस वृद्धि पर उठे सवाल तो सभी शुल्क ट्यूशन फीस में जोड़े, उसे भी आठ फीसदी बढ़ाया
- इंडिपेंडेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष बोले- स्कूलों ने जरूरतों के अनुसार ही फीस बढ़ाई
- अगर अभिभावक फीस देने में सक्षम नहीं तो अपने बच्चे का सस्ते स्कूल में करवा लें दाखिला
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चंडीगढ़ में निजी स्कूलों ने फीस में वृद्धि की थी। इस पर अभिभावकों ने सवाल उठाया तो एक चालाकी की गई। निजी स्कूलों ने सालभर अलग-अलग मदों में लिया जाने वाला शुल्क ट्यूशन फीस में शामिल कर दिया और साथ ही फीस में आठ फीसदी की वृद्धि भी कर दी। इस फैसले से अभिभावक सकते में हैं। अभिभावकों ने कहा था कि बच्चे न कंप्यूटर का प्रयोग कर रहे हैं और न पुस्तकालय का, बावजूद इसके फीस बढ़ाई गई।
इंडिपेंडेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस मामिक का कहना है कि स्कूलों ने अपनी जरूरतों के अनुसार ही फीस बढ़ाई है। अगर अभिभावक किसी स्कूल की फीस देने में सक्षम नहीं हैं तो वे अपने बच्चे को वहां से हटवाकर सस्ते स्कूल में दाखिला करवा सकते हैं। सरकार ने भी महंगाई बढ़ाई है, पानी के दाम कई गुना बढ़ गए हैं।
अभिभावकों को सरकार से प्रश्न करना चाहिए। कई अभिभावक निजी स्कूलों से बच्चों का नाम कटवाकर सरकारी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं। अभिभावकों ने कहा कि ऐसे समय में स्कूल से मदद की दरकार थी। उम्मीद थी कि स्कूल दर्द कम करने की कोशिश करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उसी दर्द को बढ़ा दिया गया है।
इन सभी शुल्क को ट्यूशन फीस में मिलाया
- डेवलपमेंट चार्ज
- पुस्तकालय फीस
- कंप्यूटर फीस
- मेडिकल फीस
- मल्टीमीडिया फीस
- इंटरनेट
- स्पोर्ट्स फीस
कोरोना महामारी के कारण पिछले वर्ष से बहुत से अभिभावकों का कामकाज प्रभावित हुआ है। किसी की नौकरी गई तो किसी को कम वेतन मिल रहा है। पिछले वर्ष प्रशासन ने महामारी के हालात देखते हुए सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के निर्देश दिए थे। अब भी अभिभावकों की आर्थिक हालात में कोई सुधार नहीं आया है। शिक्षा विभाग को स्कूलों की तरफ से फीस वृद्धि को हटाकर आधी फीस लेनी चाहिए, क्योंकि ऑनलाइन कक्षा में स्कूलों का खर्च भी कम हुआ है। - नितिन गोयल, अध्यक्ष, चंडीगढ़ अभिभावक संघ
फीस नहीं भर पाने के कारण रोक रहे परीक्षा परिणाम
बहुत से अभिभावकों की शिकायत आ रही है कि निजी स्कूल फीस नहीं भर पाने के कारण बच्चों के परीक्षा परिणाम रोक रहे हैं। अभिभावक स्कूल से गुजारिश भी कर रहे हैं कि वह थोड़ा-थोड़ा कर किश्तों में पूरी फीस जमा करवा देंगे, अभी उन्हें आर्थिक तंगी है। लेकिन स्कूल और शिक्षा विभाग दोनों ही अभिभावकों की शिकायतों को सुनने को तैयार नहीं हैं। कई अभिभावक बच्चों की टीसी चाहते हैं, लेकिन बकाया फीस के कारण बच्चों की टीसी भी रोकी जा रही है। - मनीष सोनी, सचिव, पेरेंट्स यूनिटी फॉर जस्टिस
डेढ़ साल से वेतन नहीं बढ़ा, खर्चे पड़ रहे भारी
ऑनलाइन कक्षा ने बढ़ाया खर्च
मेरा बच्चा सेक्टर-40 के एक निजी स्कूल में पढ़ाई कर रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों को लैपटॉप व मोबाइल लेकर देने पड़े। इससे पढ़ाई का खर्च बढ़ गया। हर महीने मोबाइल रिचार्ज का खर्च अलग से पड़ रहा है। अब स्कूल ने इस सत्र की आठ प्रतिशत से ज्यादा फीस बढ़ा दी है। इससे आर्थिक बोझ बढ़ गया। जिस व्यवसाय के जरिए बच्चों को पढ़ा रही थी, वह भी लॉकडाउन के बाद से कम हो गया। स्कूल को जब अपनी पीड़ा बताते हैं तो वह बैलेंस शीट मांगते हैं। - कविता बंसल, अभिभावक
स्कूल ट्यूशन फीस के साथ वसूल रहे अतिरिक्त चार्ज
स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा पुस्तकालय, डायरी, डेवलपमेंट फीस, कंप्यूटर फीस, दाखिला फीस इत्यादि भी वसूलने में लगे हैं। इसके साथ ही फीस में बढ़ोतरी भी कर दी है। कोरोना महामारी के कारण बच्चों ने अभी स्कूल जाना शुरू नहीं किया तो बिना सुविधाओं के फीस कैसे दें। मेरा बच्चा सेक्टर-8 के एक निजी स्कूल में पढ़ रहा है, स्कूल ने 10 अप्रैल तक का समय दिया है। समय पर फीस नहीं भरने का जुर्माना लगाया जाएगा। - प्रवीन, अभिभावक
अगर स्कूलों की तरफ से अभिभावकों से फीस लेने के मसले में कोई गैर कानूनी तरीका अपनाया जा रहा है तो हम इसकी जांच कर बनती कार्रवाई करेंगे। - सरप्रीत सिंह गिल, सचिव, शिक्षा विभाग