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हरियाणा: निजी स्कूल संचालकों की स्कूल खोलने की मांग, नहीं मानी तो 7 फरवरी से कक्षाएं शुरू करने का एलान 

Thu, 03 Feb 2022 09:48 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Thu, 03 Feb 2022 09:48 PM IST
सार

इस एलान के बाद स्कूल शिक्षा विभाग के साथ टकराव बढ़ने के आसार बन गए हैं। प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि सरकार उनकी मांगें माने।

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Private school operators demanded the Haryana government to open the school
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

हरियाणा प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन ने 7 फरवरी से कक्षाएं लगाने का ऐलान कर दिया है। एसोसिएशन ने सरकार से मांगें मानने का आग्रह किया है। साथ ही चेताया है कि 6 फरवरी तक स्कूल खोलने का पत्र जारी नहीं हुआ तो 7 फरवरी से स्कूल संचालक खुद ही बच्चों की कक्षाएं लगाना शुरू कर देंगे।

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एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रामअवतार शर्मा ने कहा कि एक महीने में सभी 90 विधायकों और 10 सांसदों के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर स्कूल खोलने की मांग की जा चुकी है। ज्ञापन में सभी वैज्ञानिक तथ्य रखे गए हैं। स्कूल बंद रखने से बच्चों को होने वाले नुकसान के बारे में विश्व बैंक, यूनिसेफ जैसी संस्थाओं की रिपोर्ट भी सरकार तक पहुंचाई है। प्रदेश में अभिभावक जगह-जगह प्रदर्शन कर स्कूल खोलने की मांग कर रहे हैं। बहुत सारी पंचायतों ने अपने स्तर पर स्कूल खोल भी दिए हैं। उनका फिर से अनुरोध है कि सभी कक्षाएं अगले सप्ताह से शुरू की जाएं।
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स्कूल बसों का पैसेंजर टैक्स भी खत्म नहीं किया गया। बिजली बिल भी माफ नहीं हुए। निजी स्कूल कठिन दौर से गुजर रहे हैं। विभाग ने फीस वृद्घि के नए नियमों में अनेक खर्चों को नजरअंदाज किया है। इससे स्कूलों की आर्थिक स्थिति और खराब होगी।

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दूसरी सूची में शामिल गरीब बच्चों को नहीं देंगे दाखिला

रामअवतार शर्मा ने कहा कि नियम-134ए की बकाया राशि का भुगतान करने के लिए जल्द पोर्टल खोला जाएगा और 9वीं से 12वीं कक्षा में पढ़ रहे गरीब बच्चों की फीस भी निर्धारित कर देंगे। लेकिन, आज तक न तो सरकार ने पोर्टल बनाया और न ही नौवीं से बारहवीं कक्षा की फीस निर्धारित की।



अभी विभाग ने गरीब बच्चों के दाखिलों के लिए दूसरी सूची जारी की है, निजी स्कूल उन बच्चों का दाखिला नहीं करेंगे। अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों को नियमों में ढील देकर स्थायी मान्यता दी जाए। यह भाजपा के घोषणा पत्र में भी शामिल है। सरकार ने कोरोना के दौरान भी निजी स्कूलों को कोई राहत नहीं दी।

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