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प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने को दिया सुझाव, आप भी जानिए
अमित शर्मा/अमर उजाला, मोहाली
Updated Mon, 25 Apr 2016 03:19 PM IST
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- फोटो : BBC
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प्राइवेट स्कूलों को मनमानी फीस वसूलने से रोकने के लिए पंजाब प्राइवेट स्कूल आर्गेनाइनजेशन ने एक बड़ा सुझाव दिया। आर्गेनाइनजेशन ने आज इस संबंध में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जस्टिस अमर दत्त की अगुवाई मे गठित फीस कमेटी से मुलाकात की है।
साथ ही मांग की है कि महाराष्ट्र सरकार की तर्ज पर पंजाब के प्राइवेट स्कूलों की फीस निर्धारित करने के लिए राज्य के अनएडिड प्राइवेट स्कूल एक्ट-2016 बनाया जाए। ताकि प्राइवेट स्कूल फीस के माध्यम से विद्यार्थियों की लूट न कर सकें। इस संबंधी संस्था के महासचिव तेजपाल सिंह ने बताया कि राज्य में केवल 10 से 15 फीसदी सीबीएसई से संबंधित हैं, जो कि पेरेंट्स को आर्थिक व मानसिक रूप से लूटने में लगे हुए है।
पंजाब में इन स्कूल के खिलाफ रोजाना प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था शिक्षा के व्यापारीकरण का डटकर विरोध करती है। उन्होंने बताया कि उक्त स्कूल विद्यार्थियों को विशेष दुकानों से किताबें- कापियां व अन्य सामान लेने के लिए मजबूर करके शिक्षा प्रणाली को बदनाम कर रहे है।
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यह राज्य बने अन्यों के लिए मिसाल
संस्था के प्रधान दीदार सिंह ढींढसा ने बताया कि भारत में महाराष्ट्र, कनार्टक, तमिलनाडू, राजस्थान व झारखंड जैसे राज्यों में परीक्षा कंट्रोल एक्ट लागू हैं। जिसके लिए आरगेनाइजेशन मांग कर रही है। पंजाब सरकार अनएडेड प्राइवेट स्कूल कंट्रोल एक्ट 2016 बनाकर शिक्षा का व्यापारी करण रोक सकती है। उन्होंने कमेटी से मांग की है कि इस संबंधी सरकार को लिखा जाए।
200 से 500 तक वसूली जा रही है फीस
आर्गेनाइनजेशन के महासचिव तेजपाल सिंह ने साफ किया है कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबंधित एफिलिएटेड, एसोसिएट व एडेड स्कूलों की फीस दो सौ से 500 रुपये के बीच में है। जबकि कुछ ऐसे भी स्कूल है। जिनकी मंथली फीस 200 से एक हजार रुपये तक है। इन स्कूलों की पुस्तकें भी बोर्ड की तरफ से सप्लाई की जाती है। इस मौके कमेटी ने कहा कि फीस कंट्रोल एक्ट बनाना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। वह केवल स्कूल की तरफ से ली जाने वाली फीस व उनकी तरफ से दी जाने वाली सुविधाओं को जांच कर रहे हैं।
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साथ ही मांग की है कि महाराष्ट्र सरकार की तर्ज पर पंजाब के प्राइवेट स्कूलों की फीस निर्धारित करने के लिए राज्य के अनएडिड प्राइवेट स्कूल एक्ट-2016 बनाया जाए। ताकि प्राइवेट स्कूल फीस के माध्यम से विद्यार्थियों की लूट न कर सकें। इस संबंधी संस्था के महासचिव तेजपाल सिंह ने बताया कि राज्य में केवल 10 से 15 फीसदी सीबीएसई से संबंधित हैं, जो कि पेरेंट्स को आर्थिक व मानसिक रूप से लूटने में लगे हुए है।
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पंजाब में इन स्कूल के खिलाफ रोजाना प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था शिक्षा के व्यापारीकरण का डटकर विरोध करती है। उन्होंने बताया कि उक्त स्कूल विद्यार्थियों को विशेष दुकानों से किताबें- कापियां व अन्य सामान लेने के लिए मजबूर करके शिक्षा प्रणाली को बदनाम कर रहे है।
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यह राज्य बने अन्यों के लिए मिसाल
संस्था के प्रधान दीदार सिंह ढींढसा ने बताया कि भारत में महाराष्ट्र, कनार्टक, तमिलनाडू, राजस्थान व झारखंड जैसे राज्यों में परीक्षा कंट्रोल एक्ट लागू हैं। जिसके लिए आरगेनाइजेशन मांग कर रही है। पंजाब सरकार अनएडेड प्राइवेट स्कूल कंट्रोल एक्ट 2016 बनाकर शिक्षा का व्यापारी करण रोक सकती है। उन्होंने कमेटी से मांग की है कि इस संबंधी सरकार को लिखा जाए।
200 से 500 तक वसूली जा रही है फीस
आर्गेनाइनजेशन के महासचिव तेजपाल सिंह ने साफ किया है कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबंधित एफिलिएटेड, एसोसिएट व एडेड स्कूलों की फीस दो सौ से 500 रुपये के बीच में है। जबकि कुछ ऐसे भी स्कूल है। जिनकी मंथली फीस 200 से एक हजार रुपये तक है। इन स्कूलों की पुस्तकें भी बोर्ड की तरफ से सप्लाई की जाती है। इस मौके कमेटी ने कहा कि फीस कंट्रोल एक्ट बनाना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। वह केवल स्कूल की तरफ से ली जाने वाली फीस व उनकी तरफ से दी जाने वाली सुविधाओं को जांच कर रहे हैं।