अफगानिस्तान से लौटेंगी पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां
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अफगानिस्तान से भारत अपना खोया हुआ सम्मान वापस लेकर आएगा। भारत सरकार ने इसके लिए काबुल स्थित भारतीय दूतावास को इस दिशा में कदम उठाने के लिए कहा है। इससे अब उम्मीद जगी है कि सरकार पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां वापस लाने के लिए प्रयासरत है और जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक जवाब मिलने की उम्मीद है।
सिरसा निवासी एडवोकेट पवन पारीक ने पीएमओ से 05 नवंबर 2014 को आरटीआई के जरिये पृथ्वीराज चौहान के संबंध में जानकारी मांगी थी जिसमें भारत सरकार ने इस मामले में कोई जानकारी नहीं होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया था। इसके बाद हाल ही में 19 जनवरी 2015 को एडवोकेट पवन परीक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था।
पत्र लिखने के महज दस दिनों के अंदर ही पीएमओ की ओर से पत्र का जवाब आया और दिशा में आवश्यक कदम उठाने की बात कही। इसके साथ ही पीएमओ ने एक्शन कॉपी भी पवन परीक के पास भेजी है जिसमें साफ-साफ लिखा है कि आरटीआई के द्वारा मांगी गई सूचना के तहत जानकारी देने के लिए काबुल स्थित भारतीय दूतावास को उनका लेटर फॉरवर्ड कर दिया गया है और जल्द ही एक्शन रिपोर्ट देने को कहा है।
आरटीआई से भी जल्दी पीएमओ ने दिया जवाब
एडवोकेट पवन पारीक ने कहा कि उन्होंने आरटीआई के जरिये जब पीएमओ कार्यालय से जानकारी मांगी थी तो काफी समय बाद जवाब मिला मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखे 10 दिन भी नहीं हुए कि उनकी आरटीआई पर तुरंत एक्शन लिया गया है।
800 साल से हो रहा अपमान
एडवोकेट पवन पारीक ने मोदी को लिखे पत्र में बताया है कि 800 साल से राजपूत शासक पृथ्वीराज चौहान की अस्थियों का अफगानिस्तान में अपमान हो रहा था। अफगानिस्तान में पृथ्वीराज चौहान की समाधि है और उस समाधि को शैतान बताकर और उसपर जूते मारकर देशभक्त का अपमान किया जा रहा है।
मोहम्मद गोरी ने धोखे से युद्ध में पृथ्वीराज चौहान को बंदी बनाकर काबूल ले गया था। जहां पृथ्वीराज चौहान की हत्या कर उसके शव को दफना दिया था और तब से लेकर आज तक रोजाना पृथ्वीराज चौहान की समाधि पर जूते मारकर देशभक्त का अपमान कर रहे हैं।