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कैसे हो बीमारियों का खात्मा जब PGI को रिसर्च के लिए नहीं मिल रहा फंड

Fri, 06 May 2016 05:35 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 06 May 2016 05:35 PM IST
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prevented research project in PGI by ICMR due to lack of fund
पीजीआई चंडीगढ़

पीजीआई के कई रिसर्च प्रोजेक्ट पिछले छह से सात महीने से रुके हुए हैं। इन प्रोजेक्ट के आइडिया तो स्वीकार कर लिए गए थे, लेकिन उसके बाद उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया और न ही रुके प्रोजेक्ट का फंड रिलीज किया जा रहा है।

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दरअसल देश में स्वास्थ्य क्षेत्र में शोध कार्यों को फंड देने वाली संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने सभी प्रोजेक्ट रोक दिए हैं। इससे पीजीआई के चिकित्सक परेशान हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अब ऐसा लगता है कि सरकार चाहती ही नहीं कि कोई रिसर्च हो। अगर इंस्टीट्यूट रिसर्च नहीं करेंगे तो क्या करेंगे। यह काफी गंभीर मुद्दा है। इस पर सरकार को सोचना चाहिए।
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पिछले साल से रुके हैं प्रोजेक्ट: पीजीआई से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि यह स्थिति पिछले साल से ही शुरू हो गई थी। जुलाई 2015 से भेजे प्रोजेक्ट गए प्रोजेक्ट के संबंध में कोई जवाब नहीं मिला है। इसी समय से किसी नए प्रोजेक्ट को मंजूरी भी नहीं दी गई है। पीजीआई के डॉक्टर आईसीएमआर से संपर्क करते हैं तो उन्हें कोई जवाब नहीं दिया जाता है। उनके सामने समस्या है कि वह अपना दुखड़ा किसके सामने रोएं। डाक्टरों का कहना है कि यह भी नहीं बताया जा रहा है कि कौन सा प्रोजेक्ट स्वीकार किया गया और कौन सा नहीं। पहले इसकी जानकारी भी आ जाती थी, लेकिन अब ऐसा भी नहीं हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि यह हाल सिर्फ पीजीआई का नहीं बल्कि देश के अन्य संस्थानों का भी भी है। इससे शोध कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
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मरीजों पर पड़ेगा प्रभाव: रिसर्च प्रोजेक्ट से रुकने से इसका सीधा असर डॉक्टर और मरीजों पर पड़ेगा। पीजीआई से जुड़े चिकित्सक बताते हैं कि आईसीएमआर बीमारियों के नए-नए इलाज, बीमारियों का ट्रेंड, नई दवाओं की खोज और बीमारियों के कारण के अलावा कई क्लीनिकल ट्रायल के लिए आईसीएमआर फंड उपलब्ध कराता है। अगर ये सब बंद हो जाएगा तो चिकित्सा क्षेत्र कैसे आगे बढ़ेगा। इसका सीधा असर पेशेंट केयर पर पड़ेगा। अब जब आईसीएमआर की ओर कोई जवाब नहीं मिल रहा है तो डॉक्टर दूसरे डिपार्टमेंट की ओर जा रहे हैं।

अन्य डिपार्टमेंट दे रहे हैं ग्रांट, लेकिन देरी से: आईसीएमआर के अलावा डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी, डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड  टेक्नोलॉजी, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन, आयुष डिपार्टमेंट सहित कई अन्य विभाग शोध के लिए फंड देते हैं। इन सभी की फंडिंग पीजीआई के प्रोजेक्ट को दी जा रही है, लेकिन इसमें काफी देरी की जा रही है। इससे प्रोजेक्ट में काम करने वालों को सैलरी नहीं मिल रही है। 


सौम्य स्वामीनाथन, डायरेक्टर जनरल, आईसीएमआर ने बताया कि फंड की कमी के कारण प्रोजेक्ट को मंजूर नहीं किया जा रहा है। ऐसे बहुत से प्रोजेक्ट रुके हुए हैं।

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