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Chandigarh News: कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने पर कानूनी पेंच, अतिथियों की तर्ज पर सेवा सुरक्षित करने की तैयारी

Wed, 10 Jul 2024 08:44 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jul 2024 08:44 PM IST
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Preparation to secure service on the lines of guests.
पक्का करने की बजाए सेवानिवृत्ति तक नौकरी सुरक्षित करने की पाॅलिसी ला सकती है सरकार
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हरियाणा गेस्ट टीचर्स सर्विस एक्ट का अध्ययन करने में जुटे सीएमओ के अधिकारी
चंडीगढ़। प्रदेश में लाखों कच्चे कर्मचारियों को नियमित होने की आस को झटका लग सकता है। कानूनी पचड़ों से बचने के लिए और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित केसों को देखते हुए हरियाणा सरकार अब बीच का रास्ता निकालने में जुटी है। संभावना है कि सरकार अब कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की बजाए अतिथि अध्यापकों की तर्ज पर उनको 58 साल तक नौकरी की सुरक्षा गारंटी देगी। इसके लिए मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने हरियाणा गेस्ट टीचर्स सर्विस एक्ट का अध्ययन भी किया है। अब कर्मचारियों को लेकर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को लेना है।
पिछले कई साल से हरियाणा के अलग-अलग विभागों में ठेेके पर लगे कर्मचारी नियमित करने की मांग करते रहे हैं। विधानसभा चुनावों को लेकर कर्मचारियों ने अपनी सक्रियता भी बढ़ा दी है। अलग-अलग संगठन लगातार सीएम नायब सैनी से मुलाकात कर नियमित करने की पाॅलिसी लाने की अपील कर रहे हैं। पिछले दिनों डीसी रेट और एडहॉक पर लगे कर्मचारियों को पक्का करने के लिए मंथन भी किया था। हालांकि, बाद में कानूनी पचड़ों को देखते हुए स्थायी पाॅलिसी लाने के विचार को टाल दिया। तर्क दिया कि पहले भी कर्मचारियों को स्थायी करने की पाॅलिसी लाई गई थी, लेकिन उनको हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। अब ये मामले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इसलिए सरकार किसी भी कानून पचड़े से बचने के लिए अतिथि अध्यापकों की तर्ज पर कच्चे कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित करने की पाॅलिसी ला सकती है। इसमें 58 साल तक कर्मचारी की नौकरी सुरक्षित रहेगी, उनको वेतन पक्के कर्मचारी के बराबर मिलेगा, लेकिन उनको अन्य वित्तीय और मेडिकल सुविधाएं नहीं मिलेंगी। अब 12 जुलाई को हरियाणा कैबिनेट की बैठक होनी है। संभावना है कि सरकार इस मुद्दे को बैठक में लेकर आ सकती है।
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कर्मचारी बना रहे पक्का करने का दबाव
इधर, चुनावी साल को देखते हुए कच्चे कर्मचारियों को आस है कि सरकार उन्हें पक्का करने का फैसला ले सकती है। कर्मचारी संगठन भी इसके लिए लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं। लोकसभा चुनावों में सरकार को कर्मचारियों की नाराजगी झेलनी पड़ी थी और भाजपा को हार सीटें गंवानी पड़ी थी। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा का कहना है कि हम शुरू से ही कच्ची भर्ती के खिलाफ रहे हैं। पहला तो सरकार को खाली पदों पर नियमित भर्ती करनी चाहिए, दूसरा जो कच्चे कर्मचारी हैं, उनको पक्का किया जाए। अतिथि अध्यापकों के साथ भी सरकार ने धोखा किया है, क्योंकि भाजपा ने उनको नियमित करने का वादा किया था।
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