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Chandigarh News: पीयू में सेक्सुअल हरासमेंट कमेटी का नाम बदलने की तैयारी

Sun, 17 Sep 2023 01:09 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 17 Sep 2023 01:09 AM IST
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Preparation to change the name of sexual harassment committee in PU
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय की ओर से सेक्सुअल हरासमेंट कमेटी पीयूकैश का नाम बदलकर आईसीसी (इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी) किया जा रहा है। इसको लेकर 23 सितंबर को होने जा रही सिंडिकेट में प्रस्ताव रखा जाएगा। सिंडिकेट से अनुमति बाद में इसे पास होने के लिए सीनेट में रखा जाएगा और फिर लागू किया जाएगा। इसके साथ ही आईसीसी की पॉलिसी में कुछ नियमों में बदलाव है, इसमें सजा को विस्तृत रूप दिया गया है, आरोपी को क्या सजा और कैसे होगी। इसके साथ ही पहले पीयूकैश का मुखिया, चेयरपर्सन था। अब इसे भी बदलकर द प्रिसाइडिंग ऑफिसर कर दिया जाएगा। यूजीसी के निर्देशों के तहत यह बदलाव किए जाएंगे।
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पॉलिसी के तहत वीसी की जिम्मेदारी होगी कि संस्थान में आईसीसी को सख्ती के साथ लागू किया जाए। पब्लिक जगहों में सेक्सुअल हरासमेंट नियमों और कार्रवाई को लेकर पूरी जानकारी दी जाएगी। परिसर में सभी महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाएगा। संस्थान के विभागों के अलावा, कर्मचारियों, छात्रों, वार्डन व अन्य अधिकारियों को जागरूक करने के लिए कार्यशाला, सेमीनार जैसे कार्यक्रम करवाए जाएंगे। आईसीसी के सदस्यों के नंबर और नियमों को नोटिस बोर्ड पर डिस्प्ले किया जाएगा। इसके अलावा वेबसाइट पर भी पॉलिसी ड्राफ्ट को अपलोड किया जाएगा।
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ऐसे कर सकेंगे शिकायत
पीयू के छात्र के साथ संस्थान का कोई भी अन्य सदस्य लिखित में किसी भी सदस्य के खिलाफ सेक्सुअल हरासमेंट की शिकायत लिखित में सौंप सकता है। अगर पीड़ित मानसिक और शारीरिक परेशानी के कारण खुद सक्षम न हो तो लीगल मदद के जरिए भी आईसीसी के किसी भी सदस्य को शिकायत की जा सकेगी। पीड़ित अपनी शिकायत विभाग प्रमुख, हॉस्टल वार्डन इत्यादि को भी सौंप सकता है। ऐसे में अधिकारी को पीड़ित की शिकायत आईसीसी को सौंपनी होगी। आईसीसी के किसी भी सदस्य के पास शिकायत आने के 24 घंटे के अंदर ही आईसीसी प्रमुख को सदस्य को रिपोर्ट देनी होगी। पीड़ित को तय समय सीमा तीन महीने के अंदर ही आईसीसी तक लिखित में शिकायत पहुंचानी होगी।
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इंक्वायरी कमेटी में 50 प्रतिशत महिला होना अनिवार्य
आईसीसी की ओर से बनाई जाने वाली इंक्वायरी कमेटी में तीन से कम और पांच से ज्यादा सदस्य नहीं होने चाहिए। इसके साथ ही कुल सदस्यों में 50 प्रतिशत महिलाओं का होना अनिवार्य होना है। इंक्वायरी कमेटी को इंक्वायरी के 15 दिनों के भीतर आईसीसी को रिपोर्ट सौंपना अनिवार्य होगा।

ये हो सकती है सजाएं
अकादमिक स्टाफ को चेतावनी, एडमिनिस्ट्रेटिव पद से हटाना, एक साल या इससे अधिक के लिए पदोन्नति रोकना, काम से कुछ समय के लिए सस्पेंड करना या सेवानिवृत्ति के लिए बाध्य किया जा सकता है। छात्र के लिए सजा में अभिभावक या परिवार के पास शिकायत पहुंचाना, दूसरे हॉस्टल में ट्रांसफर, एक सेमेस्टर के लिए हॉस्टल में रुकने पर रोक, एक साल के लिए यूनिवर्सिटी में आने से रोक, डिग्री से निष्कासित या संस्थान की तरफ से चरित्र निर्माण सर्टिफिकेट देने इत्यादि पर रोक लग सकती है। शैक्षणिक स्टाफ के लिए सजा में चेतावनी, ट्रांसफर, काम से कुछ समय के लिए सस्पेंड करना या सेवानिवृत्ति के लिए बाध्य किया जा सकता है।
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