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पति की देह दान कर पेश की थी मिसाल, आज न्याय को भटक रही

Sun, 13 Sep 2015 05:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डबवाली,सिरसा(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, डबवाली,सिरसा(हरियाणा) Updated Sun, 13 Sep 2015 05:43 PM IST
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precedent, husband's body was donated now not getting justice

जिस पति की मौत के बाद शव चिकित्सीय शोध के लिए मेडिकल कॉलेज को देना एक महिला के लिए अभिशाप बन गया है। महिला मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए पिछले एक साल से दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। मामला हरियाणा के डबवाली का है।

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जिला जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिकारी इस महिला को न्याय नहीं दे रहे। वार्ड नंबर तीन निवासी सरोज रानी ने बताया कि उसके पति राजकुमार उर्फ अशोक कुमार शुगर की बीमारी से ग्रस्त थे। एक मई 2014 को उनकी मृत्यु हो गई थी। डेरा सच्चा सौदा सिरसा की शिक्षा पर अमल करते हुए उसने अपने पति के शरीर का दाह संस्कार किए बगैर अलीगढ़ स्थित मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट को दान कर दिया, ताकि मेडिकल क्षेत्र में होनहारों का भविष्य उज्ज्वल हो सके।
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इस संबंध में इंस्टीट्यूट की ओर से उन्हें प्रमाण पत्र भी जारी किया गया। मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए उसने नगर परिषद कार्यालय में अप्लाई किया। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिकारी सिरसा ने आपत्ति लगाकर आवेदन को वापस नगर परिषद के पास भेज दिया। उसने आपत्तियों को दूर करते हुए पुन: आवेदन किया।
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साथ में मेडिकल इंस्टीट्यूट का पत्र संलग्न किया। इसके बावजूद इस बार फिर आवेदन वापस नगर परिषद में आ गया है। दोबारा फिर उससे उपरोक्त प्रमाण पत्र की असल कॉपी मांगी जा रही है, जबकि वह उसने पहले ही भेज दिया था। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का खामियाजा उसे भुगतना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग बेवजह महिला को परेशान कर रहा

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सरोज के अनुसार उसके मृतक पति का नाम राजकुमार उर्फ अशोक कुमार है। इसके लिए सबूत के तौर पर उसने राशन कार्ड प्रस्तुत किया था। पंजीकरण अधिकारी ने नाम संबंधी सबूत के तौर पर राशन कार्ड को मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने नाम संबंधी अन्य सबूत मांगा। क्या राशन कार्ड मान्य नहीं?

महिला सरोज के दो बेटे हैं। घर पर परचून की दुकान चलाकर अपना और बच्चों का पेट पाल रही है। समाज कल्याण विभाग ने रहम करते हुए महिला की पेंशन शुरू करवा दी है। समाज कल्याण अधिकारियों का कहना था कि देह दान करने से बड़ा मृत्यु प्रमाण पत्र क्या हो सकता है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग बेवजह महिला को परेशान करने पर तुला हुआ है।

डॉ. राजेश चौधरी, जिला जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिकारी, सिरसा ने बताया कि मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए सबसे जरूरी है प्रमाण पत्र पर मौत की तिथि अंकित होना। यह नगर परिषद, अस्पताल या फिर किसी आंगनबाड़ी केंद्र में दर्ज होगी। उपरोक्त संस्थानों में से किसी एक का प्रमाण पत्र जरूरी है।

अकेले शपथपत्र से मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बनता। अगर देह को मेडिकल रिसर्च हेतु दान किया गया है, तो उसके प्रमाण पत्र पर मृत्यु तिथि अंकित होना जरूरी है। मैं पुन: कागजात देखूंगा। मृत्यु प्रमाण पत्र अवश्य जारी किया जाएगा।

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