फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   prakash singh commette report, haryana voilence, haryana jat protest, haryana govt, haryana

प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में अफसरशाही की कोताही पर टिप्पणी

Sun, 22 May 2016 10:54 AM IST
सर्वेश कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
सर्वेश कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 22 May 2016 10:54 AM IST
विज्ञापन
prakash singh commette report, haryana voilence, haryana jat protest, haryana govt, haryana
जाट हिंसा पर प्रकाश सिंह ने सीएम को रिपोर्ट सौंपते। - फोटो : amar ujala
हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के हुए उपद्रव की जांच रिपोर्ट में अफसरशाही की कोताही पर टिप्पणी की गई है। साथ ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपद्रव के दौरान सेना की इतनी भारी तैनाती की गई, जिससे पाकिस्तान के एक सेक्टर पर फतेह किया जा सकता था। सेना के 74 कॉलम की तैनाती के बावजूद हालात काबू करने में लेट लतीफी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों को और मुश्किल बना दिया है।
विज्ञापन


प्रकाश सिंह कमेटी ने हरियाणा सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में सेना की तैनाती के बावजूद हालात को काबू करने में देरी और पुलिस अधिकारियों की विफलता को उजागर किया है। रिपोर्ट में 90 पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही सामने आई हैं। कमेटी ने इन सभी पर कार्रवाई की सिफारिश की है। एक के बाद एक अधिकारियों पर गाज गिरने की शुरुआत भी हो चुकी है।
विज्ञापन


फरवरी में जब हरियाणा जाट आंदोलन की आग में झुलस रहा था, उस वक्त सेना की भारी संख्या में तैनाती ने पुलिस की भूमिका पर पहले दिन से सवाल खड़े कर दिए थे। लेकिन सेना की भारी तैनाती के बाद भी हालात को काबू करने में वक्त लगा। कमेटी ने यह भी सवाल उठाए हैं कि आखिरकार पुलिस क्यों हालात को काबू नहीं कर सकी। हालात को काबू करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से 4000 से अधिक सैन्य कर्मियों की तैनाती की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


कमेटी ने इस पर भी सवाल उठाए थे कि आखिरकार सेना की इतनी भारी तैनाती की क्यों जरूरत पड़ी, जब हरियाणा पुलिस मौजूद थे। कमेटी के प्रमुख उत्तरप्रदेश और असम के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने कहा है कि आंदोलन के दौरान प्रशासन और पुलिस के तमाम अधिकारियों की भूमिका की जांच के बाद ही उनपर कार्रवाई की सिफारिश की गई। इस दौरान 2200 से अधिक लोगों से बातचीत और 150 वीडियो फुटेज के अलावा मौके से इकट्ठा किए गए सुबूतों के आधार पर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी है।


जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उपद्रव को काबू करने के लिए सेना की भारी तैनाती का रिपोर्ट में जिक्र गया है। इतनी सेना से पाकिस्तान के एक सेक्टर पर फतेह किया जा सकता था।
-प्रकाश सिंह, पूर्व डीजीपी असम एवं उत्तर प्रदेश
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed