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बादल ने काली सूची खत्म करने पर मोदी का जताया आभार, बोले- कई बार उठाई थी मांग
Sat, 14 Sep 2019 08:14 PM IST
Abhishek Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकुला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकुला
Published by: Abhishek Singh
Updated Sat, 14 Sep 2019 08:14 PM IST
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प्रकाश सिंह बादल
- फोटो : ANI
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सिखों की अमानवीय और भेदभाव भरी काली सूची को समाप्त करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार का आभार व्यक्त करते हुए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने इस फैसले को ‘महान लीडरशिप की एक दूरदर्शिता वाली कार्रवाई’ करार दिया है।
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शनिवार को जारी एक बयान में बादल ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से इस बात की बेहद खुशी होती अगर इस फैसले के अलावा सज्जन कुमार जैसे सिखों के कातिलों को सजा देने वाले फैसले मनमोहन सिंह की सरकार के समय में लिए जाते।
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उन्होंने कहा कि अकाली दल और उन्होंने मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान बार-बार काली सूचियों को समाप्त करने के लिए कहा था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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इस फैसले का श्रेय लेने की दौड़ में शामिल होने से इंकार करते हुए बादल ने कहा कि- इस निर्णय का श्रेय लेना मुझे या अकाली दल से किसी को भी जचेगा नहीं, क्योंकि यह हमारा अपना निर्णय है। हम एनडीए सरकार के मंत्रिमंडल का अंग हैं तो इसके हर फैसले के हम साझेदार हैं। बादल ने कहा कि यदि कोई कांग्रेसी मुख्यमंत्री एनडीए सरकार के निर्णय का श्रेय ले रहा है तो इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विदेशों में रहते सिखों की काली सूचियों को समाप्त करवाना तो दूर की बात है, कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्रियों ने काली सूची से बाहर प्रख्यात परवासी सिख हरजीत सिंह सज्जन जैसों से भी निरादर भरा और बुरा व्यवहार करते हुए उनसे मिलने से भी इंकार कर दिया था, जब भारत सरकार द्वारा उनकी मेजबानी की गई थी।
कांग्रेसी सिख नेताओं की मानसिकता अपने भाईचारे के बारे बहुत अच्छी नही है। ऐसा लगता है, जैसे उन्हें एक समय सिख तथा कांग्रेसी होने का अपराधबोध हो। वह इस अपराधबोध को छुपाने का प्रयास करते हैं और कैनेडियन सिख मंत्रियों का निरादर करने जैसी सिख विरोधी हरकतों से अपनी आलाकमान के आगे अपनी वफादारी साबित करने का प्रयास करते हैं।
सिखों के मसलों पर मुझसे सलाह-मशविरा करते हैं नरेंद्र मोदी
बादल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतने दयालु और शालीन हैं कि पंजाब और खासतौर पर देशभक्त सिखों से संबधित सभी मसलों के बारे में वह हमेशा मुझसे व्यक्तिगत तौर पर सलाह मशविरा करते रहते हैं। लोग शायद भूल गए हों, पर मोदी जी ने 2013 में अहमदाबाद में हुए एक अंतरराष्ट्रीय समागम में बहादुर और देश भक्त सिख भाईचारे का सम्मान बहाल करवाने के लिए सार्वजनिक तौर से वादा किया था।