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मेयर बनते ही राजेश कालिया ने दिखाई जिंदादिली, मिली हैं कुछ शक्तियां और विशेषाधिकार
Sat, 19 Jan 2019 01:12 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 19 Jan 2019 01:12 PM IST
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मेयर राजेश कालिया
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भाजपा पार्षद राजेश कालिया चंडीगढ़ के नए 25वें मेयर चुन लिए गए हैं। मेयर बनते ही उन्हें कुछ शक्तियां और विशेषाधिकार भी मिल गए, जिनका प्रयोग उन्हें लोगों के लिए करना है। मेयर के लिए हुए चुनाव में उन्हें 16 वोट मिले, जबकि भाजपा के बागी पार्षद सतीश कैंथ के खाते में 11 वोट गए।
कांग्रेस ने ऐन वक्त पर अपनी मेयर प्रत्याशी शीला फूल सिंह का नामांकन वापस लेकर कैंथ को समर्थन देकर भाजपा का खेल बिगाड़ने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। जीत के बाद कालिया ने सांसद किरण खेर और टंडन के पैर छूकर आशीर्वाद लिए। वही, सीनियर डिप्टी मेयर पद के मुकाबले में भाजपा-अकाली गठबंधन के उम्मीदवार हरदीप सिंह ने कांग्रेस की प्रत्याशी गुरबख्श रावत को हराया।
हरदीप को 20 मत मिले, जबकि गुरबख्श रावत को महज सात मतों से ही संतोष करना पड़ा। इसके अलावा डिप्टी मेयर पद के लिए भाजपा-शिअद के गठबंधन के उम्मीदवार कंवरजीत सिंह ने कांग्रेस की रविंदर कौर गुजराल को 16 वोट से हराया।
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कांग्रेस ने ऐन वक्त पर अपनी मेयर प्रत्याशी शीला फूल सिंह का नामांकन वापस लेकर कैंथ को समर्थन देकर भाजपा का खेल बिगाड़ने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। जीत के बाद कालिया ने सांसद किरण खेर और टंडन के पैर छूकर आशीर्वाद लिए। वही, सीनियर डिप्टी मेयर पद के मुकाबले में भाजपा-अकाली गठबंधन के उम्मीदवार हरदीप सिंह ने कांग्रेस की प्रत्याशी गुरबख्श रावत को हराया।
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हरदीप को 20 मत मिले, जबकि गुरबख्श रावत को महज सात मतों से ही संतोष करना पड़ा। इसके अलावा डिप्टी मेयर पद के लिए भाजपा-शिअद के गठबंधन के उम्मीदवार कंवरजीत सिंह ने कांग्रेस की रविंदर कौर गुजराल को 16 वोट से हराया।
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मेयर बनते ही कालिया ने बदलवाई कुर्सी...
मेयर चुने जाने के बाद राजेश कालिया को जब मेयर की कुर्सी पर बैठने को कहा गया तो उन्होंने कुर्सी पर बैठने से इंकार कर दिया। कालिया ने कहा कि मेयर की यह कुर्सी किसी राजा की कुर्सी की तरह शाही है, जबकि मैं शहर का सेवक हूं, राजा नहीं। यही नहीं इस कुर्सी पर बैठकर मन में अहंकार आने का भी भय है। ऐेसे में मैं आम कुर्सी पर बैठूंगा। इसके बाद मेयर की कुर्सी हटाकर दूसरी कुर्सी लगाई गई। इसके बाद ही कालिया उस कुर्सी पर बैठे।
उन्होंने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का धन्यवाद किया और कहा कि अपने जीवन की शुरुआत उन्होंने उन्होंने डंपिंग ग्राउंड में कूड़ा उठाने से की थी और आज भाजपा पार्टी ने उन्हें महापौर के पद तक पहुंचा दिया। राजेश कालिया ने इस दौरान अपने ऊपर लगे आरोपों का भी बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मेरे ऊपर ऐसे आरोप लगाए गए जैसे कि मैं कोई आतंकवादी हूं लेकिन विरोधियों को अब मैं अपने काम से ही जवाब दूंगा।
कालिया ने दावा किया कि उनके ऊपर जो भी केस थे, उन सभी में वह बरी हो चुके हैं, किसी केस में उन्हें कोई सजा नहीं हुई है। उन पर सिर्फ 50 रुपये का जुर्माना भर लगा है। वो भी तब जब वह मोहाली में एक लाटरी की दुकान पर काम करते थे। कालिया ने कहा कि शहर का संपूर्ण विकास ही अब उनकी प्राथमिकता है। इसके लिए वह हर नागरिक का सहयोग चाहते हैं।
उन्होंने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का धन्यवाद किया और कहा कि अपने जीवन की शुरुआत उन्होंने उन्होंने डंपिंग ग्राउंड में कूड़ा उठाने से की थी और आज भाजपा पार्टी ने उन्हें महापौर के पद तक पहुंचा दिया। राजेश कालिया ने इस दौरान अपने ऊपर लगे आरोपों का भी बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मेरे ऊपर ऐसे आरोप लगाए गए जैसे कि मैं कोई आतंकवादी हूं लेकिन विरोधियों को अब मैं अपने काम से ही जवाब दूंगा।
कालिया ने दावा किया कि उनके ऊपर जो भी केस थे, उन सभी में वह बरी हो चुके हैं, किसी केस में उन्हें कोई सजा नहीं हुई है। उन पर सिर्फ 50 रुपये का जुर्माना भर लगा है। वो भी तब जब वह मोहाली में एक लाटरी की दुकान पर काम करते थे। कालिया ने कहा कि शहर का संपूर्ण विकास ही अब उनकी प्राथमिकता है। इसके लिए वह हर नागरिक का सहयोग चाहते हैं।
ये अधिकार और चुनौतियां मिलीं
अधिकार: चंडीगढ़ में मेयर खुद कोई फैसला नहीं ले सकते। सभी निर्णय सदन से पारित होते हैं।
वर्किंग में बदलाव- निगम के सभी बड़े निर्णय और काम जनता की सहमति और सहयोग से करने की कोशिश।
चुनौती: नगर निगम को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना।
बड़े काम जो करना चाहते हैं- 24 घंटे वॉटर सप्लाई। गीले और सूखे कचरे को अलग करने के लिए अभियान चलाएंगे।
मेयर को मिलती हैं ये सुविधाएं
मेयर को सेक्टर-24 में सरकारी आलीशान घर के अलावा सरकारी गाड़ी मिलती है। मेयर को दो सुरक्षाकर्मी के अलावा कार का सरकारी चालक मिलता है। घर पर काम करने के लिए दो सेवादार भी मिलते हैं। मेयर का अधिकारियों में दबदबा भी रहता है।
मेयर के पास हैं विशेष अधिकार
नगर निगम में जो भी वित्त एवं अनुबंध कमेटी और सदन में प्रस्ताव पास होने के लिए आता है, वह मेयर के माध्यम से ही आता है। मेयर किसी प्रस्ताव को रोक भी सकता है। मेयर को हर साल दो करोड़ रुपये का फंड मिलता है, जो वह पूरे शहर के विकास में खर्च कर सकता है।
20 लाख मिलता है फंड
सीनियर डिप्टी मेयर को 20 लाख और डिप्टी मेयर को 10 लाख रुपये का फंड मिलता है। इसके अलावा हर माह 25 हजार रुपये का मानदेय मिलता है। सांसद के बाद मेयर का पद ही शहर में अहम है। मेयर का कार्यकाल एक साल का होता है।
इनके पास नहीं है कोई अधिकार
सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के पास कोई अधिकार नहीं होता है। सुविधा के नाम पर सिर्फ उन्हें नगर निगम में कमरा मिलता है, लेकिन उनके पास कोई फाइल नहीं आती है। पार्षद कई बार सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के लिए सरकारी गाड़ी की मांग कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन यह मांग खारिज कर चुका है।
वर्किंग में बदलाव- निगम के सभी बड़े निर्णय और काम जनता की सहमति और सहयोग से करने की कोशिश।
चुनौती: नगर निगम को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना।
बड़े काम जो करना चाहते हैं- 24 घंटे वॉटर सप्लाई। गीले और सूखे कचरे को अलग करने के लिए अभियान चलाएंगे।
मेयर को मिलती हैं ये सुविधाएं
मेयर को सेक्टर-24 में सरकारी आलीशान घर के अलावा सरकारी गाड़ी मिलती है। मेयर को दो सुरक्षाकर्मी के अलावा कार का सरकारी चालक मिलता है। घर पर काम करने के लिए दो सेवादार भी मिलते हैं। मेयर का अधिकारियों में दबदबा भी रहता है।
मेयर के पास हैं विशेष अधिकार
नगर निगम में जो भी वित्त एवं अनुबंध कमेटी और सदन में प्रस्ताव पास होने के लिए आता है, वह मेयर के माध्यम से ही आता है। मेयर किसी प्रस्ताव को रोक भी सकता है। मेयर को हर साल दो करोड़ रुपये का फंड मिलता है, जो वह पूरे शहर के विकास में खर्च कर सकता है।
20 लाख मिलता है फंड
सीनियर डिप्टी मेयर को 20 लाख और डिप्टी मेयर को 10 लाख रुपये का फंड मिलता है। इसके अलावा हर माह 25 हजार रुपये का मानदेय मिलता है। सांसद के बाद मेयर का पद ही शहर में अहम है। मेयर का कार्यकाल एक साल का होता है।
इनके पास नहीं है कोई अधिकार
सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के पास कोई अधिकार नहीं होता है। सुविधा के नाम पर सिर्फ उन्हें नगर निगम में कमरा मिलता है, लेकिन उनके पास कोई फाइल नहीं आती है। पार्षद कई बार सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के लिए सरकारी गाड़ी की मांग कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन यह मांग खारिज कर चुका है।