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पंजाब में भाखड़ा और रणजीत सागर बांध पर बिजली का दारोमदार, तकनीकी खराबी आई तो बढ़ सकता संकट

Sun, 01 Nov 2020 03:57 PM IST
ajay kumar सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 01 Nov 2020 03:57 PM IST
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Power crisis in Punjab: Power supply in Punjab Dependent on dam
भाखड़ा बांध। - फोटो : फाइल फोटो

पंजाब में थर्मल प्लांट बंद होने से बिजली सप्लाई का सारा दारोमदार अब नेशनल ग्रिड पर आ गया है। अगर रणजीत सागर या भाखड़ा डैम में तकनीकी खराबी आई या फिर ट्रांसमिशन लाइन में गड़बड़ी हुई तो पंजाब में ब्लैकआउट के हालात पैदा होना तय है। राहत की बात यह है कि सर्दी का मौसम आने से सूबे में बिजली की खपत दिन प्रतिदिन कम हो रही है।

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पंजाब में इस समय राजपुरा, तलवंडी साबो, गोइंदवाल साहिब, रोपड़ व बठिंडा में थर्मल प्लांट हैं। बठिंडा थर्मल प्लांट तो पहले ही बंद था। हाल ही में अब बाकी चारों भी बंद हो गए हैं। धान के सीजन में बिजली की खपत 14 हजार मेगावाट प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। सामान्य तौर पर बिजली की मांग नौ हजार मेगावाट तक रहती है। गर्मी व धान के सीजन में खपत पांच हजार मेगावाट और बढ़ जाती है। 
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डैम व नहरी प्रोजेक्ट से मिलती है 7 हजार मेगावाट बिजली
पंजाब को गर्मी में पांचों थर्मल प्लांटों के अलावा बाकी की बिजली भाखड़ा, रणजीत सागर डैम, जोगिंदर नगर डैम, छोटे नहरी प्रोजेक्ट, सेंट्रल पूल के फिक्स कोटा व सरकारी थर्मल प्लांट से मिलती है। कुल मिलाकर सात हजार मेगावाट डैम व नहरी प्रोजेक्ट से बिजली पंजाब को मिलती है, जबकि बाकी थर्मल प्लांट पैदा करते हैं।

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अगर पंजाब के थर्मल प्लांट में कोयला नहीं भी पहुंचता तो परेशानी वाली बात नहीं है। डैम व सेंट्रल पूल से बिजली आपूर्ति जारी रहेगी। इस तरह पंजाब में बिजली का दारोमदार डैम के कंधों पर है। पंजाब को दो हजार मेगावाट बिजली सेंट्रल पूल से भी मिलती है। ऐसे में अभी गेहूं की बिजाई तक पंजाब को इतनी बिजली की जरूरत भी नहीं है, इसके लिए केंद्रीय संसाधन पर्याप्त हैं। सात हजार मेगावाट बिजली जहां डैम से मिल रही है, वहीं दो हजार मेगावाट सेंट्रल पूल से मिलनी शुरू हो चुकी है।

आपातकाल के लिए करनी होगे कोयले की व्यवस्था
हर साल पंजाब में थर्मल प्लांट सर्दी के मौसम में बंद कर दिए जाते हैं। सिर्फ मशीनरी ही चलाई जाती है, ताकि किसी आपातकालीन हालात में बिजली का उत्पादन किया जा सके। इसके लिए कोयले की व्यवस्था करनी होगी। पंजाब में सर्दी के मौसम में बिजली की खपत सात से नौ हजार मेगावाट होती है, इसलिए थर्मल प्लांट बंद कर दिए जाते हैं और बिजली का उत्पादन रोक दिया जाता है। अगर बिजली का उत्पादन करना भी हो तो अभी तलवंडी साबो व गोइंदवाल साहिब की मशीनरी को चलाकर रखा गया है। कोयला मिलते ही 24 घंटे में बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा। 

अगले माह दो हजार मेगा यूनिट कम हो सकती है खपत
वर्तमान में सूबे में बिजली की मांग 9000 मेगावाट है। पंजाब 7000 मेगावाट अपने संसाधनों, साझा जलविद्युत से, 2000 मेगावाट सेंट्रल पूल से खरीद रहा है। सरप्लस बिजली एनपीई में पंजाब कभी भी ले सकता है। हालांकि पावरकॉम के सीएमडी ने राज्य सरकार से 200 करोड़ रुपये बिजली खरीद के लिए अतिरिक्त मांगे हैं, ताकि संकट का सामना न करना पड़े। 

संभावना व्यक्त की जा रही है कि अगले दो माह में लगातार दो हजार मेगावाट प्रतिदिन बिजली की खपत कम हो सकती है। इसका मुख्य कारण सर्दी का बढ़ना होगा। फिर भी पंजाब सरकार कोई रिस्क लेने के लिए तैयार नहीं है। संकट के लिए केंद्रीय पूल से बिजली खरीद को सुनिश्चित करना चाहती है।

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