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चंडीगढ़: 150 से ज्यादा प्रवक्ताओं के पद खाली.. कनिष्ठ शिक्षकों पर पड़ा कक्षाएं लेने का दबाव

Sun, 25 Oct 2020 03:49 PM IST
ajay kumar कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 25 Oct 2020 03:49 PM IST
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Posts of more than 150 lecturer vacant in Chandigarh schools
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

सरकारी स्कूलों में हर महीने शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने से पद खाली होते जा रहे हैं लेकिन इन्हें भरा नहीं जा रहा है। इस वजह से कनिष्ठ शिक्षकों पर कक्षाएं लेने का दबाव बढ़ता जा रहा है। आलम यह है कि इन शिक्षकों को पदोन्नति दिए बिना ही वरिष्ठ कक्षाओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।

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हालात ये हैं कि शिक्षा विभाग में बरसों से नियमित शिक्षकों की भर्ती अटकी हुई है। स्कूलों में लगभग 549 के करीब प्रवक्ता के पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में इनमें 150 से ज्यादा प्रवक्ता के पद खाली पड़े हैं। इनमें कई प्रवक्ता कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं। 
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कनिष्ठ शिक्षकों को पदोन्नति दिए बिना ही वरिष्ठ कक्षाओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी 
इस वर्ष मार्च से नवंबर तक सरकारी स्कूलों में नियमित सेवाएं दे रहे कई प्रवक्ता सेवानिवृत्त हो गए। शिक्षा विभाग में प्रवक्ता की अंतिम नियमित भर्ती 1992 में हुई थी। इतने सालों से विभाग में हर वर्ष लगातार सेवानिवृत्ति के कारण पद खाली ही हुए हैं। इसके साथ ही हर वर्ष 11वीं और 12वीं में विद्यार्थियों की संख्या में भी बहुत ज्यादा इजाफा हुआ है। वर्ष 2016-17 में शिक्षा विभाग ने केंद्र से स्कूलों में 186 पदों पर भर्ती की मांग की थी लेकिन यह फैसला अभी तक अटका है। 

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शिक्षक यूनियन के अध्यक्ष स्वर्ण सिंह कंबोज ने बताया कि पिछले लंबे समय से टीजीटी की पदोन्नति रुकी है। कई शिक्षक बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। विभाग की ओर से कनिष्ठ शिक्षकों को पदोन्नति दिए बिना ही वरिष्ठ कक्षाओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी और कार्य सौंपा जा रहा है। 

11वीं में लगातार बढ़ रही विद्यार्थियों की संख्या 
11वीं कक्षा में दाखिले के दौरान विद्यार्थियों की संख्या हर साल सरकारी स्कूलों में बढ़ रही है। विद्यार्थियों को समायोजित करने के लिए नए स्कूल बनाने के साथ शाम की कक्षाएं तक लगवाई जा रही है। लेकिन विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के हिसाब से नए शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति का कार्य ठप है। 

कई प्रवक्ता 20 वर्ष से अनुबंध पर कर रहे काम 
सरकारी स्कूलों में कई प्रवक्ता पिछले लगभग 20 से 22 वर्षों से अनुबंध पर ही चल रहे हैं। नियमित करने को लेकर शिक्षकों ने कैट में याचिका भी दायर की लेकिन कोर्ट ने फैसला दिया कि इनके पदों पर जब तक नियमित भर्ती नहीं होती या टीजीटी को प्रमोट नहीं किया जाता, तब तक इनकी सर्विस जारी रहेगी। 

शिक्षकों के वरिष्ठता के आधार पर उनको पदोन्नति देने के लिए हम खाका तैयार कर रहे हैं। जल्दी ही शिक्षकों को प्रमोट किया जाएगा। नई भर्ती को लेकर अभी कुछ सुनिश्चित नहीं है। - रुबिंदर जीत सिंह बराड़, शिक्षा निदेशक 

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