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Highcourt: दो बच्चों की गरीब मां को 6 वर्ष रखा नौकरी से वंचित, हाईकोर्ट ने HSSC पर लगाया 3 लाख जुर्माना

Wed, 20 Nov 2024 02:25 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Wed, 20 Nov 2024 02:25 AM IST
सार

याचिका दाखिल करते हुए झज्जर निवासी करिश्मा ने कांस्टेबल भर्ती में उसे ऊंचाई के लिए अयोग्य करार देने के एचएसएससी के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि आयोग की कार्रवाई पूरी तरह से अवैध थी।

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mother of two children deprived of job for 6 years, HSSC fined Rs 3 lakh
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कांस्टेबल पद के लिए उम्मीदवार दो बच्चों की मां को 6 साल तक अनुचित तरीके से वंचित रखने पर कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए नियुक्ति का आदेश दिया है। 
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हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आयोग इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाकर, हर तरह से उसके दावे को खारिज करने पर तुला हुआ है।

याचिका दाखिल करते हुए झज्जर निवासी करिश्मा ने कांस्टेबल भर्ती में उसे ऊंचाई के लिए अयोग्य करार देने के एचएसएससी के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि आयोग की कार्रवाई पूरी तरह से अवैध थी। याचिकाकर्ता को छह वर्षों से इस अनावश्यक मुकदमे में घसीटा जा रहा है। दुर्भाग्य की बात है कि उसकी शिकायत का निवारण करने के बजाय, अब आयोग ने एक नई दलील पेश की है कि कट-ऑफ तिथि पर याचिकाकर्ता ओवरऐज थी। 
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आयोग ने शुरू में इस आधार पर उम्मीदवारी को खारिज कर दिया था कि वह ऊंचाई के मानदंड यानी 156 सेमी को पूरा नहीं कर रही है। हालांकि यह पाया गया कि ऊंचाई ठीक से नहीं मापी गई थी और असल में वह मानदंडों के अनुरूप थी। उसके दावे को स्वीकार करने के बजाय, आयोग अलग-अलग कारणों से उसकी उम्मीदवारी को अनुचित तरीके से खारिज करता रहा। प्रतिवादियों का रवैया पूरी तरह से अवैध, मनमाना और भेदभावपूर्ण है। 
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आयोग को याचिकाकर्ता के दावे को अधिक आयु के आधार पर खारिज करने के बजाय, सक्षम प्राधिकारी होने के नाते सरकार के विचारार्थ भेजना चाहिए था। आयोग ने गरीब महिला जो एक्स सर्विसमैन एससी श्रेणी से है उसको परेशान करने का दृढ़ निश्चय किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि याची पिछले छह वर्षों से दो नाबालिग बच्चों का पालन-पोषण करते हुए कानूनी लड़ाई लड़ने को मजबूर रही। हाईकाेर्ट ने आयोग की उठाई गई आपत्ति पूरी तरह से तुच्छ और कानून में अक्षम्य है, इसकी कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए।
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