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Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana Air Quality Index: Poor AQI In Many Cities, Charkhi Dadri is the Most Polluted in the Country

Haryana: देश में चरखी दादरी की हवा सबसे प्रदूषित, सरकार का दावा- कम जली पराली... फिर प्रदूषण कैसे बढ़ा?

Fri, 04 Nov 2022 01:14 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 04 Nov 2022 01:14 AM IST
सार

मौसम विभाग के अधिकारियों ने तीन नवंबर को प्रदूषण का स्तर बेहद खराब रहने की संभावना जताई थी। हालात भी वही बने हुए हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पांच नवंबर को प्रदूषण इससे भी ज्यादा खराब हो सकता है।

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Haryana Air Quality Index: Poor AQI In Many Cities, Charkhi Dadri is the Most Polluted in the Country
रोहतक में सुबह ऐसे दिखी धुंध। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के मुकाबले हरियाणा में इस बार बेशक कम पराली जलाने के मामलों का दावा किया जा रहा हो लेकिन हकीकत यह भी है कि प्रदूणष स्तर पिछले सालों के मुकाबले बढ़ रहा है। कई शहरों में यह खराब से अति खराब श्रेणी में आ चुका है। गुरुवार को चरखी दादरी देश में सर्वधिक प्रदूषित रहा जिसका एक्यूआई 460 दर्ज किया गया। सरकार के तमाम दावों के बीच प्रदेश में वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार नहीं हो रहा है। खास बात ये है कि जिन शहरों में पराली जलाने के मामले कम हैं, वहां पर भी प्रदूषण स्तर अधिक है।

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक गुरुवार को प्रदेश में कुल 128 पराली जलाने के मामले सामने आए। तीन नवंबर 2021 को 197 पराली जलाने के मामले सामने आए थे। अब तक प्रदेश में 2300 से अधिक स्थानों पर पराली जलाई जा चुकी है। सरकार का दावा है कि पिछले साल और पंजाब के मुकाबले इस बार प्रदेश में कम स्थानों पर पराली जलाई गई है। इसके बावजूद प्रदूषण पिछले साल की तुलना में बढ़ा है। जहां सरकार के दावों पर प्रश्नचिह्न लगता है।
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आंकड़ों की बात करें तो करनाल में पिछले साल पराली के 214 मामले थे, इस बार 191 मामले सामने आए। पिछले साल इसी दिन एक्यूआई 287 था और गुरुवार को 275 रहा। यमुनानगर में पिछले साल 157 मामले पराली जलाने के सामने आए थे। वहीं इस बार अब तक पराली जलाने के 107 मामले सामने आ चुके हैं। गुरुवार को एक्यूआई 278 रिकॉर्ड किया गया, जबकि बीते वर्ष तीन नवंबर को एक्यूआई 211 था। कैथल जिले में पिछले साल पराली जलाने के 1167 मामले सामने आए थे। इस बार अब तक 570 मामले सामने आए।

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एक्यूआई पिछले साल 276 और इस साल तीन नवंबर को 386 है। कुरुक्षेत्र में पराली जलाने के पिछले साल 404 मामले थे। इस बार अब तक 365 मामले सामने आए हैं। वहीं पिछले साल 197 एक्यूआई था जबकि इस साल अधिकतम 324 रिकॉर्ड किया गया। पानीपत में पिछले साल 252 मामले सामने आए। इस बार अब तक 32 की सूचना मिली, छह पुष्टि नहीं हो पाई और 26 पर 72 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। एक्यूआई पिछले साल आज के दिन 235 था और आज 379 है।

मौसम विभाग के अधिकारियों ने तीन नवंबर को प्रदूषण का स्तर बेहद खराब रहने की संभावना जताई थी। हालात भी वही बने हुए हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पांच नवंबर को प्रदूषण इससे भी ज्यादा खराब हो सकता है।

बढ़ते प्रदूषण पर सख्त एक्शन 
सोनीपत में निगम अधिकारियों ने प्रदूषण फैलाने वालों पर 60,500 रुपये जुर्माना लगाया है। टीम ने मॉडल टाउन में चल रहे दो स्थान पर निर्माण कार्य को रुकवाया। साथ ही 20-20 हजार जुर्माना लगाया। गोहाना रोड पर निर्माण सामग्री खुले में डालने पर 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया। और सड़क किनारे मलबा डालने वाले पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया। 

फतेहाबाद में सबसे अधिक जली पराली
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक गुरुवार को हिसार में पराली जलाने के चार, फतेहाबाद में 48 और सिरसा में 11 मामले सामने आए हैं। प्रदेश में कुल 128 पराली जलाने के मामले सामने आए। एक तुलना के मुताबिक तीन नवंबर 2021 को 197 पराली जलाने के मामले सामने आए थे। अब तक प्रदेश में 2300 से अधिक स्थानों पर पराली जलाई जा चुकी है। सरकार का दावा है कि पिछले साल और पंजाब के मुकाबले इस बार प्रदेश में कम स्थानों पर पराली जलाई गई है। 

हरियाणा के शहरों का एक्यूआई

  • शहर         एक्यूआई
  • रोहतक         443
  • गुरुग्राम        440
  • भिवानी         440
  • जींद             426
  • फरीदाबाद     382
  • पानीपत        369
  • सोनीपत        354
  • हिसार           332
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