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हरियाणा विस सत्रः जाट आरक्षण आंदोलन पर सदन में नहीं थमी सियासत, इनेलो का वॉकआउट
Thu, 07 Nov 2019 10:14 AM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 07 Nov 2019 10:14 AM IST
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इनेलो नेता अभय चौटाला
हरियाणा विधानसभा में जाट आरक्षण आंदोलन पर सियासत 14वीं विधानसभा के पहले सत्र में भी जारी रही। 2016 में हुए आंदोलन के जख्मों को भले ही प्रदेश की जनता भुलाना चाहे पर सियासतदान भूलने नहीं देते। 13वीं विधानसभा में जहां माननीयों ने जाट आंदोलन पर जमकर राजनीतिक रोटियां सेकी, वहीं नई सरकार में भी यह सिलसिला शुरू हो गया है। कांग्रेस और इनेलो, सरकार पर दबाव बनाकर युवाओं की सहानुभूति बटोरना चाहते हैं।
नई विधानसभा के पहले सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डॉ. रघुबीर कादियान तो तीसरे व अंतिम दिन इनेलो विधायक अभय सिंह चौटाला ने जेलों में बंद युवाओं को मुकद्मे वापस लेकर रिहा करने का मुद्दा जोरशोर से उठाया। कादियान तो यह कहने से भी नहीं चूके कि पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु भी अब सदन में नहीं हैं। उनकी कोठी जलाने के आरोप में अनेक निर्दोषयुवा जेलों में बंद हैं, उनके केस वापस लेकर युवाओं की रिहाई सुनिश्चित कराई जाए।
उधर, अभय सिंह चौटाला बुधवार को जेल में बंद युवाओं का मुद्दा उठाया साथ ही सरकार की तरफ से जवाब की मांग की। स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने उन्हें यह कहकर चुप करा दिया कि उनकी तरफ से चर्चा के लिए कोई नोटिस नहीं आया है। इसलिए यह मुद्दा नहीं उठाया जा सकता। अभय चौटाला इस मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए अड़े रहे। स्पीकर ने जब साफ मना कर दिया तो इनेलो विधायक चौटाला विरोध स्वरूप सदन से वाक आउट कर गए।
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सदन में कादियान ने अभय की बात का समर्थन किया। भाजपा विधायकों ने इस अभय के मुद्दा उठाने के दौरान टोकाटोकी भी की।
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नई विधानसभा के पहले सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डॉ. रघुबीर कादियान तो तीसरे व अंतिम दिन इनेलो विधायक अभय सिंह चौटाला ने जेलों में बंद युवाओं को मुकद्मे वापस लेकर रिहा करने का मुद्दा जोरशोर से उठाया। कादियान तो यह कहने से भी नहीं चूके कि पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु भी अब सदन में नहीं हैं। उनकी कोठी जलाने के आरोप में अनेक निर्दोषयुवा जेलों में बंद हैं, उनके केस वापस लेकर युवाओं की रिहाई सुनिश्चित कराई जाए।
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उधर, अभय सिंह चौटाला बुधवार को जेल में बंद युवाओं का मुद्दा उठाया साथ ही सरकार की तरफ से जवाब की मांग की। स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने उन्हें यह कहकर चुप करा दिया कि उनकी तरफ से चर्चा के लिए कोई नोटिस नहीं आया है। इसलिए यह मुद्दा नहीं उठाया जा सकता। अभय चौटाला इस मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए अड़े रहे। स्पीकर ने जब साफ मना कर दिया तो इनेलो विधायक चौटाला विरोध स्वरूप सदन से वाक आउट कर गए।
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सदन में कादियान ने अभय की बात का समर्थन किया। भाजपा विधायकों ने इस अभय के मुद्दा उठाने के दौरान टोकाटोकी भी की।
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न्यायालय में मामले, सदन में नहीं कर सकते चर्चा: सीएम
मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी जवाब देने में पीछे नहीं रहे, उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण में सरकार ने समाजिक भाईचारा बनाए रखने की प्रतिबद्धता जाहिर की है। जो भी कारण सामाजिक भाईचारा खत्म करने के जिए जिम्मेदार होंगे, उनको दूर किया जाएगा। जाट समुदाय के युवाओं के ऊपर मामले कोर्ट में चल रहे हैं। कई मामले हाईकोर्ट में भी हैं, ऐसे में सदन में चर्चा नहीं की जा सकती।
अभय ने स्पीकर पर लगाए आरोप
इनेलो विधायक अभय चौटाला ने कहा कि सत्र के तीसरे दिन सभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं की धज्जियां उड़ाई र्गइं। सदन में उन्होंने जब जाट आरक्षण मुद्दे पर बोलना चाहा तो विधानसभा स्पीकर ने उनका माइक बंद करवा दिया। इस मुद्दे को सदन के रिकार्ड से भी निकालने के आदेश दिए। अभय ने आरोप लगाते हुए कहा कि स्पीकर के आचरण में सरकार की दुर्भावना दिखाई देती है।
ऐसा प्रतीत होता है कि वो भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सरकार की कमियां उजागर नहीं होने देना चाहते। उन्होंने कहा कि भाजपा की सहयोगी पार्टी जजपा जो जाट आरक्षण के मुद्दे को लेकर भाजपा की सरकार को पूर्व में निशाना बनाती थी, इस मुद्दे पर सदन में मूकदर्शक बनी रही।
अभय ने स्पीकर पर लगाए आरोप
इनेलो विधायक अभय चौटाला ने कहा कि सत्र के तीसरे दिन सभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं की धज्जियां उड़ाई र्गइं। सदन में उन्होंने जब जाट आरक्षण मुद्दे पर बोलना चाहा तो विधानसभा स्पीकर ने उनका माइक बंद करवा दिया। इस मुद्दे को सदन के रिकार्ड से भी निकालने के आदेश दिए। अभय ने आरोप लगाते हुए कहा कि स्पीकर के आचरण में सरकार की दुर्भावना दिखाई देती है।
ऐसा प्रतीत होता है कि वो भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सरकार की कमियां उजागर नहीं होने देना चाहते। उन्होंने कहा कि भाजपा की सहयोगी पार्टी जजपा जो जाट आरक्षण के मुद्दे को लेकर भाजपा की सरकार को पूर्व में निशाना बनाती थी, इस मुद्दे पर सदन में मूकदर्शक बनी रही।