दिल्ली चुनावः शिअद को लेकर पंजाब में सियासत गरमाई, विपक्ष का आरोप- हार के डर से नहीं लड़ रहे
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल के न लड़ने को लेकर पंजाब में सियासत गरमा गई है। हरियाणा के बाद दिल्ली में भी भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन टूटने पर विपक्ष शिअद पर हमलावर हो गया है। अकाली दल के बागी सांसद सुखदेव ढींढसा ने कहा है कि पार्टी हार के डर से दिल्ली विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रही है।
नागरिकता संशोधन एक्ट पर भाजपा से मतभेद तो सिर्फ एक बहाना है। शिअद नेता मनजिंदर सिरसा ने सोमवार को एलान किया था कि पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी। क्योंकि उसका मानना है कि नागरिकता संशोधन एक्ट में मुस्लिम को भी शामिल किया जाना चाहिए। पर भाजपा उस पर अपना स्टैंड बदलने का दबाव बना रही है। इसलिए पार्टी ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है।
ढींढसा ने कहा कि अगर ऐसा है तो अकाली दल दिल्ली में अकेले चुनाव क्यों नहीं लड़ता। अगर उसे लगता है कि दिल्ली के सिखों पर पार्टी का प्रभाव है तो उसे अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ना चाहिए। नागरिकता संशोधन कानून पर स्टैंड की बात एक बहाना है। अकाली दल संसद में उसके पक्ष में वोट डाल चुका है।
'हरसिमरत की कुर्सी बचाने को नहीं लड़े दिल्ली चुनाव'
नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा ने शिअद और भाजपा के गठजोड़ में दरार पर अकालियों द्वारा दी जा रही सफाई को दोहरा रवैया करार दिया है। चीमा ने कहा कि भले ही यह शिअद व भाजपा का अंदरूनी मामला है। इसे लेकर नागरिकता संशोधन कानून की जो सफाई दी जा रही है, वह सच्चाई से दूर है। जब से सीएए, एनआरसी, एनपीआर विवाद शुरू हुआ है, तब से बादलों ने या तो चुप्पी साध ली, या दोहरा रवैया अपनाया है।
संसद में सुखबीर बादल और हरसिमरत कौर बादल ने इसके पक्ष में वोट दिया। पंजाब और चंडीगढ़ में आकर दूसरी बोली बोलने लगे। संसद में पक्ष लेने और मलेरकोटला में मुस्लिम भाईचारे का हवाला देना बादलों के स्टैंड की पोल खोलता है। सोमवार को अकालियों का सीएए के संबंध में कुर्बानी भरा एलान दरसल केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल की कुर्सी बचाने की कोशिश है।
भाजपा का हाथ मजबूत कर रहे अकाली: चन्नी
दिल्ली चुनाव न लड़ने के दावे पर शिअद को आड़े हाथों लेते हुए पंजाब के कैबिनेट मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने कहा है कि असलियत में 'बादल दल' भाजपा की कठपुतली बन गया है। उन्होंने कहा कि अकाली दल भाजपा की साजिश भरी मिलीभगत से लगातार सिखों और सिख मुद्दों को तिलांजलि दे रहा है।
चन्नी ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव न लड़ने का एलान भाजपा के साथ अकाली दल की मिलीभगत का ही नतीजा है जिससे बहुसंख्यक हिंदु वोट कांग्रेस की तरफ न जाकर, भाजपा के हक में जा सकें। मंत्री ने कहा कि इससे पहले हरियाणा में भी अकाली दल ने भाजपा की मिलीभगत के साथ सिखों को धोखा दिया।
नतीजा यह हुआ कि वहां अकाली दल ने सिखों के वोट इनेलो के हक में डाले क्योंकि अल्पसंख्यकों की वोट खराब करके भाजपा के संकुचित मंसूबों को कामयाब किया जा सके। नागरिकता संशोधन कानून पर अकाली दल के दोहरे बयानों को मगरमच्छ के आंसू करार देते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि बादल परिवार अपनी साख बचाने के लिए यह सब नाटक है।