एसवाईएल मामला: अपने हिस्से के पानी के लिए हरियाणा की फिर पंजाब पर टकटकी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एसवाईएल (सतलुज-यमुना लिंक नहर) के अपने हिस्से के पानी के लिए हरियाणा की टकटकी एक बार फिर पड़ोसी राज्य पंजाब पर लग गई है। दोनों राज्यों में इस मुद्दे पर वार्ता तो पहले भी कई बार हो चुकी लेकिन पंजाब टस से मस नहीं होता है। पंजाब सरकार अनेक दफा पानी देने से दो टूक मना कर चुकी है। बावजूद इसके हरियाणा भी हार मानने को तैयार नहीं है।
सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर वार्ता का रास्ता सुझाया है। इसके नतीजे कितने सार्थक होंगे यह भविष्य के गर्भ में है लेकिन हरियाणा को उम्मीद जरूर बंधी है। हरियाणा में भाजपा तो पंजाब में कांग्रेस सरकार है। अब देखना यह है कि पंजाब इस मुद्दे पर पड़ोसी राज्य की कितनी सुनता है। चूंकि, दोनों प्रदेशों में लंबे समय से एसवाईएल पर राजनीति होती आ रही है।
इस मुद्दे पर कई सरकारें भी आई और चली गईं। लेकिन, गतिरोध नहीं सुलझा। हरियाणा में भाजपा सरकार आने के बाद इसे लेकर केंद्र स्तर पर कई बैठकें हो चुकी हैं। बीते दिनों भी सीएम मनोहर लाल ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से एसवाईएल का मुद्दा सुलझाने की अपील की थी।
हरियाणा में एसवाईएल का पानी आने से सबसे अधिक फायदा दक्षिण हरियाणा को होगा। जहां नहरी पानी का संकट बना रहता है। अब देखना यह है कि बरौदा उपचुनाव से पहले हरियाणा, पंजाब के बीच एसवाईएल के मुद्दे पर बैठक होती है या नहीं। चूंकि, कुछ भी सार्थक परिणाम निकलने पर भाजपा इसे उपचुनाव में भुनाने से नहीं चूकेगी।
वार्ता के लिए तैयार, पंजाब की हां का इंतजार : मनोहर लाल
सीएम मनोहर लाल ने कहा है कि एसवाईएल पर वार्ता के लिए वे तैयार हैं। पंजाब की हां का इंतजार है। पूर्व समझौतों व सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार हरियाणा को उसके हिस्से का पानी जल्द मिलना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष इस मुद्दे को अनेक बार उठाया है।
एसवाईएल के पानी पर हरियाणा का अधिकार : सैलजा
हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने ट्वीट कर कहा है कि एसवाईएल के पानी पर हरियाणा का अधिकार है। हरियाणा को पानी मिलने में पहले ही काफी देरी हो चुकी है। अब इसमें विलंब नहीं किया जाना चाहिए। इस मुद्दे का जल्द से जल्द समाधान किया जाए।
पंजाब का राज्य की नदियों के पानी पर पहला अधिकार: जाखड़
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ ने एसवाईएल पर कहा कि रिपेरियन सिद्धांत के अनुसार पंजाब और इसके किसानों का राज्य के बीच से बहने वाली नदियों के पानी पर पहला अधिकार है। रिपेरियन सिद्धांत का कोई भी उल्लंघन न केवल कानून के खिलाफ होगा, बल्कि पंजाब के लोगों के साथ अन्याय भी होगा।
उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह बार-बार ब्यास और रावी नदियों में पंजाब की जल उपलब्धता का नए सिरे से आकलन करने को कहते रहे हैं। इस तरह के आकलन से जमीनी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, जो एसवाईएल मुद्दे पर पंजाब के रुख का समर्थन करेगी। पंजाब सरकार को इस मुद्दे पर बातचीत में कोई आपत्ति नहीं है, जैसा कि शीर्ष अदालत द्वारा निर्देशित किया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी चर्चा में जमीनी स्थिति को ध्यान में रखना होगा।
राजनीतिक इच्छा शक्ति दिखाएं कैप्टन : धनखड़
एसवाईएल मुद्दे का हल निकालने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री राजनीतिक इच्छा शक्ति दिखाएं। इस मामले में पंजाब दाता है और हरियाणा के किसानों को उसके हक का पानी चाहिए। इसलिए पंजाब का फर्ज बनता है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करे। - ओम प्रकाश धनखड़, हरियाणा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष