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नई वार्डबंदी पर सियासी घमासान: भाजपा-कांग्रेस समेत पार्षदों ने नगर काउंसिल में दर्ज कराए एतराज
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सुनाम ऊधम सिंह वाला।
सुनाम और लोंगोवाल में प्रस्तावित नई वार्डबंदी को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों और मौजूदा व पूर्व नगर पार्षदों ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए नगर काउंसिल के समक्ष लिखित एतराज दर्ज कराए हैं। रविवार को एतराज दाखिल करने की अंतिम तिथि के दिन भाजपा, कांग्रेस सहित करीब आधा दर्जन पार्षदों ने एक सुर में नई वार्डबंदी का विरोध किया।
एतराज में कहा गया है कि पिछली वार्डबंदी वर्ष 2015 में हुई थी और उसके बाद अब तक कोई नई जनगणना नहीं कराई गई। ऐसे में बिना ताजा जनसंख्या आंकड़ों के वार्डों का पुनर्गठन करना न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की भावना पर भी सवाल खड़े करता है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि इस तरह की वार्डबंदी से निष्पक्ष और समान प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा।
विरोध करने वालों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रस्तावित वार्डबंदी के पीछे चुनिंदा लोगों को राजनीतिक लाभ पहुंचाने की मंशा है, जो आम जनता के अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने मांग की कि वार्डबंदी की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और जनगणना के अद्यतन आंकड़ों के आधार पर ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए। एतराज़ जताने वालों में भाजपा की जिला अध्यक्ष दामन बाजवा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजिंदर दीपा, नगर पार्षद सुखबीर सिंह, सुनील आशु, पूर्व पार्षद घनश्याम कांसल और किशोर चंद प्रमुख रूप से शामिल हैं। संवाद
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सुनाम और लोंगोवाल में प्रस्तावित नई वार्डबंदी को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों और मौजूदा व पूर्व नगर पार्षदों ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए नगर काउंसिल के समक्ष लिखित एतराज दर्ज कराए हैं। रविवार को एतराज दाखिल करने की अंतिम तिथि के दिन भाजपा, कांग्रेस सहित करीब आधा दर्जन पार्षदों ने एक सुर में नई वार्डबंदी का विरोध किया।
एतराज में कहा गया है कि पिछली वार्डबंदी वर्ष 2015 में हुई थी और उसके बाद अब तक कोई नई जनगणना नहीं कराई गई। ऐसे में बिना ताजा जनसंख्या आंकड़ों के वार्डों का पुनर्गठन करना न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की भावना पर भी सवाल खड़े करता है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि इस तरह की वार्डबंदी से निष्पक्ष और समान प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा।
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विरोध करने वालों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रस्तावित वार्डबंदी के पीछे चुनिंदा लोगों को राजनीतिक लाभ पहुंचाने की मंशा है, जो आम जनता के अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने मांग की कि वार्डबंदी की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और जनगणना के अद्यतन आंकड़ों के आधार पर ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए। एतराज़ जताने वालों में भाजपा की जिला अध्यक्ष दामन बाजवा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजिंदर दीपा, नगर पार्षद सुखबीर सिंह, सुनील आशु, पूर्व पार्षद घनश्याम कांसल और किशोर चंद प्रमुख रूप से शामिल हैं। संवाद
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