फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Political equations in Punjab have changed after Decision to Repel Farm Laws

पंजाब में बदले सियासी समीकरण: कृषि कानूनों की वापसी के फैसले से भाजपा बन सकती है गेमचेंजर, 77 सीटों पर पड़ेगा प्रभाव

Sat, 20 Nov 2021 12:41 AM IST
निवेदिता वर्मा अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 20 Nov 2021 12:41 AM IST
सार

पंजाब में भाजपा के लिए तीनों कृषि कानूनों के कारण सियासी रास्ता काफी मुश्किल हो गया था। पार्टी नेताओं का सूबे के किसान लगातार विरोध कर रहे थे। किसान पार्टी के नेताओं के घर के बाहर डेरा डाले हुए थे।

विज्ञापन
Political equations in Punjab have changed after Decision to Repel Farm Laws
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुरु पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानूनों के वापसी के फैसले से पंजाब में सियासी समीकरण बदल गए हैं। 117 विधानसभा सीटों वाले सूबे में अब भारतीय जनता पार्टी गेमचेंजर की स्थिति में आ गई है। इसकी बड़ी वजह यह भी है कि खेती-किसानी करने वाली राज्य की 75 प्रतिशत आबादी का 77 विधानसभा सीटों में ज्यादा प्रभाव है। आने वाले चुनावों में सियासी जानकार इन सीटों पर भाजपा के बढ़ते फायदे को देख रहे हैं।

विज्ञापन


पंजाब में भाजपा के लिए तीनों कृषि कानूनों के कारण सियासी रास्ता काफी मुश्किल हो गया था। पार्टी नेताओं का सूबे के किसान लगातार विरोध कर रहे थे। किसान पार्टी के नेताओं के घर के बाहर डेरा डाले हुए थे। सड़कों पर निकले नेताओं को भी किसानों का विरोध झेलना पड़ रहा था। हाल ही में पंजाब में हुए निगम चुनाव में भी किसानों के विरोध के कारण पार्टी के सामने उम्मीदवारी का संकट खड़ा हो गया था। मजबूरी में पार्टी के द्वारा पदाधिकारियों को चुनाव मैदान में उतारना पड़ा था। ऐसे में अब कृषि कानूनों की वापसी का फैसला वापस लेना बेहद जरूरी हो गया था। 
विज्ञापन


करतारपुर कॉरिडोर खोलने के साथ ही पंजाब के अन्य मुद्दों को लेकर पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व लगातार पंजाब के नेताओं से फीडबैक ले रहा था। यहां तक कि दिल्ली में कई दौर की बैठकें भी हुईं। हाल ही में पंजाब के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिला और उन्हें पंजाब के बदलते सियासी समीकरणों की जानकारी दी। इसके बाद प्रधानमंत्री के कृषि कानूनों के वापसी के फैसले से पंजाब में सियासी समीकरण बदल गए हैं। सियासतदान इस फैसले से भाजपा को पंजाब में गेमचेंजर पार्टी के रूप में देख रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे समझे पंजाब का सियासी गणित
पंजाब में कुल 117 विधानसभा सीटें हैं। इनमें 91 शहरी और 26 ग्रामीण विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें 77 सीटें ऐसी हैं जिन पर किसानों का प्रभाव अधिक है। कृषि कानूनों के वापसी के फैसले से इन सीटों पर भाजपा को चुनाव में अन्य दलों की अपेक्षा ज्यादा फायदा मिल सकता है।

करतारपुर कॉरिडोर को भी भुनाएगी भाजपा
पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में केंद्र के फैसलों से पंजाब भाजपा के लिए चुनावी राह आसान हो रही है। आने वाले चुनाव में पार्टी के नेता और कार्यकर्ता कृषि कानूनों की वापसी के साथ ही करतारपुर कॉरिडोर खोले जाने के फैसले को भी चुनावी मुद्दा बनाएगी। सिख वर्ग में इससे पार्टी को बड़ा फायदा मिलेगा।


मालवा में सबसे अधिक किसान
पंजाब को तीन क्षेत्रों मालवा, माझा और दोआबा में बांटा गया है। सूबे के इन क्षेत्रों में सबसे अधिक मालवा क्षेत्र में 69 विधानसभा सीटें हैं। यहां सबसे अधिक किसानों का प्रभुत्व है। इससे पहले भी सरकार बनाने में हमेशा से यह क्षेत्र निर्णायक भूमिका निभाता है। 23 सीटों वाले माझा में अधिकतर सीटें अनुसूचित जाति बाहुल्य हैं। माझा में 25 सीटें हैं जहां सिख जनसंख्या अधिक है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed