एचसीएस पेपरलीकः पुलिस ने तीनों आरोपियों का दोबारा लिया रिमांड, कई बड़े राज से उठ सकता है पर्दा
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एचसीएस पेपर लीक मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों तेजिंदर बिश्नोई, सुशील भादू और सुभाष गोदारा को चार दिन की रिमांड अवधि खत्म होने पर एसआईटी ने बुधवार को उन्हें जिला अदालत में पेश किया। पुलिस ने कोर्ट में कहा कि आरोपी तेजिंदर बिश्नोई ने एचसीएस का पेपर 25 लाख रुपये में खरीदा था।
पेपर होने के चार दिन बाद उक्त अमाउंट में से सात लाख रुपये की ट्रांजेक्शन आरोपी तेजिंदर के बैंक खाते से आरोपी आयूषी के मामा सुशील भादू के बैंक खाते में हुई, लेकिन शेष रकम किन माध्यमों से किन-किन लोगों को दी गई, यह पता लगाने के लिए एसआईटी ने तीनों आरोपियों के पांच दिन के रिमांड की मांग की। लेकिन अदालत ने आरोपियों के तीन दिन के रिमांड की मंजूरी प्रदान की।
एसआईटी ने आरोपी सुशील भादू और सुभाष गोदारा का बीते शनिवार को अदालत से चार दिन और आरोपी तेजिंदर बिश्नोई का सोमवार को दो दिन का रिमांड हासिल किया था। हैरत की बात यह है कि आरोपी तेजिंदर बिश्नोई ने गिरफ्तारी के बाद पहली बार रिमांड मांगे जाने के दौरान कोर्ट में कहा था कि उसने पैसे पेपर के लिए नहीं बल्कि रिश्तेदारी होने के नाते दिए थे। लेकिन बुधवार को आरोपी तेजिंदर बिश्नोई के वकील ने कहा कि आरोपी सुशील भादू आरोपी आयुषी का मामा है, लेकिन उसके साथ तेजिंदर की कोई जानकारी नहीं है। वकील ने कहा कि तेजिंदर को इस कारण गिरफ्तार किया गया कि वह केवल आरोपी सुशील भादू को जानता था।
एसआईटी ने अन्य तीन आरोपियों की पहचान उजागर होने से किया इनकार
बीते समय अदालत से आरोपियों का रिमांड मांगे जाने के दौरान मामले में तीन अन्य लोगों के शामिल होने की जानकारी सार्वजनिक हुई थी, लेकिन यूटी पुलिस के उच्चाधिकारियों और एसआईटी ने अब इस बात से इनकार किया है। बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में किन्हीं भी अन्य तीन लोगों की पहचान सामने नहीं आई है। मामले में एसआईटी अब तक नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा यूटी पुलिस ने किसी अन्य आरोपी की पहचान उजागर होने से इनकार किया है।
यह है मामला
पिंजौर निवासी सुमन ने हाईकोर्ट में पिटीशन दायर कर कहा था कि एचसीएस ज्यूडिशियल का पेपर डेढ़ करोड़ में बिका। इसके लिए उन्हें भी पेशकश की गई थी। सुमन ने अपनी कोचिंग क्लास की एक साथी सुशीला से लेक्चर की ऑडियो क्लिप मंगाई थी, लेकिन उसने गलती से सुनीता से अपनी बातचीत की ऑडियो क्लिप सेंड कर दी। इसमें प्रश्न पत्र से संबंधित बातचीत रिकॉर्ड थी।
दायर पिटीशन पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अपने स्तर पर जांच में पाया कि हाईकोर्ट के ही रिक्रूटमेंट रजिस्ट्रार डॉ. बलविंदर शर्मा के मोबाइल नंबर से सुनीता के मोबाइल नंबर पर सालभर में 760 बार संपर्क हुआ। फिर परीक्षा में सुनीता ही टॉपर रही। आरोपी युवती सुशीला भी रिजर्व कैटेगरी की टॉपर बनी। आरोपी सुनीता की रुम मेट आयुषी भी मामले में शामिल थी। एसआईटी को जांच के दौरान पता लगा कि आरोपी आयुषी के पिता आरोपी सुभाष गोदारा, मामा सुशील भादू और तेजिंदर बिश्नोई भी शामिल है।