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विपक्ष की आवाज नहीं दबा सकती पुलिस : परगट
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विधायक खैहरा पर एफआईआर को लेकर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने उठाए सवाल, कहा- सरकारी आवासों के कथित उल्लंघन की भी हो जांच
परगट बोले- सरकारी संपत्ति के कथित अनधिकृत इस्तेमाल पर सवाल उठाना विपक्ष को चुप कराने का आधार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के खिलाफ आम आदमी पार्टी नेता गायत्री बिश्नोई की शिकायत पर एफआईआर दर्ज होने के बाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्ति के कथित अनधिकृत इस्तेमाल पर सवाल उठाना विपक्ष को चुप कराने का आधार नहीं बन सकता। परगट ने पंजाब के डीजीपी से मांग की कि सरकारी आवासों पर कथित रूप से नियमों के विपरीत कब्जे की भी जांच कराई जाए और उल्लंघन मिलने पर एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में खैरा के साथ खड़ी है।
परगट ने कहा कि पुलिस केस दर्ज कर कांग्रेस को सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाने से नहीं रोक सकती। उन्होंने एफआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के उस कानूनी दृष्टिकोण का भी हवाला दिया, जिसमें एफआईआर को सार्वजनिक दस्तावेज माना गया है, हालांकि उस पर कानूनी सुरक्षा और प्रक्रिया लागू होती है।
उधर, विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने एफआईआर को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि आप सरकार पुलिस का इस्तेमाल उनकी आवाज दबाने के लिए कर रही है। खैरा के अनुसार, उन्होंने चंडीगढ़ में सरकारी आवासों के कथित गलत इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए थे।
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परगट बोले- सरकारी संपत्ति के कथित अनधिकृत इस्तेमाल पर सवाल उठाना विपक्ष को चुप कराने का आधार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के खिलाफ आम आदमी पार्टी नेता गायत्री बिश्नोई की शिकायत पर एफआईआर दर्ज होने के बाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्ति के कथित अनधिकृत इस्तेमाल पर सवाल उठाना विपक्ष को चुप कराने का आधार नहीं बन सकता। परगट ने पंजाब के डीजीपी से मांग की कि सरकारी आवासों पर कथित रूप से नियमों के विपरीत कब्जे की भी जांच कराई जाए और उल्लंघन मिलने पर एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में खैरा के साथ खड़ी है।
परगट ने कहा कि पुलिस केस दर्ज कर कांग्रेस को सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाने से नहीं रोक सकती। उन्होंने एफआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के उस कानूनी दृष्टिकोण का भी हवाला दिया, जिसमें एफआईआर को सार्वजनिक दस्तावेज माना गया है, हालांकि उस पर कानूनी सुरक्षा और प्रक्रिया लागू होती है।
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उधर, विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने एफआईआर को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि आप सरकार पुलिस का इस्तेमाल उनकी आवाज दबाने के लिए कर रही है। खैरा के अनुसार, उन्होंने चंडीगढ़ में सरकारी आवासों के कथित गलत इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए थे।
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