फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Poet Conference: If you open the wings with a little it will touch the sky

कवि सम्मेलन ः जरा से पंख खोलोगे तो यह आकाश छू लेगी

Sat, 01 Feb 2020 02:06 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 01 Feb 2020 02:06 AM IST
विज्ञापन
Poet Conference: If you open the wings with a little it will touch the sky
चंडीगढ़। इसे बेटा बना पा लो तो ये इतिहास छू लेगी.. जरा से पंख खोलोगे तो यह आकाश छू लेगी..। प्रसिद्ध कवि अनिल अग्रवंशी ने जैसे ही यह कविता पेश की तो श्रोताओं के तालियों की गड़गड़ाहट से बाल भवन का ऑडिटोरियम गूंज उठा। मौका था टीएफटी विंटर थियेटर फेस्टिवल के दौरान शुक्रवार को आयोजित कवि सम्मेलन का। इस सम्मेलन में कई नामी कवियों ने शिरकत की।
विज्ञापन

इस मौके पर अनिल अग्रवंशी ने दूसरी रचना मीरा की अमर भक्ति जहर से मर नहीं सकती, ये झांसी वाली रानी है किसी से डर नहीं सकती.. सुनाई तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। कवि सम्मेलन के दौरान कई कवियों ने शाहीन बाग को केंद्रित करते हुए कविताएं सुनाईं। इसमें कमलेश मौर्या ने अपनी खास रचना सुनाई ‘दूसरों के कंधों पर बंदूक रखकर दाग रहे हैं विपक्षी, डालते घी आग में, अब तक आस्तीनों में जिन्हें था पाला, उन्हें वही नाग फुफकार रहे हैं शाहीन बाग में, नागपंचमी मनाने वाले दिन लद गए, मत रखना गलतफहमी दिमाग में, नाग यज्ञ की परंपरा जो दोहराई गई तो रह जाओगे मियां नहीं किसी राग में’। उन्होंने अपनी दूसरी कविता सुनाई ‘अब न लंबू से न बौना से डर लगता है, न किसी जादू न टोना से डर लगता है, न जाने कब, कहां, किसी को चपेट में ले ले चाइनीज वायरस कोरोना से डर लगता है’। इस दौरान बारंबंकी से आए संजय सांवरा ने सुनाया ‘भाव रस छंद और व्याकरण छू लिए, सब कथानक सभी उद्धरण छू लिए, जग ने पूछा बुलंदी छूई है कोई, बढ़कर मां के चरण छू लिए’। इसके बाद उन्होंने सुनाया ‘इक तेरे वास्ते दुनिया को भुला रखा है, हमने यह दरवाजा खुला रखा है, भले ही रात अमावस की मगर डरना क्या, तुम चले आओ हमने दिन को जला रखा है’।
विज्ञापन

इस मौके पर प्रसिद्ध कवि शिव कुमार व्यास ने सुनाया ‘वीर बलदानियों की जुबानी लिखो, देश की दुर्दशा की कहानी लिखो, जब लिखो तब किसी पर मुरव्वत नहीं, दूध का दूध पानी का पानी लिखो’ सुनाकर श्रोताओं में वीर रस का संचार कर दिया। राजेश चेतन ने ‘दाढ़ी टोपी की आबादी शाहीन बाग, मन में रेशम, तन पर खादी शाहीन बाग, बहन बेटियों के पीछे छिप घात करें, सोचे भारत की बर्बादी शाहीन बाग’ सुनाया। इस मौके पर टीएफटी के सुदेश शर्मा और अन्य गणमान्य व्यक्ति यहां मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed