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चीनी सामान का बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाने का कविता से दिया संदेश
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चंडीगढ़। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा ‘स्वदेशी अपनाओ’ विषय पर ‘तृतीय ई-कवि सम्मेलन’ का गूगल मीट के माध्यम से आयोजन किया गया। जागरूकता लाने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम में दस जाने-माने कवियों और साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से सभी को यही संदेश दिया कि हम जितना ज्यादा हो सके देश में बनी हुई चीजों का ही इस्तेमाल करें।
केंद्र के निदेशक प्रोफेसर व सौभाग्य वर्द्धन ने बताया कि महीने के हर दूसरे रविवार को वरिष्ठ साहित्यकारों के लिए अलग-अलग विषयों पर ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। इस बार की काव्य गोष्ठी का विषय ‘स्वदेशी अपनाओ’ पर रही। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सरिता मेहता ने की और इस कार्यक्रम का संचालन नीलम त्रिखा ने किया। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले कवियों और साहित्यकारों में गायत्री कौशल, अलका शर्मा , जसविंदर शर्मा, आदिति राणा, शीनू वालिया रेनू अब्बी, अश्विनी कुमार भीम, कृष्णा कुमारी आर्य, नीलम त्रिखा व डॉ. सरिता मेहता शामिल रहीं। डॉ. सरिता मेहता ने अपनी रचना के अपनी रचना पेश करते हुए कहा कि मेरा भारत मेरा प्यारा वतन, मेरे मन मंदिर में जो बसता है..। अपने देशवासियों को स्वदेशी अपनाओं का संदेश देते हुए नीलम त्रिखा ने अपनी रचना सीमा पर वीर सैनिकों ने दिया अपना बलिदान है, चीनी सामान का अब हमने करना बहिष्कार है..., गायत्री कौशल ने ‘छोड़कर विदेशी स्वदेशी अपना लो तुम’, अलका शर्मा बॉस ने ‘एक सपना देखा है मैंने भारत में क्रांति आए.. सुनाया। सभी रचनाकारों की रचनाएं बहुत ही जागरूकता भरा संदेश देने वाली थी।
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केंद्र के निदेशक प्रोफेसर व सौभाग्य वर्द्धन ने बताया कि महीने के हर दूसरे रविवार को वरिष्ठ साहित्यकारों के लिए अलग-अलग विषयों पर ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। इस बार की काव्य गोष्ठी का विषय ‘स्वदेशी अपनाओ’ पर रही। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सरिता मेहता ने की और इस कार्यक्रम का संचालन नीलम त्रिखा ने किया। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले कवियों और साहित्यकारों में गायत्री कौशल, अलका शर्मा , जसविंदर शर्मा, आदिति राणा, शीनू वालिया रेनू अब्बी, अश्विनी कुमार भीम, कृष्णा कुमारी आर्य, नीलम त्रिखा व डॉ. सरिता मेहता शामिल रहीं। डॉ. सरिता मेहता ने अपनी रचना के अपनी रचना पेश करते हुए कहा कि मेरा भारत मेरा प्यारा वतन, मेरे मन मंदिर में जो बसता है..। अपने देशवासियों को स्वदेशी अपनाओं का संदेश देते हुए नीलम त्रिखा ने अपनी रचना सीमा पर वीर सैनिकों ने दिया अपना बलिदान है, चीनी सामान का अब हमने करना बहिष्कार है..., गायत्री कौशल ने ‘छोड़कर विदेशी स्वदेशी अपना लो तुम’, अलका शर्मा बॉस ने ‘एक सपना देखा है मैंने भारत में क्रांति आए.. सुनाया। सभी रचनाकारों की रचनाएं बहुत ही जागरूकता भरा संदेश देने वाली थी।
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