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शोक में बदला शौक, 27 साल की मेहनत पल में रद्दी

Wed, 07 Dec 2016 04:12 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 07 Dec 2016 04:12 PM IST
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pm narendra modi noteban decision, big shock to people fond of to collect 786 number special note
786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
786 नंबरों के नोट जुटाने में 27 साल मेहनत की, वो एक फैसले से रद्दी हो गए। सेक्टर-50 के नरिंदर पाल सिंह 1989 से 786 नंबर के नोट जमा कर रहे हैं। उनके पास इन नोटों की ढेरों कलेक्शन हैं।
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786 नंबर वाले करीब साढ़े 14 लाख रुपए के नोट वे जमा कर चुके हैं। लेकिन इस रिकॉर्ड में से साढ़े 3 लाख रुपए की करंसी अब उनके लिए किसी काम की नहीं रही। नरिंदर पाल के पास साढ़े 3 लाख रुपए के 500-1000 के नोट हैं, जिन्हें अब उन्हें बैंक में जमा करवाने के अलावा कोई और ऑप्शन ही नहीं बचा।
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उनके पास 786 नंबर वाले 500 रुपए के 400 से ज्यादा नोट हैं, जबकि 1000 के उनके पास 130 नोट। नरिंदर पाल ने बताया कि अब नए रिकॉर्ड की शुरुआत भी कर दी है। 2000 रुपए का 786 नंबर वाला नोट हासिल कर लिया है।
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बैंक में थे तब लगा नोट जमा करने का चस्का

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786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
पंजाब स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक से रिटायर नरिंदर पाल ने बताया कि बैंक में काम करते-करते उन्हें ये शौक पड़ा था। उनके पास कई लोग 786 नंबर वाले नोट मांगने आते थे। फिर उन्हें भी शौक पड़ा और उन्होंने कलेक्शन शुरू कर दी। 2001 में पहली बार उनके रिकॉर्ड को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह मिली। फिर उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में आया।

एक रुपए के लिए दी पार्टी
नरिंदर ने बताया कि एक बार तो 1 रुपए का 786 नंबर वाला नोट हासिल करने के लिए उन्हें चाय-समोसों की पार्टी करनी पड़ी। उन्हें किसी से पता लगा कि एक आदमी के पास 786 नंबर वाला 1 रुपए का नोट है, उसने शर्त रखी कि वह तभी नोट देगा, जब उन्हें और उनके दोस्तों को चाय-समोसे की पार्टी करवाएंगे। ये बात 1998 की है। उस एक रुपए के लिए उन्हें 100 रुपए की पार्टी करनी पड़ी।

786 अंकों के नोटों को जमा करवाएंगे विनोद सिंह

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बैंक खाते में राशि
लुधियाना में हीरो डी.एम.सी. हार्ट इंस्टीच्यूट में बिलिंग सुपरवाइजर के पद पर काम कर रहे विनोद सिंह नेगी को 500 व 1 हजार के नोट बंद करने की घोषणा मानो बिजली के झटके की तरह लगी हो। क्योंकि कई वर्षों से उसने 500 व 1000 रुपए के नोट जिनकी सीरीज के आखिर में 786 छपा था, एकत्रित किए थे।

उसके इस शौक में उसके दोस्तों ने भी मदद की, जिसके चलते उसके पास 1000 के 68 व 500 रुपए के 91 नोट (कुल रकम 1 लाख 13 हजार) जमा हो चुके थे, को बैंक में जमा करवाने का फैसला किया।

उसने बताया कि संयोग से उसके पी.एन.बी. बैंक खाते के आखिरी 3 अंक भी 786 ही हैं। विनोद ने कहा कि यह घोषणा उनके लिए एक झटका ही सही परंतु वह दोबारा 2000 रुपए व 500 रुपए के नए नोटों की 786 की कलैक्शन करेगा। 

15 सालों में 786 के 1000 नोट जमा किए, अब बेकार

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धन
लुधियाना में श्रीसाईं फाइनेंस कंपनी के मालिक करण वालिया को 786 नंबर वाले 500 और 1000 के नोट एकत्र करने का शौक था। इसके चलते वालिया को जब भी कहीं से 786 नंबर वाला नोट मिलता था, तो वह उसे अपने ही रख लेते थे। इस तरह वह पिछले करीब पंद्रह वर्षों से 500 और 1000 के नोट एकत्र कर साढ़े तीन लाख रुपए जमा कर चुके हैं।

लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 500 और 1000 रुपए के नोट बंद होने की घोषणा के चलते वालिया को 786 नंबर के साढ़े तीन लाख रुपए बैंक में जमा करवाने पड़ेंगे। वहीं, नए नोट जरूरत मुताबिक मिलने से खुदरा बाजारों में काम खुदरा बाजारों में जरूरत मुताबिक नए नोट उपलब्ध होने की वजह से कारोबार बिलकुल ठप रहा।

करियाना यूनियन के प्रधान एबंत जैन ने बताया कि जरूरत मुताबिक खुदरा बाजार में नए नोट होने की वजह से कारोबार बिलकुल ठप हो गया है, क्योंकि माल खरीदने और बेचने के लिए जरूरत मुताबिक खुदरा बाजार में नए नोट उपलब्ध नहीं हैं। बाहर से मंगवाए गए माल का किराया देने के लिए भी व्यापारियों के पास नए नोट उपलब्ध नहीं है।

दुख हुआ, लेकिन नरेंद्र अब स्पेशल नंबर के नोट जमा करेंगे

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रुपया - फोटो : demo pic
सनसिटी रोहतक निवासी नरेंद्र छिल्लर 2006 से 786 नंबर वाले 50, 100, 500 1000 के नोट जमा कर रहे हैं। अब 500 1000 के नोट बंद होने के बाद उन्हें बड़ा झटका लगा।

शुभ मानते हुए 10 वर्ष में उन्होंने 786 नंबर वाले 500 1000 के 40 नोट जमा किए थे। जरूरत के समय भी उन्हें खर्च नहीं किया था, लेकिन मोदी सरकार के फैसले के बाद उनकी 10 वर्ष की मेहनत पर पानी फिर गया।

नोटबंदी के बाद अब उन्होंने केवल 500 रुपए का एक नोट अपने पास रखकर बाकी सभी बैंक में जमा करवा दिए। उन्होंने कहा कि दुख तो बहुत हुआ, लेकिन अब 500 2000 रुपए के स्पेशल नंबर के नए नोट जमा करेंगे।

 

बड़े प्यार से संभाले थे, अब दिन में दो बार​ गिनते हैं

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786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
500 और 1000 रुपए के नोटों को बंद करने की घोषणा के बाद करनाल के करीब 26 वर्षीय विष्णु को बड़ा झटका लगा। उन्होंने जब से पढ़ाई के बाद कामकाज करना शुरू किया।

तभी से विष्णु ने यह 786 नंबर लिखे नोटों को इकट्ठा करना शुरू किया, क्योंकि विष्णु को 500 के हरे पीले रंग और 1000 रुपए के पिंक रंग के यह पुराने नोट काफी पसंद थे। बरसों बीते, शौक बढ़ता चला गया और अब वही शौक चिंता में बदल गया, क्योंकि वो नोट अब चलने बंद हो गए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी व केंद्र सरकार द्वारा 500 व 1000 रुपए के इन नोटों को बंद करने की घोषणा के बाद बाद से विष्णु मायूस हो गया है। हालांकि अभी इन्हें अपने पास बड़े प्यार से संभाले हुए है। सोच रहा है कि वह इनका क्या करे और इसी के चलते रोजाना दिन में 2 बार इनकी गिनती करता है फिर रख देता है।
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