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कैसे आया 'पिंक' का आइडिया, अनिरुद्ध चौधरी ने खोले मूवी के सीक्रेट्स

Sun, 13 Nov 2016 06:03 PM IST
शबनम कौर/अमर उजाला, चंडीगढ़
शबनम कौर/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 13 Nov 2016 06:03 PM IST
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pink movie director anirudh rai chaudhary special interview, exposed many secrets
चंडीगढ़ में पिंक मूवी के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर
'पिंक' बनाने का आइडिया कैसे आया? मूवी के डायरेक्टर अनिरुद्ध चौधरी चंडीगढ़ आए तो यहां उन्होंने पत्रकारों के सामने कई राज उजागर किए।  ‘पहले तो पिंक फिल्म को बांग्ला भाषा में बनाने की योजना थी। कहानी को लेकर जब में प्रोड्यूसर शूजीत सरकार से बात की तो उन्होंने कहा कि यह कहानी हिंदी में ही चलेगी, इसलिए हमें फिल्म को हिंदी में ही बनाना चाहिए और इसकी शूटिंग भी दिल्ली में की जानी चाहिए।’
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फिल्म निर्देशक अनिरुद्ध चौधरी ने पिंक के निर्माण से संबंधित कई बातें अमर उजाला से साझा की। उन्होंने बताया कि इस तरह वे बंगाली फिल्म इंडस्ट्री से बॉलीवुड में आए। उन्होंने बताया कि ‘पिंक को बनाने में चार साल का समय लगा। शूटिंग के दौरान कई वकीलों को बुलाया जाता ताकि कोर्ट के नियमों का उल्लंघन न हो। दूसरा इस फिल्म को हम रीयल बनाना चाहते थे, इसलिए हमने ऐसी कास्ट को चुना जो इसमें फिट बैठ सके।
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जब स्टार कास्ट से आइडिया के बारे में बात की तो तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हाड़ी और आंद्रेया ने कहा कि ऐेसी परिस्थितियों से वे रोजाना जूझती हैं। इसलिए उनको यह कैरेक्टर निभाने में कोई मुश्किल नहीं आई। इसमें उन्होंने एक्टिंग नहीं बल्कि कैरेक्टर को जिया है।’ इस फिल्म के बाद क्या लोगों की औरतों प्रति मानसिकता बदलेगी?
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इस सवाल के जवाब में अनिरुद्ध ने कहा ‘हमने अपनी ओर से राह दिखाने की कोशिश की है, यह लोगों पर निर्भर करता है कि वह इससे कितने प्रभावित होते हैं और अपने जीवन में लागू करते हैं।’

स्क्रीन प्ले को लेकर खुलकर बोले अनिरुद्ध

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चंडीगढ़ में पिंक मूवी के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर
स्क्रीन प्ले पर बात करते हुए निर्देशक ने बताया, ’मैंने कई लेखकों से फिल्म का स्क्रीन प्ले लिखने की बात की, लेकिन ज्यादातर ने यह कहकर मना कर दिया कि इसमें नया क्या है? यह तो जिंदगी की आम बातें हैं । यह तो रोजाना घटित होता है। फिर मैं बीए पास, डीडे और कहानी जैसी फिल्मों के स्क्रीनराइटर रितेश शाह से मिला।

जिनकी बदौलत यह फिल्म बन पाई।’ फिल्म के उद्देश्य पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि बिना कंसेट के कुछ नहीं किया जा सकता। हमारे क्या किसी के पास एक औरत को अपमानित करने का अधिकार नहीं है। चाहे कोई सेक्स वर्कर हो या कोई पत्नी हो या फिर कोई गर्ल फ्रेंड, सबको न कहने का हक है, कंसेंट के बिना कोई कुछ नहीं कर सकता।

ऐसे आया आइडिया
फिल्म के आइडिया के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया - ‘मैं कोलकाता में रहता था। वहां मेरे पड़ोस में एक लड़की पीजी में रहती थी। उसने मुझे कहा कि किसी दिन हम मिलते हैं और ड्रिंक करेंगे। लेकिन उस समय मैंने उसे मना कर दिया।

एक दिन मेरे घर पर एक पड़ोसी आए और कहने लगे कि उस लड़की के घर में हर रोज कोई न कोई शराब पीने आता है। यह लड़की सही नहीं है। मुझे यह बात बहुत गलत लगी कि ऐसे कैसे कोई किसी लड़की की निजी जिंदगी के बारे में बात कर सकता है। यह उसकी जिंदगी है कुछ भी करे। यहीं से मुझे आइडिया आया और इस पर रिसर्च  करनी शुरू की।’
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