{"_id":"694b0624ff69878f97092074","slug":"pgis-multi-level-parking-stalled-due-to-environmental-clearance-chandigarh-news-c-16-pkl1079-904402-2025-12-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: पर्यावरण क्लीयरेंस में अटक गई पीजीआई की मल्टी लेवल पार्किंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: पर्यावरण क्लीयरेंस में अटक गई पीजीआई की मल्टी लेवल पार्किंग
विज्ञापन
चंडीगढ़। पीजीआई में बनने वाली मल्टी लेवल पार्किंग अब पर्यावरण क्लीयरेंस में अटक गई है। पीजीआई को पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए दो नोटिस भेजे जा चुके हैं पर अब तक एक का भी जवाब नहीं आया है।
चंडीगढ़ पाॅल्यूशन कंट्रोल कमेटी द्वारा पीजीआई को भेजे गए दो नोटिस में पीजीआई से पूछा गया है कि मल्टी लेवल पार्किंग का एरिया बीस हजार स्क्वेयर मीटर से ज्यादा है तो पर्यावरण क्लीयरेंस क्यों नहीं ली गई। यह भी पूछा गया है कि मल्टी लेवल पार्किंग बनाने पर पर्यावरण के किन किन मानकों का पालन किया जा रहा है। इन नोटिस के बाद मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण कार्य भी रोक दिया गया है।
चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के एक अधिकारी के अनुसार बीस हजार स्क्वेयर मीटर से ज्यादा एरिया में यदि कंस्ट्रक्शन होता है तो उसके लिए पर्यावरण क्लीयरेंस कंसेंट टू इस्टेबलिश लेना आवश्यक है। पीजीआई में बनाई जाने वाली सात मंजिल और एक अंडर ग्राउंड वाली पार्किंग का एरिया करीब 26 हजार स्क्वैयर मीटर बताया जाता है। सीपीसीसी द्वारा इस मामले में स्पष्टीकरण देने को कहा गया निर्माण के पहले क्यों आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई।
विज्ञापन
63 करोड़ रुपये का है प्रोजेक्ट
पीजीआई द्वारा पर्यावरण क्लीयरेंस न लेने के कारण सिर्फ प्रोजेक्ट ही लेट नहीं हो रहा है बल्कि इसकी कास्ट भी बढ़ रही है। एक इंजीनियर के अनुसार इस प्रोजेक्ट को मंजूरी तीन साल पहले मिली थी। उस समय इसका बजट 63 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था। जिस प्रकार से रेट्स में बढ़ोतरी हो रही है उससे दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसकी वजह से प्रोजेक्ट की कास्ट भी बढ़ना तय है।
पीजीआई में आती हैं 14000 से ज्यादा कार
पीजीआई में करीब चार हजार कारों की पार्किंग की जगह है जबकि रोजाना पीजीआई में करीब चौदह हजार से ज्यादा कारें आती हैं। मल्टीलेवल पार्किंग के बनने से 680 वाहन तो इसी पार्किंग में पार्क हो सकेंगी जिससे काफी ज्यादा राहत मिल जाएगी। पार्किंग न होने के कारण हालात यह है कि लोगों को वाहनों को बाहर या सेक्टर-11 की मार्केट में पार्क कर आना पड़ता है।
विज्ञापन
चंडीगढ़ पाॅल्यूशन कंट्रोल कमेटी द्वारा पीजीआई को भेजे गए दो नोटिस में पीजीआई से पूछा गया है कि मल्टी लेवल पार्किंग का एरिया बीस हजार स्क्वेयर मीटर से ज्यादा है तो पर्यावरण क्लीयरेंस क्यों नहीं ली गई। यह भी पूछा गया है कि मल्टी लेवल पार्किंग बनाने पर पर्यावरण के किन किन मानकों का पालन किया जा रहा है। इन नोटिस के बाद मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण कार्य भी रोक दिया गया है।
विज्ञापन
चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के एक अधिकारी के अनुसार बीस हजार स्क्वेयर मीटर से ज्यादा एरिया में यदि कंस्ट्रक्शन होता है तो उसके लिए पर्यावरण क्लीयरेंस कंसेंट टू इस्टेबलिश लेना आवश्यक है। पीजीआई में बनाई जाने वाली सात मंजिल और एक अंडर ग्राउंड वाली पार्किंग का एरिया करीब 26 हजार स्क्वैयर मीटर बताया जाता है। सीपीसीसी द्वारा इस मामले में स्पष्टीकरण देने को कहा गया निर्माण के पहले क्यों आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई।
विज्ञापन
63 करोड़ रुपये का है प्रोजेक्ट
पीजीआई द्वारा पर्यावरण क्लीयरेंस न लेने के कारण सिर्फ प्रोजेक्ट ही लेट नहीं हो रहा है बल्कि इसकी कास्ट भी बढ़ रही है। एक इंजीनियर के अनुसार इस प्रोजेक्ट को मंजूरी तीन साल पहले मिली थी। उस समय इसका बजट 63 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था। जिस प्रकार से रेट्स में बढ़ोतरी हो रही है उससे दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसकी वजह से प्रोजेक्ट की कास्ट भी बढ़ना तय है।
पीजीआई में आती हैं 14000 से ज्यादा कार
पीजीआई में करीब चार हजार कारों की पार्किंग की जगह है जबकि रोजाना पीजीआई में करीब चौदह हजार से ज्यादा कारें आती हैं। मल्टीलेवल पार्किंग के बनने से 680 वाहन तो इसी पार्किंग में पार्क हो सकेंगी जिससे काफी ज्यादा राहत मिल जाएगी। पार्किंग न होने के कारण हालात यह है कि लोगों को वाहनों को बाहर या सेक्टर-11 की मार्केट में पार्क कर आना पड़ता है।