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Chandigarh News: पीजीआई अब ट्रायल की नहीं अपनी मशीन से करेगा लेजर ट्रीटमेंट

Tue, 25 Apr 2023 02:42 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 25 Apr 2023 02:42 AM IST
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PGI will now do laser treatment with its machine instead of trial
चंडीगढ़। पित्त की थैली (गॉल ब्लैडर) में स्टोन होने पर तो सामान्य तौर पर सर्जरी कर दी जाती है, लेकिन जब स्टोन गॉल ब्लैडर की नली में फंस जाए तो उसे निकालना मुश्किल होता है। पीजीआई के विशेषज्ञ ऐसे मरीजों का भी लेजर से इलाज कर रहे हैं। हेपेटोलाजी विभाग में महीनेभर में ऐसे तीन से चार रेफर मरीजों की लेजर तकनीक से इलाज कर जान बचाई जा रही है। अच्छी बात यह है कि विभाग के डाॅक्टर लेजर मशीन उपलब्ध न होने के बावजूद कंपनी से ट्रायल के लिए मिली मशीन से मरीजों का इलाज कर रहे हैं। हालांकि पीजीआई प्रशासन ने ट्रायल की सफलता के बाद लेजर मशीन की खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हेपेटोलाजी विभाग के डॉ. सजह राठी ने बताया कि पित्त की थैली की नली में स्टोन का फंसना घातक स्थिति होती है। सामान्य तौर पर स्टोन के इलाज के लिए एन्डोस्कोपिक रेट्रोग्रैड कोलैंगियोपैरेग्रोफी तकनीक का प्रयोग किया जाता है। लेकिन नली में फंसे स्टोन को बिना तोड़े निकालना मुश्किल होता है। इसलिए उसे लेजर से तोड़ते हैं। फिर लेप्रोस्कोपी से गॉल ब्लैडर निकालते हैं जबकि एक साथ स्टोन और गॉल ब्लैडर निकालने के लिए पेट की ओपेन सर्जरी करनी पड़ती है। इस प्रक्रिया से की गई सर्जरी में मरीज की रिकवरी में काफी समय लगता है जबकि लेजर की प्रक्रिया में सुरक्षित तरीके से बेहतर परिणाम प्राप्त किया जा सकता है।
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इनसेट-
ऐसे होता है पथरी
पित्त में पथरी तब होती है जब उसमें कोलेस्ट्रॉल इक्ठ्ठा होने लगता है। ऐसा होने पर कोलेस्ट्रॉल एक जगह होने की वजह से सख्त हो जाता है और यह छोटे-छोटे पत्थरों का रूप ले लेता है। अगर शुरूआती समय पर इसमें ध्यान नहीं दिया जाए तो पथरी का आकार बढ़ने लगता है और अंत में पथरी के लिए सर्जरी करवाना ही विकल्प बचता है।
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इनसेट-
ये हो सकते हैं कारण
मधुमेह

मोटापा

गर्भधारण

मोटापे की सर्जरी के बाद

कुछ दवाओं का सेवन

लंबे समय से किसी बीमारी के ग्रस्त होने के कारण
इनसेट-
लक्षणों पर करें गौर
बदहजमी, खट्टी डकार, उल्टी, बहुत ज़्यादा पसीना आना, पेट फुलाना, एसिडिटी, पेट में भारीपन

कोट- मरीजों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए विभाग रिसर्च के साथ इनडोर पर भी फोकस कर रहा है। विशेषज्ञों की टीम के साथ ही आधुनिक उपकरणों का प्रयोग कर इलाज की तकनीक में लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं।
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प्रो. अजय दुसेजा, पीजीआई हेपेटॉलजी विभाग के प्रमुख
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