फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   PGI staff ban on collecting patient care from employees

पीजीआई स्टाफ कर्मचारियों से पेशेंट केयर वसूलने पर रोक

Fri, 22 Nov 2019 02:03 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 22 Nov 2019 02:03 AM IST
विज्ञापन
PGI staff ban on collecting patient care from employees
चंडीगढ़। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने पीजीआई के नॉन फैकल्टी स्टाफ से पेशेंट केयर एलाउंस वसूलने पर रोक लगा दी है। इससे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। इसी साल सितंबर के महीने में पीजीआई ने निर्देश जारी किए थे कि जो कर्मचारी छुट्टी पर जाते हैं, उन्हें पेशेंट केयर एलाउंस नहीं मिलेगा। साथ ही साल 2017 से अक्तूबर 2019 के दौरान छुट्टी के वक्त जिन लोगों को पेशेंट केयर एलाउंस दिया गया था, उनसे वापस लिया जाएगा। आर्डर के बाद अक्तूबर में जो लोग छुट्टी पर थे, उनका पेशेंट केयर एलाउंस बंद कर दिया गया। साथ ही उनसे दो साल का पेशेंट केयर एलाउंस वसूलने की तैयारी भी शुरू कर दी गई। इस मुद्दे पर पीजीआई कर्मचारी यूनियन ने कैट में गुहार लगाई। कैट में सुनवाई हुई तो तत्काल पेशेंट केयर एलाउंस के वसूलने पर रोक लगा दी गई। साथ ही पीजीआई और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस जारी कर 9 दिसंबर तक जवाब देने को कहा है। अब इस मामले की सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।
विज्ञापन

पीजीआई कर्मचारी यूनियन के प्रधान अश्विनी मुंजाल का कहना है कि पीजीआई में करीब छह हजार कर्मचारी हैं, जिन्हें पेशेंट केयर एलाउंस मिलता है। पेशेंट केयर एलाउंस पीजीआई में काम करने वाले हर उस कर्मचारी का हक है, जो जोखिम में रहकर काम करता है। गंभीर मरीजों के संपर्क में रहने वाले कर्मचारियों को कभी भी संक्रमित बीमारियां हो सकती हैं। पीजीआई का तर्क था कि जो लोग मातृत्व अवकाश लेकर जाते हैं या किसी अन्य तरह की छुट्टी पर जाते हैं तो उन्हें पेशेंट केयर एलाउंस क्यों दिया जाए। छुट्टी के दौरान कर्मचारी को किस तरह का जोखिम। इस पर यूनियन प्रधान अश्विनी मुंजाल का कहना है कि मान लीजिए कि किसी स्टाफ कर्मचारी को संक्रमण हो गया तो और उसका लंबा इलाज चला तो क्या उसे पेशेंट केयर एलाउंस नहीं दिया जाएगा। संक्रमण तो उसे पीजीआई में ही हुआ है। यह कोई तर्क नहीं है। उन्होंने बताया कि इस बारे में साल 2001 एक से लड़ाई चल रही है। इस तर्क के बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी मान गया था। फिर क्यों स्टाफ को परेशान किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed