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चंडीगढ़ पीजीआई की लापरवाही, शाम 6 बजे के बाद कोरोना पॉजिटिव मरीजों को भर्ती नहीं कर रहा
Wed, 29 Apr 2020 01:24 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
वीणा तिवारी, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Apr 2020 01:24 PM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
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चंडीगढ़ को कोरोना का गढ़ बनने से रोकने के लिए प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर पीजीआई को मुख्य सेंटर बनाया है, लेकिन पीजीआई में शाम के बाद पॉजिटिव मरीजों को भर्ती न किए जाने से व्यवस्था जस की तस है। ऐसे में जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 में अब भी पॉजिटिव मरीजों को भर्ती रखना पड़ रहा है।
पॉजिटिव मरीजों से संक्रमण रोकने की पूरी योजना धराशाई हो रही है और तीनों अस्पतालों के डॉक्टर और स्टाफ कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में सीधे तौर पर आ रहे हैं। ऐसे में जीएमसीएच-32 से लगातार पॉजिटिव मरीजों के बढ़ने से डॉक्टरों और स्टाफ में डर बढ़ गया है। दोनों अस्पतालों के स्टाफ का कहना है कि प्रशासन के आदेश के बावजूद पॉजिटिव मरीजों को पीजीआई में शाम के बाद भर्ती नहीं किया जा रहा, जिससे उनके यहां संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है।
बता दें कि कोरोना के संदिग्ध मरीजों की जांच रिपोर्ट आते-आते शाम हो जाती है। पीजीआई और जीएमसीएच-32 में 24 घंटे टेस्ट होने के कारण लगातार रिपोर्ट आती रहती है। ऐसे में दोपहर तक जितने मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, उन्हें पीजीआई में भर्ती कर लिया जाता है लेकिन शाम 6 बजे के बाद आने वाले मामलों को पीजीआई नहीं भेजा जाता। ऐसे में उन्हें आइसोलेशन वार्ड में ही अन्य संदिग्ध मरीजों के बीच अगले दिन तक रखा जा रहा है। इससे बाकी के मरीजों और अस्पताल स्टाफ में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
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एक जगह रखने हैं पॉजिटिव मरीज ताकि न फैले संक्रमण
शुरुआती दौर में चंडीगढ़ में पीजीआई, जीएमएसएच और जीएमसीएच तीनों में पॉजिटिव केस रखे जाते थे लेकिन विशेषज्ञों से मिले सुझाव के बाद प्रशासन ने पॉजिटिव मरीजों के लिए पीजीआई में अलग से व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इसके बाद नेहरू एक्सटेंशन को कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल का नाम देकर वहां सिर्फ कोरोना पॉजिटिव मरीजों को रखने की व्यवस्था की गई। इस आदेश का पीजीआई रेजिडेंट्स डॉक्टर एसोसिएशन ने पुरजोर विरोध भी किया था लेकिन आदेश को वापस नहीं लिया गया।
इमरजेंसी में मरीजों को रात में भी शिफ्ट किया जाता है लेकिन सामान्य तौर पर शाम के बाद पॉजिटिव केस भर्ती नहीं किए जा रहे। क्योंकि भर्ती मरीजों को शिफ्ट करने के लिए प्रॉपर व्यवस्था करने में काफी समय लगता है। इस पर दोनों अस्पतालों के साथ वार्ता कर सहमति ली जा चुकी है।
- डॉ. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता
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पॉजिटिव मरीजों से संक्रमण रोकने की पूरी योजना धराशाई हो रही है और तीनों अस्पतालों के डॉक्टर और स्टाफ कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में सीधे तौर पर आ रहे हैं। ऐसे में जीएमसीएच-32 से लगातार पॉजिटिव मरीजों के बढ़ने से डॉक्टरों और स्टाफ में डर बढ़ गया है। दोनों अस्पतालों के स्टाफ का कहना है कि प्रशासन के आदेश के बावजूद पॉजिटिव मरीजों को पीजीआई में शाम के बाद भर्ती नहीं किया जा रहा, जिससे उनके यहां संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है।
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बता दें कि कोरोना के संदिग्ध मरीजों की जांच रिपोर्ट आते-आते शाम हो जाती है। पीजीआई और जीएमसीएच-32 में 24 घंटे टेस्ट होने के कारण लगातार रिपोर्ट आती रहती है। ऐसे में दोपहर तक जितने मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, उन्हें पीजीआई में भर्ती कर लिया जाता है लेकिन शाम 6 बजे के बाद आने वाले मामलों को पीजीआई नहीं भेजा जाता। ऐसे में उन्हें आइसोलेशन वार्ड में ही अन्य संदिग्ध मरीजों के बीच अगले दिन तक रखा जा रहा है। इससे बाकी के मरीजों और अस्पताल स्टाफ में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
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एक जगह रखने हैं पॉजिटिव मरीज ताकि न फैले संक्रमण
शुरुआती दौर में चंडीगढ़ में पीजीआई, जीएमएसएच और जीएमसीएच तीनों में पॉजिटिव केस रखे जाते थे लेकिन विशेषज्ञों से मिले सुझाव के बाद प्रशासन ने पॉजिटिव मरीजों के लिए पीजीआई में अलग से व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इसके बाद नेहरू एक्सटेंशन को कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल का नाम देकर वहां सिर्फ कोरोना पॉजिटिव मरीजों को रखने की व्यवस्था की गई। इस आदेश का पीजीआई रेजिडेंट्स डॉक्टर एसोसिएशन ने पुरजोर विरोध भी किया था लेकिन आदेश को वापस नहीं लिया गया।
इमरजेंसी में मरीजों को रात में भी शिफ्ट किया जाता है लेकिन सामान्य तौर पर शाम के बाद पॉजिटिव केस भर्ती नहीं किए जा रहे। क्योंकि भर्ती मरीजों को शिफ्ट करने के लिए प्रॉपर व्यवस्था करने में काफी समय लगता है। इस पर दोनों अस्पतालों के साथ वार्ता कर सहमति ली जा चुकी है।
- डॉ. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता