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पीजीआई नई इंटरवेंशन और टेक्नोलॉजी के विकास के लिए समर्पित : डॉ. राजीव बहल
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चंडीगढ़। पीजीआई एक राष्ट्रीय खजाना है। यह एक ऐसा सेंटर है, जहां सबसे प्रतिभाशाली डॉक्टर चिकित्सा को आगे बढ़ाने के लिए इकट्ठा होते हैं। पिछले दो वर्षों में ही पीजीआई ने 74 ग्रांट हासिल की हैं जिनमें से लगभग आधे नई इंटरवेंशन और टेक्नोलॉजी के विकास के लिए समर्पित हैं। यह भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम में पीजीआई की भूमिका का प्रमाण है। यह बात भारत सरकार के हेल्थ रिसर्च विभाग के सचिव और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के डायरेक्टर जनरल डॉ. राजीव बहल ने पीजीआई के 62वें संस्थान स्थापना दिवस समारोह में कही। वह इस कार्यक्रम में बतौर अतिथि पहुंचे थे। उन्होंने मेडिकल इंस्टीट्यूट में फिजिशियन, साइंटिस्ट और इनोवेटरों का निर्माण विषय पर विचार रखे। उन्होंने क्लीनिकल ट्रायल और ट्रांसलेशनल रिसर्च में पीजीआई की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह भारत को मेडिकल और विकास में वैश्विक अग्रणी बनाने के लिए जरूरी है।
डॉ. बहल ने कहा भारतीय स्वास्थ्य सेवा का भविष्य नई इंटरवेंशन और डायग्नोस्टिक टूल विकसित करने की हमारी क्षमता पर निर्भर करता है। साक्ष्य आधारित रिसर्च पर आईसीएमआर का ध्यान है। फिजिशियन साइंटिस्टों को प्रशिक्षित करने की अपनी प्रतिबद्धता के साथ मेडिकल टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता की ओर भारत की यात्रा के लिए आवश्यक है। डॉ. बहल ने रोगियों तक पहुंचने के लिए साइंस और रिसर्च को नवाचार में बदलने के लिए इंजीनियर, डॉक्टर, उद्योग साझेदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा आईआईटी, एम्स और अन्य प्रमुख संस्थानों के साथ आईसीएमआर का सहयोग मेडिकल और टेक्नोलॉजी को जोड़ने के लिए हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का उदाहरण है। यहां विकसित किए गए उपकरण इन्फ्रारेड हेमेटोमा डिटेक्टर, मोबी-लैब आदि ने बिल गेट्स जैसे वैश्विक नेताओं को भी प्रभावित किया है। यह भारत के लिए गर्व की बात है और स्वास्थ्य सेवा नवाचार में हमारे नेतृत्व की पुष्टि है। डॉ. बहल ने कहा हमारा लक्ष्य भारतीय वैज्ञानिकों और उद्यमियों को दुनिया में पहली तकनीक बनाने में सहायता करना है। आईसीएमआर के हालिया चुनौती अनुदान और पेटेंट सहायता कार्यक्रम नवाचार की इस भावना को प्रेरित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, जिससे सुनिश्चित हो सके कि भारत चिकित्सा क्षेत्र में सफलताओं में सबसे आगे रहे। इस मौके पर नई दिल्ली नेशनल अकादमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के अध्यक्ष आरडी बेहरा ने भी विचार रखे। इस मौके पर 31 अधिकारियों और कर्मचारियों को मेडिकल में बेहतर योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस दौरान पीजीआई निदेशक प्रो. विवेकलाल और आरके राठो ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
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डॉ. बहल ने कहा भारतीय स्वास्थ्य सेवा का भविष्य नई इंटरवेंशन और डायग्नोस्टिक टूल विकसित करने की हमारी क्षमता पर निर्भर करता है। साक्ष्य आधारित रिसर्च पर आईसीएमआर का ध्यान है। फिजिशियन साइंटिस्टों को प्रशिक्षित करने की अपनी प्रतिबद्धता के साथ मेडिकल टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता की ओर भारत की यात्रा के लिए आवश्यक है। डॉ. बहल ने रोगियों तक पहुंचने के लिए साइंस और रिसर्च को नवाचार में बदलने के लिए इंजीनियर, डॉक्टर, उद्योग साझेदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा आईआईटी, एम्स और अन्य प्रमुख संस्थानों के साथ आईसीएमआर का सहयोग मेडिकल और टेक्नोलॉजी को जोड़ने के लिए हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का उदाहरण है। यहां विकसित किए गए उपकरण इन्फ्रारेड हेमेटोमा डिटेक्टर, मोबी-लैब आदि ने बिल गेट्स जैसे वैश्विक नेताओं को भी प्रभावित किया है। यह भारत के लिए गर्व की बात है और स्वास्थ्य सेवा नवाचार में हमारे नेतृत्व की पुष्टि है। डॉ. बहल ने कहा हमारा लक्ष्य भारतीय वैज्ञानिकों और उद्यमियों को दुनिया में पहली तकनीक बनाने में सहायता करना है। आईसीएमआर के हालिया चुनौती अनुदान और पेटेंट सहायता कार्यक्रम नवाचार की इस भावना को प्रेरित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, जिससे सुनिश्चित हो सके कि भारत चिकित्सा क्षेत्र में सफलताओं में सबसे आगे रहे। इस मौके पर नई दिल्ली नेशनल अकादमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के अध्यक्ष आरडी बेहरा ने भी विचार रखे। इस मौके पर 31 अधिकारियों और कर्मचारियों को मेडिकल में बेहतर योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस दौरान पीजीआई निदेशक प्रो. विवेकलाल और आरके राठो ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
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