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पीजीआई के विशेषज्ञों की चेतावनी: गर्भावस्था में बिल्कुल न बरतें लापरवाही, जरा सी चोट भी बन सकती है जानलेवा

Thu, 12 Feb 2026 10:03 AM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 12 Feb 2026 10:03 AM IST
सार

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था में प्लीहा की चोट दुर्लभ होती है लेकिन इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। बहु-विषयक टीम की त्वरित कार्रवाई और समय पर सर्जरी से ही मां और बच्चे की जान बचाई जा सकती है।

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PGI experts warn carelessness during pregnancy minor injury can be fatal
pregnancy - फोटो : istock

विस्तार

गर्भावस्था के दौरान मामूली लगने वाली चोट भी मां और गर्भस्थ शिशु, दोनों के लिए घातक साबित हो सकती है। पीजीआई के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस अवस्था में गिरने, पेट पर चोट लगने, तेज दर्द, रक्तस्राव या बच्चे की हलचल कम होने जैसे संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। समय पर अस्पताल पहुंचना ही दो जिंदगियों को बचाने की कुंजी है।

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31 सप्ताह की गर्भवती महिला सीढ़ियों से गिर गई। शुरुआत में घटना सामान्य लगी लेकिन कुछ ही देर में उसे तेज पेट दर्द, हल्का रक्तस्राव और बच्चे की हलचल में कमी महसूस हुई। परिजन तुरंत उसे पीजीआई ले गए जहां डॉक्टरों के सामने मां और शिशु दोनों की जान बचाने की चुनौती थी।
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जांच में पता चला कि महिला के पेट के भीतर करीब तीन लीटर रक्त जमा हो चुका था। अल्ट्रासाउंड में प्लेसेंटा एब्रप्शन अर्थात गर्भनाल का समय से पहले अलग होना के संकेत मिले। स्थिति गंभीर थी और तुरंत इमरजेंसी सिजेरियन का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के दौरान एक और जटिलता सामने आई महिला की प्लीहा (स्प्लीन) फट चुकी थी और लगातार रक्तस्राव हो रहा था।
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विशेषज्ञों की टीम ने पहले शिशु को सुरक्षित जन्म दिलाया फिर मां की जान बचाने के लिए स्प्लीन को सर्जरी कर निकालना पड़ा। महिला को कई यूनिट रक्त चढ़ाया गया। समय से पूर्व जन्म लेने के कारण नवजात को तुरंत एनआईसीयू में भर्ती कर गहन निगरानी में रखा गया। उपचार और देखभाल के बाद मां और शिशु दोनों की हालत स्थिर हुई और कुछ सप्ताह बाद उन्हें स्वस्थ अवस्था में छुट्टी दे दी गई।

यह दुर्लभ और जटिल केस पीजीआई के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग तथा जनरल सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों डॉ. अमनजोत कौर, डॉ. अभय कुमार, डॉ. आशिमा अरोड़ा और डॉ. मनीष ठाकुर की संयुक्त टीम ने संभाला। इस केस स्टडी को अंतरराष्ट्रीय जर्नल बीएमजे केस रिपोर्ट्स में प्रकाशित किया गया है।


विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था में प्लीहा की चोट दुर्लभ होती है लेकिन इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। बहु-विषयक टीम की त्वरित कार्रवाई और समय पर सर्जरी से ही मां और बच्चे की जान बचाई जा सकती है। स्प्लीन हटाने के बाद संक्रमण से बचाव के लिए महिला को विशेष टीके लगाए गए। नियमित फॉलोअप में मां और शिशु दोनों का विकास सामान्य पाया गया।

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