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Research: महामारी से बचा सकती है रीयल टाइम मॉनिटरिंग, PGI ने गूगल मोबिलिटी डाटा का प्रयोग कर किया शोध
Fri, 02 Dec 2022 10:31 AM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 02 Dec 2022 10:31 AM IST
सार
शोध के दौरान डॉ. कमल किशोर ने देशभर के अलग अलग प्रदेशों के गूगल मोबिलिटी का डाटा लेकर उसका विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि इस डाटा को कोविड-19 की पहली लहर के दौरान दो अलग अलग समय अवधि में लिया गया।
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कोरोना
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
कोरोना महामारी में पीजीआई के विशेषज्ञों ने एक तरफ जहां मरीजों की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना काम किया, वहीं इस जानलेवा वायरस से बचाव के लिए गूगल मोबिलिटी के डाटा को हथियार बनाकर रीयल टाइम मॉनिटरिंग की परिकल्पना को साकार किया। इससे कोविड ही नहीं, इसके जैसी अन्य संक्रामक बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है।
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रीयल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को मूर्त रूप देने के लिए पीजीआई बायो स्टैटिक्स विभाग के डॉ. कमल किशोर ने संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर विपिन कौशल के मार्गदर्शन में शोध किया। इसमें उन्होंने कोविड-19 की पहली लहर के दौरान लॉकडाउन और फिर अनलॉक की समय सीमा के बीच देशभर के लोगों की स्थिति का आकलन किया। इसके आधार पर यह परिणाम पाया कि अगर महामारी या फिर आपात स्थिति के दौरान रीयल टाइम मॉनिटरिंग कांसेप्ट को जारी कर दिया जाए तो बचाव आसानी से किया जा सकता है।
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डॉ. कमल ने बताया कि रियल टाइम मॉनिटर के माध्यम से व्यक्ति अपने आसपास के सार्वजनिक स्थलों व अन्य जगहों की मौजूदा स्थिति व वहां लोगों की उपस्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे में अगर भविष्य में कोरोना वायरस की स्थिति उत्पन्न हुई तो संक्रमण से बचाव के लिए लोग इस परिकल्पना को हथियार के तौर पर प्रयोग कर सकेंगे।
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लॉकडाउन और उसके बाद देखी मूवमेंट
शोध के दौरान डॉ. कमल किशोर ने देशभर के अलग अलग प्रदेशों के गूगल मोबिलिटी का डाटा लेकर उसका विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि इस डाटा को कोविड-19 की पहली लहर के दौरान दो अलग अलग समय अवधि में लिया गया। पहली समय अवधि लॉकडाउन के दौरान 25 मार्च तक की और दूसरी 8 जून से 15 अक्तूबर के बीच की ली गई। इसमें पाया गया कि जिन शहरों में लॉकडाउन के दौरान लोग घरों से कम बाहर निकले वहां संक्रमण का स्तर बेहद कम था। वही अनलॉक होने के साथ ही वहां भयावह रूप से संक्रमण बढ़ा।
घर और सोसायटी में बढ़ा मूवमेंट
गूगल मोबिलिटी के आधार पर प्राप्त आंकड़े को अलग बंदुओं में बांटा गया। इसमें यह बात सामने आई कि कोविड-19 की पहली लहर के दौरान सबसे ज्यादा लोगों ने अपने घर और सोसायटी में मूवमेंट की। अगर दुकान, ऑफिस, मेडिकल स्टोर या ऐसे ही अन्य सार्वजनिक स्थानों की स्थिति देखी जाए तो उस दौरान लोग बेहद कम संख्या में इन जगहों पर एकत्र पाए गए जिससे संक्रमण का स्तर बेहद धीमा रहा।
लॉकडाउन और रियायत का तुलनात्मक परिणाम
प्रदेश लॉकडाउन में संक्रमण रियायत में संक्रमण
महाराष्ट्र 107 15 लाख
पंजाब 29 1 लाख 27154
हरियाणा 30 1 लाख 50033
चंडीगढ़ 7 13646
जम्मू कश्मीर 6 87942
मिजोरम 0 2253
कोविड की पहली लहर के दौरान अचानक से एक अनजाने वायरस से इलाज के साथ ही उसके बचाव के उपायों पर भी फोकस करना जरूरी हो गया था। इसलिए महामारी से बचाव के लिए गूगल मोबिलिटी डाटा का प्रयोग करके विशेष तरह का शोध किया गया, जिसके परिणाम स्वरूप यह बात सामने आई कि रीयल टाइम मॉनिटर का कांसेप्ट कोविड-19 जैसे अन्य संक्रामक बीमारियों में बचाव का मुख्य हथियार बन सकता है। - प्रो. विपिन कौशल, चिकित्सा अधीक्षक व शोध के प्रमुख अनुसंधानकर्ता, पीजीआई