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PGI के शोध में दावा: पियोग्लिटाजोन दवा से यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर का खतरा नहीं, कई देशों में है प्रतिबंध

Sun, 25 Feb 2024 04:00 PM IST
ajay kumar वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 25 Feb 2024 04:00 PM IST
सार

प्रो. आशु रस्तोगी ने बताया कि शोध में शामिल इन 12 हजार लोगों में चंडीगढ़ पीजीआई के 9 हजार और रोहतक के 3 हजार मरीज शामिल थे। इनमें महिलाओं की संख्या 5 हजार और पुरुषों की 7 हजार थी। इन मरीजों में यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर का कोई लक्षण नहीं मिला।

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PGI Chandigarh made big claim in research regarding diabetes medicine
पीजीआई चंडीगढ़। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मधुमेह (शुगर) की दवा पियोग्लिटाजोन से कैंसर के खतरे को देखते हुए विश्व के कई देशों में लगे रोक को पीजीआई के विशेषज्ञों ने अपने शोध से खरिज कर दिया है। पीजीआई चंडीगढ़ और पीजीआई रोहतक के विशेषज्ञों ने शुगर के 12 हजार मरीजों पर इस दवा के प्रभाव का आकलन कर यह निष्कर्ष निकाला है कि पियोग्लिटाजोन से यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर का खतरा नहीं है।

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विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि यह दवा अन्य दवाओं की तुलना में मरीजों के लिए ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि ज्यादा वजन वाले मधुमेह के मरीजों में यह दवा हाइपोग्लाइसीमिया के स्तर को कम नहीं होने देती। साथ ही इससे पेट की चर्बी भी तेजी से कम होती है। यह शोध डायबिटीज मेटाबॉलिज्म रिसर्च एंड रिव्यू जरनल में प्रकाशित किया गया है।
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इस शोध में पीजीआई का प्रतिनिधित्व करने वाले इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रो. आशु रस्तोगी ने बताया कि वर्ष 2013 में फ्रांस और इंग्लैंड में इस दवा को लेकर एक शोध सामने आया जिसमें बताया गया था कि इस दवा के उपयोग से मरीजों में यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर का खतरा है। उसे गंभीरता से लेते हुए इस दवा पर प्रतिबंध लगा दिया गया। भारत में उस दवा को लेकर सही स्थिति का पता लगाने के लिए आईसीएमआर ने पीजीआई को शोध के लिए फंड दिया। इसके बाद चंडीगढ़ और रोहतक पीजीआई में इलाज करा रहे 12 हजार मरीजों पर शोध शुरू किया गया।

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दो वर्गों में बांटकर किया शोध

प्रो. आशु रस्तोगी ने बताया कि शोध में शामिल इन 12 हजार लोगों में चंडीगढ़ पीजीआई के 9 हजार और रोहतक के 3 हजार मरीज शामिल थे। इनमें महिलाओं की संख्या 5 हजार और पुरुषों की 7 हजार थी। सभी मरीजों को दो वर्गों में बांटा गया। एक वर्ग में पियोग्लिटाजोन दवा लेने वालों को रखा गया और दूसरे में अन्य दवा का सेवन करने वालों को। सभी मरीजों का चार साल तक लगातार फॉलोअप किया गया लेकिन दोनों ही वर्गों में शामिल मरीजों में यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर का कोई लक्षण नहीं मिला। इस शोध के दौरान यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर के साथ ही अन्य प्रकार के कैंसर के खतरे का भी आकलन किया गया लेकिन अन्य कैंसर भी सामान्य अनुपात में मिले। इससे साबित होता है कि इस दवा के सेवन से कैंसर का खतरा नहीं है।

पियोग्लिटाजोन का उपयोग व लाभ

टाइप-2 मधुमेह के कारण होने वाले उच्च रक्त शर्करा के स्तर के इलाज के लिए उचित आहार और व्यायाम के साथ पियोग्लिटाजोन का उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग अकेले या अन्य दवाओं जैसे इंसुलिन, मेटफॉर्मिन या सल्फोनील्यूरिया एजेंटों के साथ किया जा सकता है। पियोग्लिटाजोन आपके शरीर को इंसुलिन का बेहतर उपयोग करने में मदद करके काम करता है। जेनेरिक दवा होने के कारण यह आसानी से मरीजों के पहुंच में है।

क्या है यूरिनरी ब्लैडर कैंसर

यूरिनरी ब्लैडर कैंसर एक प्रकार का यूरोलॉजिकल मैलिग्नेंसी है, जो मूत्राशय के अंदर मौजूद कोशिकाओं में शुरू होता है। मूत्राशय का कैंसर तब शुरू होता है, जब मूत्राशय बनाने वाली कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर होने लगतीं हैं। ब्लैडर कैंसर के लक्षणों का अगर जल्दी पता चल जाए तो शुरुआती निदान और उपचार हो सकता है।

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