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चंडीगढ़ PGI में आज हड़ताल: ओपीडी में एक दिन में आते हैं 10 हजार मरीज, इलाज के लिए भटकना पड़ेगा

Wed, 07 Aug 2024 10:21 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Wed, 07 Aug 2024 10:21 PM IST
सार

पीजीआई चंडीगढ़ में आज मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ सकता है। क्योंकि पीजीआई के चार हजार अनुबंध कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। 

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PGI Chandigarh Four thousand contract employees on strike patients will face problems
चंडीगढ़ पीजीआई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीजीआई चंडीगढ़ में वीरवार (आठ अगस्त) को मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ सकता है। क्योंकि पीजीआई के लगभग 4 हजार अनुबंध कर्मचारी वीरवार सुबह 6 बजे से हड़ताल पर रहेंगे। कर्मचारियों की हड़ताल का खामियाजा दूर-दराज व दूसरे राज्यों से आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ेगा। पीजीआई की ओपीडी में रोजाना 10 हजार से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं।  
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पीजीआई के अनुबंध कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने का एलान किया है। इन कर्मचारियों में अस्पताल अटेंडेंट, सफाई कर्मचारी, रसोई कर्मी, कपड़े धोने वाले कर्मचारियों, टेक्नीशियन, सुरक्षा कर्मी भी हड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान वे एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। हड़ताल की घोषणा से पहले बुधवार की शाम केंद्रीय उप श्रम आयुक्त के सामने दोनों पक्षों में सुलह वार्ता हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है।
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पीजीआई जॉइंट एक्शन कमेटी के अध्यक्ष अश्वनी कुमार मुंजाल ने बताया कि पीजीआई प्रशासन व स्वास्थ्य मंत्रालय ने किसी भी मांग की पूर्ति नहीं की है। पिछले चार महीने से पीजीआई प्रबंधन व स्वास्थ्य मंत्रालय गरीब ठेकाकर्मियों की खिल्ली उड़ा रहा है इसलिए सभी अनुबंधकर्मी आठ अगस्त को हड़ताल पर रहेंगे। पुलिस ने जोर जबरदस्ती की तो कर्मचारी जेल भरो आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।
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जून में भी की गई थी हड़ताल
कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से पीजीआई में ओपीडी, वार्ड, ओटी और इमरजेंसी की व्यवस्था चरमराएगी। इससे पहले जून में भी अनुबंधकर्मियों ने एक दिन की हड़ताल की थी। हड़ताल से सबसे ज्यादा परेशानी मरीज को झेलनी पड़ी थी। ओपीडी से लेकर वार्ड, इमरजेंसी, ओटी, ट्रॉमा सेंटर तक हर जगह कार्य बाधित रहा। जिन मरीजों को पहले से ऑपरेशन की डेट दी गई थी, उनकी सर्जरी भी समय पर नहीं हो सकी, वहीं ओपीडी में इलाज कराने आए मरीजों को डॉक्टरों तक पहुंचने में काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी। रिसेप्शन काउंटर, शुल्क काउंटर खाली पड़े रहे। डॉक्टर रूम के बाहर अटेंडेंट न होने से डॉक्टरों को भी परेशानी हुई थी। 
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