चंडीगढ़ मेयर चुनावः आप-कांग्रेस के तीन दिन के प्रयास के बावजूद हाथ खाली, हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
चंडीगढ़ मेयर का चुनाव गुरुवार सुबह 11 बजे से शुरू होना था। शहर के लोगों को आज नया मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर मिलने की उम्मीद थी लेकिन पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह की तबीयत खराब होने के कारण चुनाव को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है।
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चंडीगढ़ में मेयर चुनाव के लिए तीन दिन से कानूनी लड़ाई लड़ रही आम आदमी पार्टी व कांग्रेस के हाथ खाली रहे और उन्हें निराशा ही हाथ लगी। गुरुवार को ही चुनाव संपन्न करवाने की मांग वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने किसी भी अंतरिम आदेश से इन्कार करते हुए यूटी प्रशासन सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
आम आदमी पार्टी से मेयर पद के दावेदार कुलदीप कुमार ने याचिका दाखिल करते हुए भाजपा पर चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर व अन्य पदों के चुनाव को हाईजैक करने का आरोप लगाया है। याचिका में हाईकोर्ट से चुनाव प्रक्रिया की निगरानी और कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर गुरुवार को ही चुनाव संपन्न करवाने का निर्देश देने की मांग की गई थी ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव हो सके। गुरुवार को दोपहर में ही याचिका तैयार की गई और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इस याचिका पर तुरंत सुनवाई करने की अपील की गई। इसे मंजूर करते हुए सुनवाई के लिए जस्टिस सुधीर सिंह व हर्ष बांगड़ की खंडपीठ के समक्ष भेज दिया।
गुरुवार को दोपहर बाद इस याचिका पर सुनवाई हुई और इस दौरान याची पक्ष ने कहा कि चंडीगढ़ में मेयर व अन्य पदों पर चुनाव हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बिना संभव नहीं है। भाजपा पार्षदों ने परिणाम को अपने पक्ष में बदलने के लिए अनुचित तरीकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों ने भी दबाव में आकर चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की कोशिश की है। इस पर प्रशासन की ओर से बताया गया कि 16 जनवरी को पंजाब पुलिस जबरन नगर निगम कार्यालय में घुस गई थी और चंडीगढ़ पुलिस को कानून व्यवस्था को लेकर कुछ जानकारी मिली थी। इसके साथ ही जिस अधिकारी को चुनाव संपन्न करवाना था वह भी अचानक बीमार हो गए। इन सभी कारणों से प्रशासन को गुरुवार को होने वाले चुनाव को टालने पड़ा। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि डीसी ने चुनाव छह फरवरी को करवाने की नोटिफिकेशन जारी कर दी है।
घटनाक्रम पर उठाए सवाल
याचिका में कहा गया कि जो अधिकारी चुनाव प्रक्रिया का संचालन कर रहा था, उन्हें निर्धारित चुनाव से एक दिन पहले मनमाने ढंग से स्थानांतरित कर दिया गया। उनके स्थान पर हरियाणा कैडर से आए नए अधिकारी ने कार्यभार संभाला और आते ही मेयर पद के एक उम्मीदवार को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत तौर पर पेश होकर नामांकन वापसी के सत्यापन के लिए कहा गया। यह भी बताया गया कि चुनाव के दिन ही अचानक पीठासीन अधिकारी के खराब स्वास्थ्य के आधार पर एमसी परिसर में पार्षदों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जबकि एक दिन पूर्व ही चंडीगढ़ प्रशासन ने हाईकोर्ट में चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न करने को लेकर प्रतिबद्धता जताई थी।
तीन दिन में चार सुनवाई, फिर भी निराशा हाथ आई
भाजपा व आम आदमी पार्टी मेयर व अन्य पदों पर मिल कर चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले कोई समीकरण न बिगड़े इसके लिए मंगलवार को चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष हरमोहिंदर लक्की की पार्षद जसवीर सिंह बंटी को अवैध हिरासत में बताते हुए मुक्त करवाने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। इस पर हाईकोर्ट ने रात एक बजे सुनवाई कर प्रशासन को नोटिस जारी किया था। हालांकि 17 जनवरी को शाम पांच बजे सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया। 17 जनवरी को फिर से एक याचिका दाखिल करते हुए चुनाव पारदर्शी व निष्पक्ष हों इसे सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया था और चुनाव की वीडियोग्राफी का आदेश दिया था। इसके बाद गुरुवार को चुनाव न होने के कारण फिर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इस मामले में भी हाईकोर्ट ने बिना कोई राहत दिए केवल यूटी प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। ऐसे में तीन दिन और चार सुनवाई के बाद भी आप-कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं लगा।