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पीयू के प्रोफेसर की हाईकोर्ट में याचिका, वजह बड़ी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 04 Feb 2016 08:50 AM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के प्रोफेसरों ने एक बार फिर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। मामला वही सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष किए जाने का है।
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याचिका में कहा है कि जब पीयू को 92 प्रतिशत ग्रांट केंद्र से आती है, तो केंद्र इसे सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी क्यों नहीं मानता। मांग की गई कि सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी न होने का हवाला देते हुए सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा न बढ़ाने का केंद्र का फैसला रद्द किया जाना चाहिए।
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हाईकोर्ट ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और पीयू को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। मंत्रालय से पूछा है कि केंद्रीय फंडों से चलने वाली यूनिवर्सिटीज़ और इंस्टीट्यूट का ब्योरा दिया जाए। यह भी बताया जाए कि इन्हें कितने फीसदी ग्रांट दी जाती है।
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दो प्रोफेसरों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि पंजाब सरकार केवल आठ प्रतिशत ग्रांट देती है, लेकिन यह ग्रांट सालाना 21 करोड़ रुपये ही है। जबकि पीयू का बजट सैंकड़ों करोड़ रुपये में है। याचिका में कहा गया है कि जब केंद्र सरकार 92 फीसदी फंड पीयू को देता है, तो यह अपने आप में एक प्रकार से सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी ही है।
याचिका में कहा गया है कि यूजीसी के नियमानुसार सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 65 है। पीयू की सिंडीकेट वर्ष 2011 में उम्र सीमा बढ़ाने का फैसला ले चुकी है।
ऐसे में सीनेट का फैसला लागू कर उम्र सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। पिछले साल चार दिसंबर को केंद्र सरकार की ओर से पीयू को सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी नहीं होना बताते हुए उम्र सीमा न बढ़ाने के फैसले को रद्द किया जाना चाहिए।