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पालतू डॉगी में पागलपन के लक्षण दिखें तो ये करें
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 13 May 2014 01:23 PM IST
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स्ट्रे डॉग के रैबीज के लक्षण दिखने पर नगर निगम व एनजीओ सक्रिय हो जाती है। उसे काबू करने के लिए जी तोड़ मेहनत करती है, लेकिन यदि किसी घर के पालतू डॉग में ये लक्षण दिखने लगे तो उसके लिए न तो एनजीओ आगे आती है और न ही नगर निगम की टीम। यहां तक प्राइवेट डाक्टर भी हाथ डालने से कतराते हैं।
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ऐसे में घर के मालिक को ही अपनी तरह से कदम उठाने पड़ते हैं। चंडीगढ़ के वेटरनिटी डाक्टर लवलेश कुमार गुप्ता ने बताया कि आमतौर पर पालतू डॉग में ऐसे लक्षण बहुत कम देखने को मिलते हैं, लेकिन यदि ऐसा होता है तो उसे नियंत्रित करने की जिम्मेदारी उसके मालिक की होती है।
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मालिक को चाहिए जब भी ऐसे कुछ लक्षण दिखने लगे तो उसे तुरंत आइसोलेट कर देना चाहिए। मसलन उसे एक कमरे में बंद कर दें या फिर बांधकर रखें। रैबीज के लक्षण दिखने पर डॉगी दस दिन के भीतर कभी भी मर सकता है। आमतौर पर डॉगी दो से तीन दिन के भीतर दम तोड़ देते हैं।
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एक एनजीओ के प्रेसिडेंट व वेटरनिटी डाक्टर जेसी कोछड़ ने बताया कि एनजीओ भी इसमें कोई मदद नहीं कर सकती है। हम उन्हें सलाह दे सकते हैं। ऐसी स्थिति न आए ऐसे में मालिक को लगातार वैक्सीनेशन कराना चाहिए।
सर्जरी के लिए कुत्तों को भेजना पड़ता है पंचकूला
चंडीगढ़ के पशु हास्पिटल में सर्जन की पोस्ट नहीं है। पोस्ट नहीं होने से सर्जन की नियुक्ति नहीं की गई है। यदि किसी पालतू पशु को सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है तो उसे पंचकूला के सेक्टर तीन पेट एनिमल के सेंटर में भेजा जाता है।
डा. लवलेश कुमार गुप्ता के मुताबिक चंडीगढ़ में पांच हास्पिटल के लिए पांच डाक्टर तैनात किए गए हैं। हर हास्पिटल के लिए एक डाक्टर नियुक्त किया गया है। पहले तो एरिया बड़ा था, लेकिन जब से नगर निगम ने कई गांव एडाप्ट किए हैं, तब से जानवरों का बोझ भी कम हो गया है। सर्जरी के डाक्टर की पोस्ट ही नहीं है तो उन्हें तैनात कहां किया जाएगा। फिलहाल उसकी ज्यादा जरूरत पड़ती नहीं है।